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Mhow Firing: महू में आदिवासियों पर पुलिस फायरिंग को लेकर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने घेरा सरकार को

Thu, 16 Mar 2023 03:46 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: रवींद्र भजनी Updated Thu, 16 Mar 2023 03:46 PM IST
सार

इंदौर जिले के महू में आदिवासी महिला की मौत और उसके बाद प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग का मुद्दा विधानसभा में गूंजा। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि प्रदेश आदिवासियों के खिलाफ अपराध में नंबर-एक है। यह शर्म की बात है।   
 

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Uproar in the assembly over police firing on tribals in Mhow, Opposition attacked Ruling party
मध्य प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को प्रश्नकाल से पहले ही महू में आदिवासी युवती की मौत और उसके बाद प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग में एक युवक की मौत के मामले में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने निशाना बनाकर गोली चलाई। साथ ही आदिवासी युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा। 

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प्रश्नकाल शुरू होने से पहले संसदीय कार्य और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सदन को बताया कि आदिवासी युवती की मौत की जांच में अब तक करंट से मौत की बात सामने आई है। पाटीदार समाज के एक युवक के साथ आदिवासी युवती बीते छह माह से लिव-इन में थी। मंत्री के इतना बोलते ही विपक्ष हमलावर हो गया। कांग्रेस विधायक विजयलक्ष्मी साधौ ने आरोप लगाया कि युवती के परिजनों के अनुसार उसका अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या की गई है। इस पर गृहमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। युवती की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि यह गंभीर विषय है। आदिवासी बच्ची के साथ अत्याचार हुआ है। मजिस्ट्रियल जांच की समयसीमा बताएं। ताकि समय पर बच्ची को न्याय मिल सके। इस पर मंत्री मिश्रा ने कहा कि सरकार इस मामले में बहुत संवेदनशील है। कमलनाथ जी भी इस मामले में संवेदनशील होना बता रहे है। मैं उनके कार्यकाल में पांढुर्ना में हुई ऐसी घटना का जिक्र नहीं करना चाहता। इस पर कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में सबसे अधिक आदिवासी रहते हैं। यह बड़े शर्म की बात है कि देशभर में आदिवासियों पर अत्याचार के मामले में प्रदेश नंबर एक पर है। आप जांच की समयसीमा निर्धारित करें। 
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नाथ बोले- सबको शर्म आना चाहिए 
कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में बीजेपी की 18 साल से सरकार है। बीजेपी खुद को आदिवासियों का सबसे बड़ा हितैषी बताती है। ऐसे में आदिवासी अपराध में प्रदेश को नंबर एक होना, सत्ता पक्ष ही नहीं हमारे लिए भी शर्म की बात है। मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शून्य काल में विस्तृत जवाब देने की बात कही। तब जाकर प्रश्नकाल शुरू हो सका। 

जांच से पहले चरित्र चित्रण कर दिया 
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक विजय लक्ष्मी साधौ ने सरकार पर आरोप लगाया कि एक आदिवासी बच्ची की दरिदंगी के बाद हत्या को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है। जांच से पहले ही उसका चरित्र चित्रण किया जा रहा है। गृहमंत्री मिश्रा एक तरफ पीएम रिपोर्ट नहीं मिलने और प्रारंभिक जांच पर बयान दे रहे हैं। दूसरी ओर, आदिवासी बिटिया के लिव-इन में रहने व पानी गरम करने की रॉड से करंट लगने से मौत का बयान दे रहे हैं। यह सरकार आदिवासियों के मामले में जरा भी संवेदनशील नहीं है। 


शून्यकाल में गृहमंत्री ने दिया जवाब 
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आदिवासी युवती की संदिग्ध मौत और इसके बाद पुलिस फायरिंग में एक की मौत पर कहा कि युवती बालिग थी। वह स्नातक पास कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। युवती बीते छह महीने से युवक के साथ लिव-इन रिलेशन में थी। अभी तक की जांच में यह सामने आया कि 15 मार्च को दोपहर में युवती को पानी गरम करने वाली रॉड से करंट लगा। इससे उसकी मौत हो गई। उसके परिजनों को सूचना दी गई। पीएम कराने के बाद शव युवती के परिजनों को सौंप दिया। युवती के परिजन युवक के खिलाफ एफआईआर की मांग के साथ शाम साढ़े छह सड़क पर बैठ गए। साढ़े नौ बजे रात को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया और उसे थाने लेकर आई। तब तक अंधेरा हो गया था। पहले 50 लोग एकत्रित थे। फिर अचानक 500 लोग आ गए। सभी लोग पुलिस चौकी को घेरकर आरोपी युवक को सौंपने की मांग करने लगे। प्रदर्शन के दौरान कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इसमें बड़गोंदा टीआई भारत सिंह ठाकुर सहित छह पुलिसकर्मी गंभीर घायल हुए। 13 पुलिसकर्मी सामान्य घायल हैं। बाकी पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। आक्रोशित व हमलावर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। हवा विपरीत दिशा में होने के कारण आंसू गैस के गोले दूसरी दिशा में चले गए। इसके बाद पुलिस ने अपने बचाव में फायर किए। इसमें भेरूप्रसाद मदन और संजय को गोली लगी। भेरूप्रसाद की घटनास्थल पर मौत हो गई। 

विपक्ष ने एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की  
स्थगन पर गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के जवाब के बाद विपक्ष ने आदिवासी युवती और पुलिस की गोली में मृत युवक के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी देने की मांग की। गोली चलाने का आदेश देने वालों की जांच कर कार्रवाई करने को कहा। साधौ ने कहा कि तीन घंटे तक एफआईआर नहीं हुई। परिजन शव लेकर थाने के सामने बैठे रहे। ऐसे में परिजनों का उग्र होना स्वाभाविक है। पुलिस सीधे गोली न चलाकर लाठी चार्ज और आंसू गैस से स्थिति को काबू कर सकती थी। इसके बाद कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह, सचिन यादव, हीरालाल अलावा, विजयलक्ष्मी साधौ, डॉ अशोक मर्सकोले समेत दर्जनभर विधायक गर्भगृह में उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों में देर तक नोंकझोंक चलती रही। बाद में नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि आदिवासी युवती की मौत जैसे संवेदनशील मामले में सरकार का जवाब संतोषप्रद नहीं है। आदिवासी युवक के सीने में गोली लगी है। पुलिस को कमर के नीचे गोली चलाने का अधिकार है। पुलिस ने 30 राउंड गोली चलाई है। ऐसे में समझा जा सकता है कि पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय आदिवासियों पर सीधे गोली चलाई है। सरकार की अब तक की कार्यवाही, तथ्यों को छिपाने, पीड़ित पक्ष को मुआवजा नहीं देने, मेडिकल रिपोर्ट न मिलने जैसे मुद्दों पर कार्रवाई से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने बहिर्गमन किया।

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