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एमपी: रेबीज से जूझ रही महिला ने काटी गले और हाथ की नस, इलाज के दौरान मौत; अस्पताल में मचा हड़कंप
Fri, 04 Sep 2026 09:08 AM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 09:08 AM IST
सार
छिंदवाड़ा में रेबीज संक्रमित 45 वर्षीय महिला ने गंभीर रूप से खुद को घायल कर लिया और जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों को महिला के रेबीज संक्रमित होने की जानकारी मिली।
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जिला अस्पताल
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
छिंदवाड़ा के धरमटेकड़ी चौकी क्षेत्र में रेबीज संक्रमण से जूझ रही 45 वर्षीय महिला ने असहनीय परेशानी के बीच खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। बुधवार को महिला ने अपने गले और हाथ की नस काट ली। खून से लथपथ हालत में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। लेकिन महिला की मौत के बाद अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब डॉक्टरों को पता चला कि महिला लंबे समय से रेबीज संक्रमित थी।
सबसे गंभीर बात यह रही कि महिला को अस्पताल लाने वाले परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में इमरजेंसी में महिला के इलाज के दौरान डॉक्टर और कर्मचारी उसके संपर्क में आए। संक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल एहतियाती कदम उठाते हुए संपर्क में आए डॉक्टरों, कर्मचारियों और परिजनों को रेबीज से बचाव के इंजेक्शन लगवाए।
कुत्ते के काटने के बाद नहीं लगवाया इंजेक्शन
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. हर्षवर्धन कुड़ापे के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि करीब तीन महीने पहले महिला एक स्ट्रीट डॉग को अपने घर लेकर आई थी। इसी दौरान कुत्ते ने महिला को काट लिया था। कुछ दिन बाद कुत्ते की मौत हो गई, लेकिन महिला ने कुत्ते के काटने को गंभीरता से नहीं लिया। बताया गया है कि महिला ने रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं लगवाई। कुछ समय बाद उसमें रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। संक्रमण बढ़ने पर वह पानी और हवा से डरने लगी थी। परिजन उसका इलाज कराने नागपुर भी ले गए थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
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पानी और हवा से डरने लगी थी महिला
रेबीज संक्रमण बढ़ने के साथ महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई। पानी पीने और हवा के संपर्क में आने पर परेशानी होने लगी थी। बीमारी से होने वाली असहनीय तकलीफ के बीच बुधवार को उसने गला और हाथ की नस काटकर खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मौत के बाद पता चला संक्रमण, अस्पताल में मचा हड़कंप
महिला की मौत के बाद जब उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को मिली तो कर्मचारियों में चिंता की स्थिति बन गई। क्योंकि महिला को इमरजेंसी यूनिट के ड्रेसिंग रूम में प्राथमिक उपचार दिया गया था। संक्रमण की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने महिला के संपर्क में आए करीब 6 से 7 परिजनों तथा इलाज में शामिल डॉक्टरों और 25 से 30 मेडिकल स्टाफ को एहतियातन रेबीज से बचाव के इंजेक्शन लगाए।
ड्रेसिंग रूम को कराया सैनिटाइज
महिला के गले और हाथ की नस कटने से काफी खून बह रहा था। उसे इमरजेंसी के ड्रेसिंग रूम में ले जाकर उपचार दिया गया था। रेबीज संक्रमण की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को अस्पताल प्रबंधन ने ड्रेसिंग रूम को दवाओं का स्प्रे कर सैनिटाइज कराया। अस्पताल प्रबंधन ने संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए अन्य मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी बरती।
प्रोटोकॉल के तहत नहीं हुआ पोस्टमार्टम
धरमटेकड़ी चौकी प्रभारी दिनेश बघेल ने बताया कि महिला की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रोटोकॉल के तहत महिला का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि महिला रेबीज संक्रमण से परेशान थी और इसी परेशानी के चलते उसने खुद को घायल किया। पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
ये भी पढ़ें- एमपी: आज 120 करोड़ के आभूषणों से सजेगा ग्वालियर का गोपाल मंदिर, राजसी वैभव में होंगे राधा-कृष्ण के दर्शन
परिजनों की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
घटना के बाद पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि महिला को अस्पताल लाते समय परिजनों ने डॉक्टरों को उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी क्यों नहीं दी। यदि संक्रमण की जानकारी पहले मिल जाती तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ महिला के उपचार के दौरान जरूरी सावधानियां बरत सकते थे। हालांकि, परिजनों से संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।
एक कुत्ते के काटने से शुरू हुई कहानी मौत पर खत्म
करीब तीन महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद यदि महिला ने समय पर रेबीज रोधी उपचार कराया होता तो शायद स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। कुत्ते की मौत के बाद भी महिला ने वैक्सीनेशन नहीं कराया। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ा और बीमारी ने उसकी जिंदगी छीन ली। अब इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आवारा कुत्ते के काटने को मामूली समझने की भूल कितनी भारी पड़ सकती है।
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सबसे गंभीर बात यह रही कि महिला को अस्पताल लाने वाले परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में इमरजेंसी में महिला के इलाज के दौरान डॉक्टर और कर्मचारी उसके संपर्क में आए। संक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल एहतियाती कदम उठाते हुए संपर्क में आए डॉक्टरों, कर्मचारियों और परिजनों को रेबीज से बचाव के इंजेक्शन लगवाए।
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कुत्ते के काटने के बाद नहीं लगवाया इंजेक्शन
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. हर्षवर्धन कुड़ापे के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि करीब तीन महीने पहले महिला एक स्ट्रीट डॉग को अपने घर लेकर आई थी। इसी दौरान कुत्ते ने महिला को काट लिया था। कुछ दिन बाद कुत्ते की मौत हो गई, लेकिन महिला ने कुत्ते के काटने को गंभीरता से नहीं लिया। बताया गया है कि महिला ने रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं लगवाई। कुछ समय बाद उसमें रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। संक्रमण बढ़ने पर वह पानी और हवा से डरने लगी थी। परिजन उसका इलाज कराने नागपुर भी ले गए थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
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पानी और हवा से डरने लगी थी महिला
रेबीज संक्रमण बढ़ने के साथ महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई। पानी पीने और हवा के संपर्क में आने पर परेशानी होने लगी थी। बीमारी से होने वाली असहनीय तकलीफ के बीच बुधवार को उसने गला और हाथ की नस काटकर खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मौत के बाद पता चला संक्रमण, अस्पताल में मचा हड़कंप
महिला की मौत के बाद जब उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को मिली तो कर्मचारियों में चिंता की स्थिति बन गई। क्योंकि महिला को इमरजेंसी यूनिट के ड्रेसिंग रूम में प्राथमिक उपचार दिया गया था। संक्रमण की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने महिला के संपर्क में आए करीब 6 से 7 परिजनों तथा इलाज में शामिल डॉक्टरों और 25 से 30 मेडिकल स्टाफ को एहतियातन रेबीज से बचाव के इंजेक्शन लगाए।
ड्रेसिंग रूम को कराया सैनिटाइज
महिला के गले और हाथ की नस कटने से काफी खून बह रहा था। उसे इमरजेंसी के ड्रेसिंग रूम में ले जाकर उपचार दिया गया था। रेबीज संक्रमण की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को अस्पताल प्रबंधन ने ड्रेसिंग रूम को दवाओं का स्प्रे कर सैनिटाइज कराया। अस्पताल प्रबंधन ने संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए अन्य मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी बरती।
प्रोटोकॉल के तहत नहीं हुआ पोस्टमार्टम
धरमटेकड़ी चौकी प्रभारी दिनेश बघेल ने बताया कि महिला की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रोटोकॉल के तहत महिला का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि महिला रेबीज संक्रमण से परेशान थी और इसी परेशानी के चलते उसने खुद को घायल किया। पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
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परिजनों की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
घटना के बाद पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि महिला को अस्पताल लाते समय परिजनों ने डॉक्टरों को उसके रेबीज संक्रमित होने की जानकारी क्यों नहीं दी। यदि संक्रमण की जानकारी पहले मिल जाती तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ महिला के उपचार के दौरान जरूरी सावधानियां बरत सकते थे। हालांकि, परिजनों से संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।
एक कुत्ते के काटने से शुरू हुई कहानी मौत पर खत्म
करीब तीन महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद यदि महिला ने समय पर रेबीज रोधी उपचार कराया होता तो शायद स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। कुत्ते की मौत के बाद भी महिला ने वैक्सीनेशन नहीं कराया। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ा और बीमारी ने उसकी जिंदगी छीन ली। अब इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आवारा कुत्ते के काटने को मामूली समझने की भूल कितनी भारी पड़ सकती है।
