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MP: शिवभक्ति में डूबा सीहोर, लाखों की भीड़ के बीच निकली कांवड़; प्रदीप मिश्रा संग 11 किमी चले हजारों कांवड़िए
Tue, 25 Aug 2026 12:21 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 12:21 PM IST
सार
सावन मास के अंतिम चरण में प्रदोष के अवसर पर सीहोर में सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक करीब 11 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा निकाली गई। बारिश के बावजूद हजारों शिवभक्त यात्रा में शामिल हुए। कुबेरेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित प्रदीप मिश्रा भी कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ यात्रा में शामिल हुए।
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प्रदीप मिश्रा कांवड़ लेकर यात्रा में हुए शामिल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सावन मास के अंतिम चरण में प्रदोष के अवसर पर मंगलवार को सीहोर शिवभक्ति के अद्भुत और विराट दृश्य का साक्षी बना। सुबह नौ बजे सीवन नदी के पावन तट से कुबेरेश्वरधाम तक निकलने वाली ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा शुरू हुई। हजारों शिवभक्तों ने सीवन नदी का पवित्र जल कांवड़ में भरा और भगवान कुबेरेश्वर महादेव के अभिषेक के संकल्प के साथ करीब 11 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की। भगवा ध्वजों से सजा मार्ग, कांवड़ उठाए श्रद्धालु और चारों ओर गूंजते ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘बम-बम भोले’ के जयघोष ने पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया।
बारिश के बीच भी अटूट रही भोलेनाथ की भक्ति
यात्रा शुरू होते ही बारिश ने श्रद्धालुओं की परीक्षा ली, लेकिन शिवभक्तों की आस्था के कदम नहीं रुके। बरसते पानी में भी कांवड़िये पूरे उत्साह के साथ महादेव का नाम जपते हुए कुबेरेश्वरधाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। किसी के चेहरे पर बारिश की बूंदें थीं तो किसी के कंधे पर कांवड़, लेकिन सभी के हृदय में एक ही भाव था- महादेव के चरणों में सीवन का जल अर्पित करना। बारिश की फुहारों के बीच ‘बम-बम भोले’ के जयघोष और भजनों की गूंज ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ऐसा लग रहा था, मानो प्रकृति भी शिवभक्तों की इस यात्रा में अपनी बूंदों से आस्था का अभिषेक कर रही हो।
प्रदीप मिश्रा भी कांवड़ लेकर यात्रा में हुए शामिल
कांवड़ यात्रा का प्रमुख आकर्षण कुबेरेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वयं कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ चलना रहा। सुबह 9 बजे उन्होंने सीवन नदी से जल लिया और कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ कुबेरेश्वरधाम की ओर रवाना हुए। उनके यात्रा में शामिल होते ही श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ हजारों भक्त महादेव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। उनके हाथों में कांवड़ और आसपास उमड़ा भक्तों का सैलाब यात्रा को और अधिक भावपूर्ण और आकर्षक बना रहा था।
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महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और यूपी से पहुंचे श्रद्धालु
कांवड़ यात्रा में मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए शिवभक्तों की मौजूदगी ने इस यात्रा को व्यापक स्वरूप दिया। सभी श्रद्धालु अपने साथ आस्था, विश्वास और महादेव के प्रति समर्पण का भाव लेकर पहुंचे।
सीवन घाट पर भारी भीड़, पुल पर जल भरने की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने सीवन नदी के घाट पर प्रवेश रोक दिया। कांवड़ियों के लिए पुल पर नलों से जल भरने की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने यहीं से सीवन नदी का जल कांवड़ में भरा और यात्रा में आगे बढ़े। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन तथा पुलिस की व्यवस्थाएं भी सक्रिय रहीं।
ये भी पढ़ें- अजब-गजब एमपी: ई-अटेंडेंस के चक्कर में ट्यूब पर बैठकर नदी पार कर रहे शिक्षक, जान हथेली पर रखकर पहुंच रहे स्कूल
आठ झांकियों और भजनों ने बढ़ाया भक्ति का रंग
कांवड़ यात्रा में आठ भव्य झांकियां भी आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इनके साथ भजन प्रस्तुतियों ने वातावरण में भक्ति का रंग और गहरा कर दिया। झांकियों और भजनों के बीच आगे बढ़ते कांवड़ियों का दृश्य श्रद्धालुओं को भावविभोर करता रहा। मार्ग में जगह-जगह सेवा और सहयोग का भाव भी दिखाई दिया।
11 किलोमीटर का सफर, महादेव के चरणों में आस्था का जल
सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक करीब 11 किलोमीटर का यह सफर श्रद्धालुओं के लिए महज पैदल यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण की आध्यात्मिक यात्रा है। कांवड़िये सीवन का पवित्र जल लेकर बाबा कुबेरेश्वर महादेव के दरबार तक पहुंचेंगे और इसी जल से भगवान का अभिषेक करेंगे। कंधों पर कांवड़, आंखों में महादेव के दर्शन की लालसा और होंठों पर भोलेनाथ का नाम लिए आगे बढ़ते श्रद्धालुओं का यह दृश्य सीहोर की धार्मिक आस्था की विराट तस्वीर पेश कर रहा है। बारिश की हर बूंद के बीच गूंजता ‘हर-हर महादेव’ मानो यही संदेश दे रहा था कि सच्ची भक्ति के सामने मौसम की हर चुनौती छोटी है।
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बारिश के बीच भी अटूट रही भोलेनाथ की भक्ति
यात्रा शुरू होते ही बारिश ने श्रद्धालुओं की परीक्षा ली, लेकिन शिवभक्तों की आस्था के कदम नहीं रुके। बरसते पानी में भी कांवड़िये पूरे उत्साह के साथ महादेव का नाम जपते हुए कुबेरेश्वरधाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। किसी के चेहरे पर बारिश की बूंदें थीं तो किसी के कंधे पर कांवड़, लेकिन सभी के हृदय में एक ही भाव था- महादेव के चरणों में सीवन का जल अर्पित करना। बारिश की फुहारों के बीच ‘बम-बम भोले’ के जयघोष और भजनों की गूंज ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ऐसा लग रहा था, मानो प्रकृति भी शिवभक्तों की इस यात्रा में अपनी बूंदों से आस्था का अभिषेक कर रही हो।
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प्रदीप मिश्रा भी कांवड़ लेकर यात्रा में हुए शामिल
कांवड़ यात्रा का प्रमुख आकर्षण कुबेरेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वयं कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ चलना रहा। सुबह 9 बजे उन्होंने सीवन नदी से जल लिया और कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ कुबेरेश्वरधाम की ओर रवाना हुए। उनके यात्रा में शामिल होते ही श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ हजारों भक्त महादेव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। उनके हाथों में कांवड़ और आसपास उमड़ा भक्तों का सैलाब यात्रा को और अधिक भावपूर्ण और आकर्षक बना रहा था।
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महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और यूपी से पहुंचे श्रद्धालु
कांवड़ यात्रा में मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए शिवभक्तों की मौजूदगी ने इस यात्रा को व्यापक स्वरूप दिया। सभी श्रद्धालु अपने साथ आस्था, विश्वास और महादेव के प्रति समर्पण का भाव लेकर पहुंचे।
सीवन घाट पर भारी भीड़, पुल पर जल भरने की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने सीवन नदी के घाट पर प्रवेश रोक दिया। कांवड़ियों के लिए पुल पर नलों से जल भरने की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने यहीं से सीवन नदी का जल कांवड़ में भरा और यात्रा में आगे बढ़े। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन तथा पुलिस की व्यवस्थाएं भी सक्रिय रहीं।
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आठ झांकियों और भजनों ने बढ़ाया भक्ति का रंग
कांवड़ यात्रा में आठ भव्य झांकियां भी आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इनके साथ भजन प्रस्तुतियों ने वातावरण में भक्ति का रंग और गहरा कर दिया। झांकियों और भजनों के बीच आगे बढ़ते कांवड़ियों का दृश्य श्रद्धालुओं को भावविभोर करता रहा। मार्ग में जगह-जगह सेवा और सहयोग का भाव भी दिखाई दिया।
11 किलोमीटर का सफर, महादेव के चरणों में आस्था का जल
सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक करीब 11 किलोमीटर का यह सफर श्रद्धालुओं के लिए महज पैदल यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण की आध्यात्मिक यात्रा है। कांवड़िये सीवन का पवित्र जल लेकर बाबा कुबेरेश्वर महादेव के दरबार तक पहुंचेंगे और इसी जल से भगवान का अभिषेक करेंगे। कंधों पर कांवड़, आंखों में महादेव के दर्शन की लालसा और होंठों पर भोलेनाथ का नाम लिए आगे बढ़ते श्रद्धालुओं का यह दृश्य सीहोर की धार्मिक आस्था की विराट तस्वीर पेश कर रहा है। बारिश की हर बूंद के बीच गूंजता ‘हर-हर महादेव’ मानो यही संदेश दे रहा था कि सच्ची भक्ति के सामने मौसम की हर चुनौती छोटी है।
