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भोपाल में पेड़ों की कटाई: 40 साल से पुराने एक पेड़ पर रहते हैं 500 जीव, पर्यावरणविद् बोले- लाखों जीवन की हत्या
Fri, 26 Dec 2025 06:30 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 26 Dec 2025 06:30 PM IST
सार
भोपाल में पेड़ कटाई को लेकर पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडेय ने कहा है कि 40 साल से पुराने एक पेड़ पर करीब 500 जीव निर्भर रहते हैं और ऐसे पेड़ों की कटाई लाखों जीवन खत्म करने जैसा है। उन्होंने इसे बायोडायवर्सिटी एक्ट का उल्लंघन बताया और कहा कि इससे शहर का तापमान बढ़ेगा व पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा।
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पेड़ों की कटाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बायोडायवर्सिटी एक्ट साफ कहता है कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के एक बड़े पेड़ पर करीब 500 छोटे-बड़े जीव निवास करते हैं। जैसे ही पेड़ काटा जाता है, ये जीव बेघर हो जाते हैं। अधिकतर को दूसरा ठिकाना मिलने से पहले ही आसपास के बाकी पेड़ भी कट चुके होते हैं। इसका मतलब है कि एक साथ लाखों जीवों की मौत। यह कहना है पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडेय का, जो भोपाल में प्रस्तावित बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई को सीधे तौर पर जैव विविधता पर हमला बता रहे हैं। भोपाल में करीब 10 हजार पेड़ों की कटाई की योजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ गंभीर चिंता जता रहे हैं। उनके के अनुसार ये पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि अपने भीतर एक पूरा इको-सिस्टम समेटे हुए हैं। इनमें पक्षी, गौरैया, चूहे, गिरगिट, सांप, कीट, तितलियां, कवक और असंख्य सूक्ष्म जीव रहते हैं। पेड़ों की कटाई से इन सभी का प्राकृतिक आवास खत्म हो जाएगा।
पेड़ कटाई से बढ़ेगा तापमान, बिगड़ेगा शहर का संतुलन
सुभाष सी. पांडेय का कहना है कि पेड़ों की कटाई का असर केवल जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं रहता। जिन इलाकों में सड़क निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ हटाए जाते हैं, वहां गर्मियों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। इससे शहरी इलाकों में हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ता है और आम लोगों को सीधे तौर पर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
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शहर में 10 लेन सड़क पर उठे सवाल
पर्यावरणविद् ने शहर के भीतर 10 लेन सड़क बनाए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि 10 लेन सड़कें आमतौर पर नेशनल हाईवे के लिए होती हैं, न कि शहरों के भीतर। शहर के अंदर निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी या नगर एजेंसियों के अधीन आता है, ऐसे में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
विकल्प मौजूद होने के बावजूद कटाई का आरोप
सुभाष सी. पांडेय ने बताया कि सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि सभी वैकल्पिक मार्गों पर विचार किया जाए और जब कोई विकल्प न बचे, तभी सड़क निर्माण किया जाए। जबकि प्रस्तावित क्षेत्र से करीब 3 किलोमीटर दूर पहले से रिंग रोड मौजूद है, जिसका उपयोग नेशनल हाईवे के लिए किया जा सकता था। इसके बावजूद पेड़ों की कटाई को प्राथमिकता दी गई।
एनजीटी की अनुमति पर भी सवाल
पर्यावरणविदों का आरोप है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से स्पष्ट अनुमति के बिना ही पेड़ कटाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जिन समितियों ने अनुमति दी, उनमें विषय विशेषज्ञों की कमी बताई जा रही है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी में 9 में से 6 सदस्य आईएएस अधिकारी हैं, जबकि जैव विविधता या पर्यावरण के क्षेत्र का कोई स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल नहीं है।
यह भी पढ़ें-भोपाल मेट्रो में ग्रुप यात्रियों की एंट्री पर ब्रेक, 15-20 से ज्यादा लोग पहुंचे तो टिकट मिलना मुश्किल
एक्सपर्ट के बिना ऐसे फैसले कैसे?
सुभाष सी. पांडेय का कहना है कि पेड़ कटाई जैसे संवेदनशील फैसले केवल प्रशासनिक आधार पर नहीं लिए जा सकते। यह तय करना जरूरी है कि कहां पेड़ काटना अनिवार्य है, कहां विकल्प तलाशे जा सकते हैं और कहां निर्माण टाला जाना चाहिए। बिना पर्यावरण विशेषज्ञों की राय के दी गई अनुमति को बायोडायवर्सिटी के लिहाज से सही नहीं ठहराया जा सकता।
यह भी पढ़ें-MP के 25 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे,कई जिलों में घना कोहरा,नए साल की शुरुआत ठिठुरन से
नागरिक संगठनों ने की कटाई रोकने की मांग
भोपाल के पर्यावरण समूहों और नागरिक संगठनों ने पेड़ कटाई पर तत्काल रोक लगाने, वैकल्पिक मार्ग अपनाने और बायोडायवर्सिटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार दीर्घकालिक संरक्षण नीति लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल पौधारोपण से दशकों पुराने पेड़ों और उनके साथ जुड़े जीव-जगत की भरपाई संभव नहीं है।
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पेड़ कटाई से बढ़ेगा तापमान, बिगड़ेगा शहर का संतुलन
सुभाष सी. पांडेय का कहना है कि पेड़ों की कटाई का असर केवल जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं रहता। जिन इलाकों में सड़क निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ हटाए जाते हैं, वहां गर्मियों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। इससे शहरी इलाकों में हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ता है और आम लोगों को सीधे तौर पर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
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शहर में 10 लेन सड़क पर उठे सवाल
पर्यावरणविद् ने शहर के भीतर 10 लेन सड़क बनाए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि 10 लेन सड़कें आमतौर पर नेशनल हाईवे के लिए होती हैं, न कि शहरों के भीतर। शहर के अंदर निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी या नगर एजेंसियों के अधीन आता है, ऐसे में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
विकल्प मौजूद होने के बावजूद कटाई का आरोप
सुभाष सी. पांडेय ने बताया कि सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि सभी वैकल्पिक मार्गों पर विचार किया जाए और जब कोई विकल्प न बचे, तभी सड़क निर्माण किया जाए। जबकि प्रस्तावित क्षेत्र से करीब 3 किलोमीटर दूर पहले से रिंग रोड मौजूद है, जिसका उपयोग नेशनल हाईवे के लिए किया जा सकता था। इसके बावजूद पेड़ों की कटाई को प्राथमिकता दी गई।
एनजीटी की अनुमति पर भी सवाल
पर्यावरणविदों का आरोप है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से स्पष्ट अनुमति के बिना ही पेड़ कटाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जिन समितियों ने अनुमति दी, उनमें विषय विशेषज्ञों की कमी बताई जा रही है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी में 9 में से 6 सदस्य आईएएस अधिकारी हैं, जबकि जैव विविधता या पर्यावरण के क्षेत्र का कोई स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल नहीं है।
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एक्सपर्ट के बिना ऐसे फैसले कैसे?
सुभाष सी. पांडेय का कहना है कि पेड़ कटाई जैसे संवेदनशील फैसले केवल प्रशासनिक आधार पर नहीं लिए जा सकते। यह तय करना जरूरी है कि कहां पेड़ काटना अनिवार्य है, कहां विकल्प तलाशे जा सकते हैं और कहां निर्माण टाला जाना चाहिए। बिना पर्यावरण विशेषज्ञों की राय के दी गई अनुमति को बायोडायवर्सिटी के लिहाज से सही नहीं ठहराया जा सकता।
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नागरिक संगठनों ने की कटाई रोकने की मांग
भोपाल के पर्यावरण समूहों और नागरिक संगठनों ने पेड़ कटाई पर तत्काल रोक लगाने, वैकल्पिक मार्ग अपनाने और बायोडायवर्सिटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार दीर्घकालिक संरक्षण नीति लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल पौधारोपण से दशकों पुराने पेड़ों और उनके साथ जुड़े जीव-जगत की भरपाई संभव नहीं है।
