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मध्यप्रदेश वन विभाग का दावाः कोरोना वायरस से कम प्रभावित हैं वनों के आसपास के जिले
Thu, 14 May 2020 04:17 AM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, भोपाल
पीटीआई, भोपाल
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 14 May 2020 04:17 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा कोरोना वायरस को लेकर किये गये एक अध्ययन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वनों के आसपास के जिले कोरोना वायरस के संक्रमण से कम प्रभावित हुए हैं। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग की एक विज्ञप्ति में बुधवार को कहा गया है कि मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा कोरोना वायरस को लेकर किये गये अध्ययन की रिपोर्ट से एक महत्पूर्ण तथ्य सामने आया है।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार यह पाया गया कि वनों के आसपास के जिले कोरोना वायरस के संक्रमण से तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित हैं।' विज्ञप्ति के अनुसार कोविड-19 के प्रसार के सापेक्ष प्रदेश के रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन घोषित किये जाने के संबंध में किये गये अध्ययन से उपरोक्त महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।
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महत्वपूर्ण बात है कि बालाघाट, शहडोल, पन्ना, अनूपपुर, उमरिया जैसे कई जिलों में भारी संख्या में प्रवासी मजदूर लौट कर आये हैं। इसके बावजूद भी वनों के अधिक घनत्व वाले ये जिले ग्रीन जोन में ही हैं।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध आँकड़ों से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि अधिक वनों की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में नागरिकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत बेहतर है।
प्रदेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से तीन सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले जिले बालाघाट (4932 वर्ग किलोमीटर), छिंदवाड़ा (4588 वर्ग किलोमीटर) और बैतूल (3663 वर्ग किलोमीटर) हैं।
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अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार यह पाया गया कि वनों के आसपास के जिले कोरोना वायरस के संक्रमण से तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित हैं।' विज्ञप्ति के अनुसार कोविड-19 के प्रसार के सापेक्ष प्रदेश के रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन घोषित किये जाने के संबंध में किये गये अध्ययन से उपरोक्त महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।
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मध्यप्रदेश में देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र है।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार उज्जैन, इंदौर, खरगोन, भोपाल, मुरैना जैसे जिले, जहाँ प्रति हजार व्यक्ति वन क्षेत्र उपलब्धता 100 हेक्टेयर से भी कम है, सभी रेड जोन में हैं। बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों में वनों का घनत्व होने के साथ प्रति व्यक्ति वनों की उपलब्धता भी अधिक है। ये जिले कोविड से अत्यधिक प्रभावित महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के रेड जोन जिलों से लगे होने के बाद भी रेड जोन में न होते हुए ऑरेंज जोन में हैं।
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महत्वपूर्ण बात है कि बालाघाट, शहडोल, पन्ना, अनूपपुर, उमरिया जैसे कई जिलों में भारी संख्या में प्रवासी मजदूर लौट कर आये हैं। इसके बावजूद भी वनों के अधिक घनत्व वाले ये जिले ग्रीन जोन में ही हैं।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध आँकड़ों से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि अधिक वनों की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में नागरिकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत बेहतर है।
प्रदेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से तीन सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले जिले बालाघाट (4932 वर्ग किलोमीटर), छिंदवाड़ा (4588 वर्ग किलोमीटर) और बैतूल (3663 वर्ग किलोमीटर) हैं।
