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Cheetah: माधव नेशनल पार्क की सीमा में 'पवन' का भ्रमण जारी, टाइगर-चीता एक रेंज में होने से अफसरों की नींद उड़ी
Fri, 21 Apr 2023 04:52 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 21 Apr 2023 04:52 PM IST
सार
ओबान उर्फ पवन चीता शिवपुरी के बलारपुर रेंज में है। बलारपुर रेंज में ही टाइगर की लोकेशन बताई जा रही है। अब टाइगर और चीता दोनों एक ही लोकेशन में है, इसके बाद से वन विभाग और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है।
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चीता ओबान उर्फ पवन शिवपुरी की बलारपुर रेंज में बताया गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पिछले कुछ दिनों से कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर ओबान उर्फ पवन चीता शिवपुरी जिले के माधव नेशनल पार्क में घूमता पाया गया है। अब वह शिवपुरी के बलारपुर रेंज में है। बलारपुर रेंज में ही टाइगर की लोकेशन बताई जा रही है। अब टाइगर और चीता दोनों एक ही लोकेशन में है, इसके बाद से वन विभाग और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं बाघ और चीता की आमने-सामने की भिड़ंत ना हो जाए। हालांकि वन विभाग एवं वर्ल्ड लाइफ की टीम चीते पर निगरानी बनाए हुए हैं।
शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क चीते पवन के लिए बिल्कुल नई जगह है, जहां बाघ और तेंदुआ जैसे खूंखार वन्यजीव मौजूद हैं। इनसे चीते का आमना-सामना हुआ तो एक खतरा हो सकता है ऐसी स्थिति में चीते को खुद की सुरक्षा खुद ही करनी होगी।
नर चीते ओबान को पिछले 6 अप्रैल को बैराड़ इलाके से ट्रेंकुलाइज किया जा चुका है। अब शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में पहुंचने के बाद भी उसे नहीं पकड़ा जा रहा है। इसके पीछे की वजह चीता विशेषज्ञ बताते हैं कि चीते के पास इंसानी शोर-शराबा होने से उसे ट्रेंकुलाइज करने, उसकी घेराबंदी करने से और उसे अपनी मर्जी के कहीं भी आने-जाने से रोकने टोकने पर उसे स्ट्रेस हो सकता है। उसे कहीं भी जाने आने से रोका नहीं जा रहा ताकि वह चिंता मुक्त जिंदगी जी हर परिवेश में खुद को डाल सके। तेंदुआ और बाघ से भी सामना होने की स्थिति में खुद को सुरक्षित बचा सके। इसके लिए उसे हर जगह के माहौल को ठीक तरह से समझने की जरूरत होती है। माधव नेशनल पार्क में बाघ और दूसरे जानवरों के बीच रहकर वह खुद को और भी ज्यादा फुर्तीला और तेजतर्रार बना सकेगा।
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शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क चीते पवन के लिए बिल्कुल नई जगह है, जहां बाघ और तेंदुआ जैसे खूंखार वन्यजीव मौजूद हैं। इनसे चीते का आमना-सामना हुआ तो एक खतरा हो सकता है ऐसी स्थिति में चीते को खुद की सुरक्षा खुद ही करनी होगी।
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नर चीते ओबान को पिछले 6 अप्रैल को बैराड़ इलाके से ट्रेंकुलाइज किया जा चुका है। अब शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में पहुंचने के बाद भी उसे नहीं पकड़ा जा रहा है। इसके पीछे की वजह चीता विशेषज्ञ बताते हैं कि चीते के पास इंसानी शोर-शराबा होने से उसे ट्रेंकुलाइज करने, उसकी घेराबंदी करने से और उसे अपनी मर्जी के कहीं भी आने-जाने से रोकने टोकने पर उसे स्ट्रेस हो सकता है। उसे कहीं भी जाने आने से रोका नहीं जा रहा ताकि वह चिंता मुक्त जिंदगी जी हर परिवेश में खुद को डाल सके। तेंदुआ और बाघ से भी सामना होने की स्थिति में खुद को सुरक्षित बचा सके। इसके लिए उसे हर जगह के माहौल को ठीक तरह से समझने की जरूरत होती है। माधव नेशनल पार्क में बाघ और दूसरे जानवरों के बीच रहकर वह खुद को और भी ज्यादा फुर्तीला और तेजतर्रार बना सकेगा।
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