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World Fisheries Day: मत्स्य उत्पादन में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है MP, 400 फिश पार्लर बदलेंगे तस्वीर

Mon, 21 Nov 2022 03:25 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 21 Nov 2022 03:25 PM IST
सार

दुनिया भर में मत्स्य पालन से जुड़े विषयों पर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से हर साल 21 नवंबर को विश्व मत्स्य दिवस मनाया जाता है। केन्द्र सरकार अन्नदाता की तरह मत्स्य पालन से जुड़े समुदायों की आय बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती है।

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World Fisheries Day MP is achieving new achievements in fish production 400 fish parlors will change the pictu
एमपी में मत्स्य पालन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के मत्स्य पालकों की समृद्धि और उन्नति के लिए विशेष योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ को विशेष कार्य एवं उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड ने मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ को बांधो, नदियों और तालाब में मछली उत्पादन के बेहतर प्रबंधन और उत्पादन में लगातार बढ़ोत्तरी के लिए महासंघ के कार्यों और नवाचारों की प्रशंसा की है। साथ ही उत्कृष्ट श्रेणी में पुरुस्कार देने की घोषणा की है।

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मध्यप्रदेश भारत में मत्स्य उत्पादक प्रदेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। एक समय था, जब मछलियों को तालाब, नदी या सागर के भरोसे रखा जाता था, परंतु आज आधुनिक तकनीक के साथ इसे जोड़ते हुए कृत्रिम जलाशय बनाए जा रहे हैं। जहां पर वे सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो प्राकृतिक रूप में नदी, तालाब और सागर में होती हैं। प्रदेश में पहले मछली पालन केवल मछुआरों तक ही सीमित था, किन्तु आज सरकार के प्रयासों के चलते किसानों के लिए भी यह सफल लघु उद्योग के रूप में स्थापित हो रहा है। मत्स्य पालक किसानों के लिए रोजगार के लिए भविष्य में अवसर तो पैदा कर ही रहा है। साथ ही भविष्य में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में भी अपनी मदद कर सकता है।
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शिवराज सरकार खेती में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के बाद किसानों की आर्थिकी को मछली पालन जैसी अपनी योजनाओं के माध्यम से मजबूत करना चाहती है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने मध्यप्रदेश में मॉडर्न फिश पार्लर खोलने का फैसला किया है। सरकार ने प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाना चाहती है, जिसके लिए उसने मॉडर्न फिश पार्लर का मेगा प्लान पिछले दिनों तैयार किया, जिसे कैबिनट से मंजूरी भी मिल गई है। अगर सरकार की ये कोशिशें परवान चढ़ी तो मछली उत्पादन भी प्रदेश में मुनाफे का सौदा साबित होगा।  

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प्रदेश में बढ़ रहा है मत्स्य पालन उद्योग - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में बढ़ रहा है मत्स्य पालन उद्योग... 
पिछले कुछ समय से प्रदेश में मत्स्य पालन की वृद्धि दर में भी इजाफा हुआ है। वर्ष 2021-22 तक जो वृद्धि दर सात प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 10 प्रतिशत दर्ज की गई है। साल 2022 में मत्स्य बीज का उत्पादन 171 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राइ था, जिसे साल 2023 तक 200 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। अच्छी गुणवत्ता के बीज उत्पादित होने से मत्स्य कृषकों को उन्नत बीज उपलब्ध होंगे और मछली उत्पादन में गुणात्मक सुधार होगा। 

400 स्मार्ट फिश पार्लर बदलेंगे तस्वीर...
मध्यप्रदेश के बड़े शहरों से लेकर जिला स्तर पर फिश पार्लर बनाए जाएंगे, जिन पर मछुआरों को हाइजीनिक तरीके से मछली काटने और छिलने की मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। ये अत्याधुनिक फिश पार्लर भविष्य में मछली की बिक्री के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का काम करेंगे। इस फिश पार्लर के सहारे मत्स्य पालक अपनी आय में इजाफा कर पाएंगे।  सरकार ने पहले चरण में अगले एक साल में 400 स्मार्ट फिश पार्लर नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतों के सहयोग से तैयार करवाएगी, जिसका  खर्च सरकार उठाएगी। इसके लिए करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

फिश पार्लर में आधुनिक सुविधाओं के साथ फ्रीजर और फ्रीजर डिस्पेल रहेंगे, जिसकी वजह से मछलियां लंबे समय तक ताजा रहेंगी। साथ ही वह जल्दी खराब नहीं होंगी। खास बात यह है कि इसके लिए मछुआरे को हर महीने एक हजार रुपये पार्लर किराया के रूप में नगरीय निकाय को देना पड़ेगा। शिवराज सरकार का मानना है कि इससे मछली पालकों की आमदनी में वृद्धि होगी। सरकार का कहना है कि इस योजना से किसानों को भी सीधा लाभ होगा।  खेती किसानी के साथ अब वे भी तालाब बनाकर मछली पालन भी कर सकते हैं। मछली पालन में भी नई तकनीक के प्रयोग से इस क्षेत्र को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है, इन संभावनाओं पर भी कार्ययोजना बना रही है। मछली का उत्पादन बढ़ाने के लिए मछुआरों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने पर भी विचार कर रही है।

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मछली परिवहन करने के लिए बाइक - फोटो : अमर उजाला

केन्द्र राज्य की मत्स्य पालन की योजनाओं से मिला बढ़ावा... 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशन में प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिये विशेष प्रयास हो रहे हैं। मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार एवं आर्थिक उन्नति की अपार संभावनाएं  मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। केन्द्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन प्रदेश में किया जा रहा है। केंद्र सरकार की मत्स्य पालन योजनाओं का बेहतर लाभ प्रदेश के  मछुआरों को मिल रहा है।  

मत्स्य विकास क्षेत्र में बालाघाट देश के 70 जिलों में नंबर वन...
मछली पालन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। शासन के प्रयासों और मत्स्य पालकों की मेहनत रंग ला रही है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश के बालाघाट जिले को वर्ष 2021 में मत्स्य विकास क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए देश में प्रथम स्थान मिला है। यह उपलब्धि मत्स्य पालन की दिशा में किए जा रहे नवाचार और विशेष कार्यों का परिणाम है। 

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मत्स्य पालन विकास योजना के माध्यम से भी युवाओं को आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। प्रदेश के ऐसे युवा जो बेरोजगार हैं और वह अपना रोजगार प्रारंभ करना चाहते हैं तो वह मुख्यमंत्री मत्स्य पालन विकास योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना प्रदेश में मछली पालन के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। योजना के तहत युवाओं को उच्च तथा नई तकनीकों का प्रयोग करके मछली पालन के व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत युवा मत्स्य पालन के आधुनिक तरीकों से जोड़ने के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री मत्स्य पालन विकास योजना का मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग मध्यप्रदेश शासन के अंतर्गत सभी नागरिकों को सरकार इसका लाभ दे रही है। 

सरकार के गंभीर प्रयासों से मत्स्य पालकों को आज आधुनिक तकनीक से किए जा रहे मत्स्य पालन की जानकारी मिल रही है। प्रदेश में मछली पालन विभाग द्वारा अनेक नवाचार भी शुरू किये गये हैं। मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में मार्केटिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार द्वारा प्रदेश के मत्स्य पालकों के सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिये भी राज्य में विशेष प्रयास हो रहे हैं। इसके लिये अनेक लाभकारी योजनाएं और कार्यक्रम शुरू कर उनका लाभ सीधे मत्स्य पालकों तक पहुंचाया जा रहा है।

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