देख लो सरकार: छिंदवाड़ा में जिंदा किसान को कागजों में बताया मृत, बंद हुई किसान सम्मान निधि; अब काट रहा चक्कर
छिंदवाड़ा के ग्राम पतलोन निवासी किसान ब्रेतना यादव को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इसके कारण 2022 से उसकी किसान सम्मान निधि बंद है। चार साल में 13 आवेदन देने के बाद भी समाधान नहीं मिला, अब जनसुनवाई में गुहार लगाई।
छिंदवाड़ा के ग्राम पतलोन निवासी किसान ब्रेतना यादव को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इसके कारण 2022 से उसकी किसान सम्मान निधि बंद है। चार साल में 13 आवेदन देने के बाद भी समाधान नहीं मिला, अब जनसुनवाई में गुहार लगाई।
विस्तार
छिंदवाड़ा जिले में सरकारी रिकॉर्ड की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक किसान को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह जिंदा है और पिछले चार साल से खुद को जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। कागजों में मृत घोषित किए जाने के कारण उसे मिलने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि भी बंद हो गई है। परेशान किसान मंगलवार को जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचा और कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई।
मामला चांद तहसील के ग्राम पतलोन का है। यहां के किसान ब्रेतना यादव का कहना है कि वह पिछले चार वर्षों से खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। मजबूर होकर उसे जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों से शिकायत करनी पड़ी।
2022 से बंद हो गई किसान सम्मान निधि
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13 आवेदन देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान
सवा एकड़ जमीन से चलता है परिवार
किसान के पास करीब सवा एकड़ कृषि भूमि है। इसी जमीन पर खेती कर वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। उसका कहना है कि खेती से होने वाली आय सीमित है और ऐसे में किसान सम्मान निधि की राशि उसके लिए बड़ा आर्थिक सहारा थी। लेकिन रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने के कारण पिछले चार वर्षों से उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है।
जनसुनवाई में पहुंचकर लगाई गुहार
लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने पर किसान मंगलवार को जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचा। यहां उसने अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया और सरकारी रिकॉर्ड में सुधार कर खुद को जीवित घोषित करने की मांग की। साथ ही चार साल से बंद पड़ी किसान सम्मान निधि की राशि दिलाने की भी मांग की।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
जनसुनवाई में मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच कर आवश्यक सुधार किया जाएगा, ताकि किसान को योजना का लाभ मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस तरह की लापरवाही आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
