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MP News: जनगणना को लेकर निर्देश जारी, गलत जानकारी देने पर 3 साल तक सजा, अधिकारियों को नहीं रोक सकेंगे नागरिक

Mon, 13 Apr 2026 11:57 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 13 Apr 2026 11:57 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। गृह विभाग ने प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार नागरिकों को जनगणना में गलत जानकारी देने पर जुर्माना और तीन साल तक हो सकती है।  

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Strict instructions regarding census: Punishment up to 3 years for giving wrong information, citizens will not
जनगणना सांकेतिक फोटो - फोटो : Freepik

विस्तार

मध्य प्रदेश में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। राज्य सरकार ने गृह विभाग को इस कार्य के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया है, जो पूरे अभियान की निगरानी करेगा। इसी के तहत जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। निर्देशों के अनुसार, जनगणना के दौरान गलत जानकारी देने या कार्य में बाधा उत्पन्न करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना कर्मी केंद्र सरकार द्वारा तय प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र करेंगे और प्रत्येक नागरिक का दायित्व होगा कि वह सही जानकारी उपलब्ध कराए। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति परिवार की किसी महिला का नाम बताने से इनकार करता है, तो कर्मचारी उस पर दबाव नहीं बना सकेंगे। 
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अधिकारियों को प्रवेश से नहीं रोक सकेंगे
जारी निर्देशों में कहा गया है कि अधिकृत जनगणना अधिकारी अपने कार्य के दौरान किसी भी घर, परिसर या अन्य स्थान में प्रवेश कर सकते हैं, बशर्ते वह स्थान पारंपरिक रूप से प्रतिबंधित न हो। उन्हें आवश्यक आंकड़े एकत्र करने और रिकॉर्ड तैयार करने से भी नहीं रोका जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालता है या जानकारी देने से बचता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में एक हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 
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कई विभागों की संयुक्त भागीदारी
जनगणना कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, पंचायत और शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को तैनात करने का निर्णय लिया है। इससे डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकेगा।


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दस्तावेज जांच का भी अधिकार
अधिसूचना के तहत नियुक्त अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक जानकारी एकत्र करने, दस्तावेजों की जांच करने और संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण करने के लिए अधिकृत होंगे। जरूरत पड़ने पर वे किसी भी नागरिक से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

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फॉर्म में बदलाव की संभावना
अब तक 2011 की जनगणना में 29 कॉलम का फॉर्म उपयोग किया जाता था, जिसमें नाम, पता, शिक्षा, व्यवसाय, रोजगार और माइग्रेशन से जुड़े सवाल शामिल थे। उस समय केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की जानकारी दर्ज की जाती थी। आगामी जनगणना में जातिगत आंकड़ों के लिए अतिरिक्त कॉलम जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।

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कानूनी बदलाव की जरूरत
वर्तमान में जनगणना अधिनियम 1948 के तहत केवल SC और ST वर्ग की गणना का प्रावधान है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की गणना के लिए इस कानून में संशोधन आवश्यक होगा। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 1,270 अनुसूचित जातियां और 748 अनुसूचित जनजातियां दर्ज की गई थीं। उस समय SC आबादी 16.6% और ST आबादी 8.6% थी। बता दें कि 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत सर्वेक्षण भी कराया गया था, लेकिन उसके पूर्ण आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए थे।
 
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