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Chhatarpur: महाबली छत्रसाल के मंचन के साथ शुरू हुआ छतरपुर थिएटर फेस्टिवल, तीन दिनों तक रहेगी धूम

Wed, 28 Dec 2022 10:43 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 28 Dec 2022 10:43 PM IST
सार

तीन दिवसीय छतरपुर थिएटर फेस्टिवल का शुभारंभ बुधवार से हुआ। तीन दिनों तक ये आयोजन चलेगा। पहले दिन महाबली छत्रसाल पर आधारित जीवंत नाट्य प्रस्तुति को दर्शकों ने बहुत प्यार लुटाया। 

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Chhatarpur Theater Festival started with the staging of Mahabali Chhatrasal
महाराजा छत्रसाल के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने जमकर तालियां बटोरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध छतरपुर थिएटर फेस्टिवल का रंगारंग शुभारंभ छतरपुर शहर के किशोर सागर स्थित ऑडिटोरियम में किया गया। तीन दिनों तक चलने वाले नाट्य महोत्सव के पहले दिन शंखनाद नाट्य मंच छतरपुर के कलाकारों ने महाराजा छत्रसाल के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति महाबली छत्रसाल का मंचन किया। 
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जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद छतरपुर के तत्वावधान में भारत उदय सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान व शंखनाद नाट्य मंच की ओर से यह तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन निर्देशक शिवेन्द्र शुक्ला और नीरज खरे के लिखे गए नाटक महाबली छत्रसाल का मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन भी शिवेन्द्र शुक्ला द्वारा किया गया। मुख्य भूमिका में अंकुर यादव ने छत्रसाल के किरदार को जीवंत बना दिया। मुख्य गायक के रूप में मंच के पीछे खनिजदेव चौहान, अश्विनी दुबे ने अपनी छाप छोड़ी। रवि हरिजन ने ढोलक और रोशनी यादव ने कोरस में भूमिका निभाई। इस नाटक को सजाने में महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान, गांधी आश्रम परिवार से दमयंती पाणि और हम फाउण्डेशन का योगदान रहा।
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Chhatarpur Theater Festival started with the staging of Mahabali Chhatrasal
छतरपुर थिएटर फेस्टिवल तीन दिनों तक चलेगा। - फोटो : अमर उजाला
किरदारों ने बनाया कहानी को जीवंत
महाराजा छत्रसाल की कहानी उनके जन्म से प्रारंभ होती है, जब वे महाराजा चंपत राय के संघर्ष काल में अपनी मां के गर्भ में मौजूद थे। मुगलों के शासन में बुन्देलखण्ड की जनता प्रताड़ित थी। जन्म के बाद उन्होंने बाल्य अवस्था से ही मुगलों के विरुद्ध विद्रोह का संकल्प लिया और युवा अवस्था में महाराज शिवाजी से हुई एक भेंट ने उनका जीवन बदल दिया। इसके बाद वे आम जनमानस को इकट्ठा कर 25 सैनिक और 5 घुड़सवारों की एक सेना बनाते हैं और फिर अपनी बुन्देली माटी के लिए औरंगजेब के सिपेहसालार शेर अफगन और बंगस जैसे मुगल आतताइयों को ढेर कर देते हैं। अपनी अंतिम अवस्था में पेशवा बाजीराव की मदद से वे बुन्देली माटी को सुरक्षित करते हुए जल समाधि लेते हैं। अपनी 82 साल की उम्र में 52 युद्ध लड़ते हुए अजेय रहने वाले महाराजा छत्रसाल का यह जीवन मंच पर कलाकारों के बेजोड़ अभिनय से जीवंत हो गया।

कलेक्टर-एसपी बोले छतरपुर में कला विकास की अपार संभावनाएं
आयोजन में मुख्य मेहमान के रूप में कलेक्टर संदीप जीआर, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया, जिला पंचायत की सीईओ तपस्या परिहार सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कलेक्टर संदीप जीआर ने कहा कि इस थिएटर फेस्टिवल के माध्यम से छतरपुर के कलाकारों की क्षमताओं का विकास होगा। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल हर वर्ष होना चाहिए साथ ही इस फेस्टिवल में एक नाट्य कार्यशाला भी सम्मिलित हो ताकि नई पीढ़ी भी इस कला से जुड़े।

एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि इस नाटक के माध्यम से उन्होंने देखा कि किस तरह छतरपुर के कलाकारों में कला और संस्कृति के प्रति अपार प्रेम है। उन्होंने कहा कि यदि वे आज का नाटक नहीं देखते तो जीवन का एक अच्छा पहलू छोड़ देते। मंच का संचालन जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद की ओर से लखन असाटी, शंखनाद नाट्य मंच की ओर से नीरज खरे द्वारा किया गया।
 
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