फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Weather to change in twenty districts of MP: Sunny days, cool nights, and now it's time for rain; no alert for

एमपी के बीस जिलों में बदलेगा मौसम: दिन में धूप, रात में ठंडक और अब बारिश की बारी, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं

Wed, 14 Oct 2026 07:09 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 14 Oct 2026 07:09 AM IST
सार

मध्यप्रदेश में 15 से 17 अक्टूबर के बीच 20 जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना है। मौसम का असर पहले ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में, फिर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में दिखाई दे सकता है। भोपाल-इंदौर में फिलहाल अलर्ट नहीं है। मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से चार प्रतिशत कम बारिश हुई।

विज्ञापन
Weather to change in twenty districts of MP: Sunny days, cool nights, and now it's time for rain; no alert for
मौसम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज स्थिर नहीं हो रहा है। दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के बीच अब अगले तीन दिन प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। 15 से 17 अक्टूबर के बीच 20 जिलों में मौसम बदलने का अनुमान है। शुरुआत ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग से होगी, जबकि अंतिम दिन जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में भी बारिश के आसार हैं। भोपाल और इंदौर समेत कुछ प्रमुख शहरों के लिए फिलहाल कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम के कारण यह बदलाव होगा। इस दौरान कहीं तेज हवाएं चल सकती हैं तो कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। हालांकि, इसे मानसून की वापसी के बजाय मानसून के बाद सक्रिय मौसम प्रणालियों का असर माना जा रहा है।
विज्ञापन


तीन दिन में इन इलाकों में बदलेगा मौसम
15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग के कुछ जिलों में बारिश की संभावना है। 17 अक्टूबर को इसका दायरा बढ़कर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग तक पहुंच सकता है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है।
विज्ञापन


अक्टूबर में एक साथ दिखेंगे तीन मौसम
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिला है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने से दिन में धूप और गर्मी बढ़ी, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस होने लगी। अब सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ जिलों में फिर बारिश हो सकती है। प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। इस बार करीब 100 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। विदाई के बाद भी पूर्वी मध्यप्रदेश में पिछले सप्ताह कई जगह आंधी और बारिश का असर देखा गया था। हालांकि, रविवार, सोमवार और मंगलवार को प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश दर्ज नहीं की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


चार महीने में सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी
इस साल जून से सितंबर तक प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच अंतर भी साफ दिखाई देता है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12 प्रतिशत की कमी रही। पश्चिमी क्षेत्र के कई जिलों में बारिश का घाटा ज्यादा होने से खेती पर असर पड़ने की आशंका है।आंकड़ों के मुताबिक, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश हुई। इन जिलों में कमी नौ से 51 प्रतिशत तक रही। दूसरी ओर, भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो गया।


यह भी पढ़ें-पुराने शिक्षकों को टीईटी छूट पर हाईकोर्ट का निर्देश: सरकार को 60 दिन में देना होगा जवाब,अब पदोन्नति में नजरें

जून की कमी पूरे सीजन पर पड़ी भारी
मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से आंकड़ों को सहारा मिला, लेकिन पूरे सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा। यही वजह है कि प्रदेश में मानसून की विदाई के समय करीब चार प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed