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मध्यप्रदेश में बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं 53 हजार स्कूल, 5 हजार में पीने का पानी तक नहीं

Tue, 05 Dec 2017 02:22 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Tue, 05 Dec 2017 02:22 PM IST
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cag report reveals children not safe in 53000 schools in madhya pradesh no water in 5000 schools
शिवराज सिंह चौहान
भले ही रमन सिंह 12 वर्षों से सत्ता की गद्दी में विराजमान हैं लेकिन सरकार छह साल बीत जाने के बाद भी शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को राज्य में लागू नहीं कर पाई है। सरकार राज्य में आरटीई (नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009) की शर्तें पूरी नहीं कर पाई है। मध्यप्रदेश में आज भी 44 हजार 754 स्कूलों में खेल के लिए मैदान नहीं हैं। अलबत्ता ये स्थिति तब है जब राज्य सरकार ने स्कूलों में खेलों को अनिवार्य कर रखा है। देश में आरटीई कानून 2010 में लागू हुआ था। 
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स्कूलों में पानी तक नहीं 
आरटीई को लागू कर पाने में मध्यप्रदेश सरकार की नाकामी का खुलासा सीएजी रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 5 हजार 176 सरकारी स्कूलों में पानी की सुविधा तक नहीं है। बच्चों को पीने का पानी भी घर से लाना पड़ता है। पानी के बिना इन स्कूलों में शौचालय व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। 
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इसलिए बच्चियां नहीं जातीं स्कूल 
रिपोर्ट के मुताबिक सात हजार 180 स्कूलों में छात्रों और पांच हजार 945 स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। सीएजी की यह रिपोर्ट 30 नवंबर को विधानसभा में पेश हुई। राज्य में एक लाख 14 हजार 255 सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूल हैं। 

देश में एक अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुआ है। इसमें प्रावधान है कि कानून लागू होने के बाद तीन साल में सभी राज्यों को सभी मानकों को पूरा करना होगा। लेकिन राज्य सरकार अब तक कुछ विशेष प्रदर्शन नहीं कर पाई है। सीएजी ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों की मौजूदा परिस्थितियों पर तीखी टिप्पणी की है। 

53 हजार स्कूल में बेरोक-टोक जा सकते हैं असामाजिक तत्व

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शिवराज सिंह चौहान - फोटो : ANI
रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून लागू होने के पहले से चल रहे सरकारी स्कूल मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। सीएजी ने प्रदेश के 390 स्कूलों में बुनियादी ढांचे की जांच की। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के दस्तावेजों की भी जांच की, जिसके बाद वास्तविक सच्चाई सामने आई है। 

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बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं 53 हजार स्कूल 
सीएजी की रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रदेश के 53 हजार 345 सरकारी स्कूल मौजूदा हालात में बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इन स्कूलों के चारों ओर बाउंड्रीवॉल नहीं बनी है। इसलिए असामाजिक तत्वों का स्कूल के अंदर तक बेरोक-टोक आ जा सकते हैं। मौजूदा समय में बच्चों के अपहरण की घटनाएं भी हो रही हैं। ऐसे में स्कूलों में बाउंड्रीवॉल न होना खतरनाक हो सकता है। 

11 हजार स्कूलों में लाइब्रेरी नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक 10 हजार 763 स्कूलों में लाइब्रेरी नहीं है। मुख्यमंत्री ने सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पुस्तकालय शुरू करने के निर्देश दिए थे। वहीं 64 हजार 278 प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में प्रिंसिपल के लिए अलग से कमरा नहीं हैं, इस वजर से वे अन्य शिक्षकों के साथ ही बैठते हैं।
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