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Damoh: नवमी तिथि को माता के दरबार में दंड भरकर आते हैं श्रद्धालु, रास्ते में कंकड़-पत्थर का नहीं होता एहसास
Thu, 30 Mar 2023 05:35 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: अरविंद कुमार
Updated Thu, 30 Mar 2023 05:35 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के दमोह जिले में वैसे तो मां दुर्गा के कई प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर हैं, उन्ही मंदिरों में एक है तेंदूखेड़ा ब्लॉक का बलखंडन माता का दरबार। यहां चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि को श्रद्धालु अपने जवारे लेकर दंड भरते हुए उघारे माता के दरबार में आते हैं।
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दंड भरकर आते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शक्ति की भक्ति का पर्व नवरात्र में मां के कई रूपों के दर्शन करने को मिलते हैं। इन्हीं में मां के ऐसे भक्त भी मिलते हैं, जिनकी तपस्या और साधना देखते ही बनती है। दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लाक के दसोंदी गांव में बलखंडन माता का प्राचीन मंदिर है। यहां चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि को माता के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालु उघारे होकर दंड भरते हुए आते हैं।
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बता दें कि यहां भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है, चारों और श्रद्धालुओं की भीड़ ऐसी रहती है कि जगह भी कम पड़ जाती है। केवल वे ही लोग दंड भरते हुए आते हैं, जो घट स्थापना करते हैं। बाकी श्रद्धालु पैदल ही दर्शनों के लिए आते हैं। दसोंदी के बलखंडन माता के दरबार में पहुंचने के लिए कंकड़, पत्थरों के रास्तों में होते हुए दंड भरते बंलखड़न माता के दरबार में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रास्ते में होने वाले कष्ट और आसमान से बरसती हुई धूप का मां के भक्तों के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और न ही थकान का एहसास होता है।
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मीलों की दूरी तय कर पहुंचते हैं मां के दरबार...
बंलखड़न माता का चमत्कार है कि चौबीस क्षेत्र के गांव-गांव से पंडा जवारे के घट लिए मीलों की दूरी तय कर मां के दरबार तक पहुंचते हैं। सनातन काल से चली हा रही पंरपरा आज भी उसी अंदाज से निभाई जा रही है। ग्राम दसोंदी के नन्ने सिंह और हेमराज सिंह ने बताया, सैकड़ों साल पहले मां बलखंडन पहाड़ी के पास पेड़ के नीचे प्रकट हुई थीं। मां बलखंडन के चमत्कार से श्रद्धालु चैत्र नवरात्र पर्व पर उघारे होकर दंड भरते हुए माता के दरबार में जाते हैं। यह परंपरा काफी पुरानी है, जो आज भी मां के दरबार में अनवरत जारी है।
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