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ट्रेनिंग पूरी,रोम्स पोर्टल का इंतजार: महीनों से वेतन को तरस रहे स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी,जाने क्या बदलेगा?

Wed, 30 Sep 2026 05:12 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 30 Sep 2026 05:12 PM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान को पारदर्शी बनाने वाला रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। व्यवस्था की समय-सीमा अब 31 अक्टूबर कर दी गई है। विभाग का कहना है कि अधिकारियों और एजेंसियों की ट्रेनिंग हो चुकी है और जल्द सिस्टम शुरू होगा। वहीं कर्मचारी संगठन कई जिलों में 4-5 महीने से वेतन और करीब छह महीने से ईपीएफ-ईएसआईसी भुगतान लंबित होने का दावा कर रहा है।

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Training complete, awaiting the ROMS portal: Outsourced health workers have been deprived of salaries for mont
आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) शुरू किया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। इसे पहले 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद अब 31 अक्टूबर तक इसे लागू करने की समय-सीमा तय की गई है। खास बात यह है कि विभाग अपने अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को एप्लीकेशन की ट्रेनिंग भी दे चुका है, फिर भी सिस्टम जमीन पर शुरू नहीं हुआ है। इधर, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि सिस्टम लागू नहीं होने का असर सीधे वेतन भुगतान पर पड़ रहा है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि कई जिलों में कर्मचारियों को चार से पांच महीने से वेतन नहीं मिला है, जबकि कुछ जगह ईपीएफ और ईएसआईसी की राशि भी लंबे समय से जमा नहीं होने की शिकायत है।
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कागज से डिजिटल व्यवस्था में आएगा पूरा रिकॉर्ड
रोम्स पोर्टल का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों और उन्हें उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों की पूरी व्यवस्था को डिजिटल करना है। इसमें कर्मचारी की तैनाती, एजेंसी, अनुबंध, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जरूरी जानकारी एक ही व्यवस्था में दर्ज होगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि विभाग के पास यह रिकॉर्ड रहेगा कि किस एजेंसी के माध्यम से कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं और उन्हें निर्धारित दर के मुताबिक कितना भुगतान किया जाना है। एजेंसी को किए जाने वाले भुगतान और कर्मचारी को मिलने वाले वेतन की निगरानी भी आसान होगी। मौजूदा व्यवस्था में सरकारी अस्पताल में कर्मचारी काम करता है, लेकिन उसका वेतन निजी एजेंसी के माध्यम से मिलता है। ऐसे में विभाग से एजेंसी को भुगतान होने के बाद कर्मचारी तक कितनी राशि पहुंची, इसकी निगरानी कई बार मुश्किल हो जाती है। रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने की कोशिश है।
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कर्मचारियों का आरोप-एजेंसियां काट रहीं बड़ी रकम
मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह का आरोप है कि कई जिलों में निजी एजेंसियां कर्मचारियों को निर्धारित दर से कम भुगतान कर रही हैं। उनका दावा है कि कुछ कर्मचारियों को 7 से 8 हजार रुपये तक ही भुगतान किया जा रहा है, जबकि निर्धारित भुगतान इससे काफी अधिक है। संगठन के अनुसार सपोर्ट स्टाफ, मल्टी स्किल्ड टास्क वर्कर, सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारियों के लिए अर्द्धकुशल श्रमिक की दर 11,709 रुपये, जबकि डाटा एंट्री ऑपरेटर, ऑक्सीजन टेक्नीशियन और अन्य पदों के लिए कुशल श्रमिक की दर 15,144 रुपये है। संगठन का आरोप है कि अलग-अलग जिलों में कर्मचारियों को निर्धारित राशि से 50 से 60 प्रतिशत तक कम भुगतान किया जा रहा है। 
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वेतन के साथ ईपीएफ-ईएसआईसी भी विवाद में
कर्मचारी संगठन का दावा है कि कई आउटसोर्स कर्मचारियों को चार से पांच महीने से वेतन नहीं मिला है। वहीं करीब छह महीने से ईपीएफ और ईएसआईसी की राशि भी संबंधित खातों में जमा नहीं होने की शिकायत की गई है। संगठन के मुताबिक ईएसआईसी राशि जमा नहीं होने से कुछ कर्मचारियों के ईएसआई कार्ड निष्क्रिय हो गए हैं। इसके चलते कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज में परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने की 7 से 10 तारीख के बीच वेतन मिलना चाहिए, लेकिन महीनों तक भुगतान रोकना गंभीर समस्या है। संगठन ने लंबित वेतन, ईपीएफ-ईएसआईसी और वेतन अंतर की जांच की मांग की है।

ट्रेनिंग हो गई, फिर भी लागू करने की तारीख नहीं
स्वास्थ्य विभाग में रोम्स पोर्टल की प्रक्रिया देख रहे अधिकारी डॉ. नितिन पटेल के मुताबिक संबंधित कंपनियों और विभागीय अधिकारियों को सिस्टम की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इसे जल्द लागू किया जाएगा। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि स्वास्थ्य विभाग में रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) किस निश्चित तारीख से पूरी तरह लागू होगा। यही वजह है कि कर्मचारियों के बीच सवाल बना हुआ है कि जब ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है तो सिस्टम शुरू करने में और कितना समय लगेगा।

अधिकारी क्यों नहीं कर पा रहे लागू?
रोम्स पोर्टल लागू करने के लिए केवल पोर्टल चालू करना पर्याप्त नहीं है। पुराने अनुबंधों, निजी एजेंसियों, कर्मचारियों, तैनाती, भुगतान और अन्य रिकॉर्ड को पोर्टल पर दर्ज करना है। कर्मचारियों की ऑनबोर्डिंग और जरूरी सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करनी है। यही प्रक्रिया कई जगह लंबित होने के कारण प्रस्तावित शुरुआत आगे खिसकी। अब सरकार ने 31 अक्टूबर तक संबंधित प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा रखी है। कर्मचारी संगठन आरोप लगा रहा है कि अधिकारी ROMS लागू करने में रुचि नहीं ले रहे हैं और निजी एजेंसियों को इससे फायदा मिल रहा है। हालांकि, इस आरोप की विभागीय स्तर से पुष्टि नहीं हुई है। विभाग का कहना है कि प्रक्रिया चल रही है और सिस्टम जल्द लागू किया जाएगा।

रोम्स पोर्टल से क्या बदलेगा?
रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) पूरी तरह लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच भुगतान प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे कर्मचारी की उपस्थिति के आधार पर बिल तैयार करने, एजेंसी को भुगतान और कर्मचारी तक वेतन पहुंचने की प्रक्रिया पर निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। सबसे अहम बात यह होगी कि विभाग के पास डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे यह जांचना आसान होगा कि किसी कर्मचारी के नाम पर एजेंसी को कितना भुगतान किया गया और कर्मचारी को वास्तव में कितनी राशि मिली। भविष्य में वेतन भुगतान में देरी होने पर यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि मामला विभाग के स्तर पर अटका है, बिल स्तर पर या एजेंसी के स्तर पर।

लेकिन पुराना वेतन रोम्स पोर्टल से अपने आप नहीं मिलेगा
कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि  रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) लागू होने से चार-पांच महीने का पुराना बकाया अपने आप जारी नहीं होगा। पुराने भुगतान के लिए संबंधित विभाग, एजेंसी और लंबित बिलों की प्रक्रिया अलग से पूरी करनी होगी। यानी रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) भविष्य में भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी और निगरानी योग्य बना सकता है, लेकिन पहले से लंबित वेतन और ईपीएफ-ईएसआईसी की समस्या का समाधान विभाग को अलग से करना होगा।


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31 अक्टूबर के बाद भी सवाल रहेगा-कर्मचारियों को कब मिलेगा वेतन?
सरकार ने रोम्स पोर्टल से जुड़ी लंबित प्रक्रिया पूरी करने के लिए 31 अक्टूबर की समय-सीमा तय की है। अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे सिर्फ पोर्टल पर शुरू करना नहीं, बल्कि वास्तविक वेतन भुगतान व्यवस्था से जोड़ना है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि यदि  रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम (ROMS) लागू होता है तो वेतन भुगतान में पारदर्शिता आएगी और एजेंसियों की मनमानी पर रोक लग सकती है। लेकिन कर्मचारियों को तत्काल राहत के लिए पुराने वेतन, ईपीएफ-ईएसआईसी और निर्धारित दर से कम भुगतान की शिकायतों का भी निपटारा जरूरी है।

 
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