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MP News: जिन लोगों ने पूजा-पद्धति बदल दी, उन्हें न मिले आदिवासी आरक्षण का लाभ, 40 जिलों से जुटे प्रदर्शनकारी
Fri, 10 Feb 2023 06:18 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 10 Feb 2023 06:18 PM IST
सार
भोपाल में पूजा-पद्धति और धर्म बदलने वाले जनजातीय लोगों के खिलाफ चालीस जिलों से समाज के लोग जुटे। उनका कहना है कि इन्हें आदिवासी आरक्षण सूची से डीलिस्ट किया जाए।
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भोपाल में आदिवासी समुदाय ने गर्जना रैली निकाली।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय में ही दो फाड़ दिख रही है। कोटे से नौकरी पाने वालों के खिलाफ जनजातीय समुदाय ने ही मोर्चा खोल दिया है। 40 जिलों से आए जनजातीय समुदाय के लोगों ने भोपाल में प्रदर्शन किया। मांग की कि जिन्होंने नौकरी हासिल की, पूजा-पद्धति बदल दी, धर्म परिवर्तन कर लिया, ऐसे आदिवासियों को तत्काल डीलिस्ट किया जाए।
यह आंदोलन जनजातीय सुरक्षा मंच के बैनर तले हुआ। क्षेत्रीय संगठन मंत्री कालू सिंह मुजाल्दा ने कहा कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को जनजाति का होने के हक नहीं मिलने चाहिए। हमने गांव-गांव में जाकर पंच से लेकर सांसदों और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक से हमने समर्थन मांगा है। वहीं मंच के प्रदेश संयोजक कैलाश निनामा का कहना है कि डीलिस्टिंग एक भावनात्मक मुद्दा है। बात सिर्फ आरक्षण की नहीं है, यह स्वाभिमान का विषय है। यह जनजातिय संस्कृति के संरक्षण और अस्तित्व से जुड़ा मामला है। मूल सनातन को पहली पंक्ति में रखने वाले समाज का यह मुद्दा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सांसद रहते हुए बाबूजी कार्तिक उरांव ने 1967 में यह विषय उठाया था। इसके बाद भी यह बात संसद में पेंडिंग है। संसद को इस पर विचार कर तुरंत इसे लागू किया जाना चाहिए।
संगठनों की मांग है कि जिस तरह धारा 341 में अनुसूचित जाति की डीलिस्टिंग लागू की गई है, उसी तरह संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन करके डीलिस्टिंग लागू की जाए। दरअसल, अनुच्छेद 341 में जो डीलिस्टिंग की गई है,उसके हिसाब से अगर कोई अनुसूचित जाति का सदस्य भारतीय धर्मों के ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाता है तो उसे अनुसूचित जाति को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर दिया जाता है। आदिवासी संगठनों की मांग है कि इसी तरह अनुच्छेद 342 में संशोधन किया जाए। ताकि अगर कोई आदिवासी धर्मांतरण करे तो उसे आदिवासी समाज को मिलने वाली सरकारी योजनाओं का कोई लाभ न मिल सके।
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वनमंत्री ने भी किया प्रदर्शनकारियों का समर्थन
पांचवीं अनुसूची के सवाल पर जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि पेसा एक्ट लागू होने के बाद इसकी मांग लगभग खत्म हो गई है। भविष्य में अगर आवश्यकता हुई तो इस पर जरूर चर्चा की जाएगी। सरकार की ओर से वन मंत्री विजय शाह भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मैं भी सरकार की ओर से इस मांग को केंद्र सरकार तक ले जाऊंगा। जरूरत पड़ी तो सड़कों पर भी उतरा जाएगा। पद से ज्यादा मेरे लिए समाज महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश में पांचवीं अनुसूची की मांग पर कांग्रेस, जयस (जय आदिवासी संगठन), गोंडवाना गणतंत्र पार्टी समेत तमाम दल लंबे समय से अड़े हैं। डीलिस्टिंग पर दलों में आम राय नहीं बन पाई है।
यह आंदोलन क्यों?
जनजातीय सुरक्षा मंच का कहना है कि कई लोग आदिवासी समाज की मूल पहचान प्रकृति को छोड़ चुके हैं। वे लोग जनजातीय रुढ़ियां और परंपराओं को भी नहीं मानते। आदिवासी अधिकारों पर अतिक्रमण करते हैं। इस वजह से इन्हें डीलिस्ट किए जाने की जरूरत है। वे धर्म परिवर्तन करने के बाद भी आदिवासियों को मिलने वाले लाभों का फायदा उठा रहे हैं। इससे मूल आदिवासियों को वह लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
डीलिस्टिंग गर्जना रैली
जनजातीय सुरक्षा मंच ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान पर डीलिस्टिंग गर्जना रैली की। इस रैली में आदिवासी समुदाय ने अपने हक के लिए हुंकार भरी। एकसूत्री मांग यह है कि जिन लोगों ने मत बदल लिया या धर्म बदल लिया, उन्हें आरक्षण समेत अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों को नहीं माना गया तो दिल्ली कूच करेंगे। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी श्यामसिंह कुमरे ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने कहा कि एक से दूसरे धर्म में जाने पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद भी उन्हें लाभ मिल रहा है। इससे हमारे समाज के लोग गलत दिशा में जा रहे हैं।
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यह आंदोलन जनजातीय सुरक्षा मंच के बैनर तले हुआ। क्षेत्रीय संगठन मंत्री कालू सिंह मुजाल्दा ने कहा कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को जनजाति का होने के हक नहीं मिलने चाहिए। हमने गांव-गांव में जाकर पंच से लेकर सांसदों और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक से हमने समर्थन मांगा है। वहीं मंच के प्रदेश संयोजक कैलाश निनामा का कहना है कि डीलिस्टिंग एक भावनात्मक मुद्दा है। बात सिर्फ आरक्षण की नहीं है, यह स्वाभिमान का विषय है। यह जनजातिय संस्कृति के संरक्षण और अस्तित्व से जुड़ा मामला है। मूल सनातन को पहली पंक्ति में रखने वाले समाज का यह मुद्दा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सांसद रहते हुए बाबूजी कार्तिक उरांव ने 1967 में यह विषय उठाया था। इसके बाद भी यह बात संसद में पेंडिंग है। संसद को इस पर विचार कर तुरंत इसे लागू किया जाना चाहिए।
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संगठनों की मांग है कि जिस तरह धारा 341 में अनुसूचित जाति की डीलिस्टिंग लागू की गई है, उसी तरह संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन करके डीलिस्टिंग लागू की जाए। दरअसल, अनुच्छेद 341 में जो डीलिस्टिंग की गई है,उसके हिसाब से अगर कोई अनुसूचित जाति का सदस्य भारतीय धर्मों के ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाता है तो उसे अनुसूचित जाति को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर दिया जाता है। आदिवासी संगठनों की मांग है कि इसी तरह अनुच्छेद 342 में संशोधन किया जाए। ताकि अगर कोई आदिवासी धर्मांतरण करे तो उसे आदिवासी समाज को मिलने वाली सरकारी योजनाओं का कोई लाभ न मिल सके।
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वनमंत्री ने भी किया प्रदर्शनकारियों का समर्थन
पांचवीं अनुसूची के सवाल पर जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि पेसा एक्ट लागू होने के बाद इसकी मांग लगभग खत्म हो गई है। भविष्य में अगर आवश्यकता हुई तो इस पर जरूर चर्चा की जाएगी। सरकार की ओर से वन मंत्री विजय शाह भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मैं भी सरकार की ओर से इस मांग को केंद्र सरकार तक ले जाऊंगा। जरूरत पड़ी तो सड़कों पर भी उतरा जाएगा। पद से ज्यादा मेरे लिए समाज महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश में पांचवीं अनुसूची की मांग पर कांग्रेस, जयस (जय आदिवासी संगठन), गोंडवाना गणतंत्र पार्टी समेत तमाम दल लंबे समय से अड़े हैं। डीलिस्टिंग पर दलों में आम राय नहीं बन पाई है।
यह आंदोलन क्यों?
जनजातीय सुरक्षा मंच का कहना है कि कई लोग आदिवासी समाज की मूल पहचान प्रकृति को छोड़ चुके हैं। वे लोग जनजातीय रुढ़ियां और परंपराओं को भी नहीं मानते। आदिवासी अधिकारों पर अतिक्रमण करते हैं। इस वजह से इन्हें डीलिस्ट किए जाने की जरूरत है। वे धर्म परिवर्तन करने के बाद भी आदिवासियों को मिलने वाले लाभों का फायदा उठा रहे हैं। इससे मूल आदिवासियों को वह लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
डीलिस्टिंग गर्जना रैली
जनजातीय सुरक्षा मंच ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान पर डीलिस्टिंग गर्जना रैली की। इस रैली में आदिवासी समुदाय ने अपने हक के लिए हुंकार भरी। एकसूत्री मांग यह है कि जिन लोगों ने मत बदल लिया या धर्म बदल लिया, उन्हें आरक्षण समेत अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों को नहीं माना गया तो दिल्ली कूच करेंगे। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी श्यामसिंह कुमरे ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने कहा कि एक से दूसरे धर्म में जाने पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद भी उन्हें लाभ मिल रहा है। इससे हमारे समाज के लोग गलत दिशा में जा रहे हैं।
