फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Smart helmet to locate hospital automatically after an accident; platform to provide treatment cost estimates

हादसे के बाद खुद अस्पताल ढूंढेगा स्मार्ट हेलमेट: घर बैठे इलाज का खर्च बताएगा मंच,इनोवेशन देख सीएम ने की सराहना

Tue, 06 Oct 2026 03:43 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 06 Oct 2026 03:43 PM IST
सार

सीएम यूथ कॉन्क्लेव में युवाओं ने नौकरी की तलाश से आगे बढ़कर समस्याओं के समाधान वाले मॉडल पेश किए। स्मार्ट हेलमेट हादसे के बाद खुद परिजन और अस्पताल को सूचना देगा, क्यूरियो मरीज को इलाज का खर्च और अस्पतालों की तुलना बताएगा, जबकि हाइड्रोविला बिना मिट्टी घर में खेती का रास्ता दिखाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्रों के मॉडल देखे और नवाचारों की सराहना की।

विज्ञापन
Smart helmet to locate hospital automatically after an accident; platform to provide treatment cost estimates
स्मार्ट हेलमेट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लाल परेड मैदान में मंगलवार को हुए सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 में सिर्फ युवाओं के सवाल ही नहीं गूंजे, बल्कि उनके बनाए ऐसे मॉडल भी चर्चा में रहे, जो सड़क हादसे के बाद मदद से लेकर इलाज का खर्च और घर में खेती तक की तस्वीर बदलने का दावा करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव में युवाओं से संवाद किया और उनके बनाए मॉडल देखे। उन्होंने छात्रों के नवाचारों की सराहना की और उनके बारे में जानकारी ली।
विज्ञापन


हादसा होते ही टस्मार्ट हेलमे भेजेगा लोकेशन, अस्पताल में बेड भी तलाशेगा
एलएनसीटी ग्रुप ऑफ कॉलेज के कंप्यूटर साइंस के सातवें सेमेस्टर के छात्र सिट्टू कुमार सिंह ने स्मार्ट हेलमेट तैयार किया है। झारखंड के डाल्टनगंज निवासी सिट्टू के मुताबिक इसका उद्देश्य हादसे के बाद घायल को तत्काल मदद दिलाना है। उनके अनुसार हादसे के बाद यदि बाइक सवार खुद परिजनों को फोन करने या अस्पताल जाने की स्थिति में नहीं है, तो हेलमेट अपने सिस्टम से परिजनों को कॉल करेगा और घायल की मौजूदा लोकेशन भेजेगा। इसके बाद एआई के जरिए आसपास के अस्पतालों की जानकारी लेकर उपयुक्त अस्पताल की पहचान करने और इमरजेंसी बेड के लिए अनुरोध भेजने की व्यवस्था की गई है। सिट्टू का कहना है कि हेलमेट में लगे सिस्टम को इस तरह सुरक्षित रखा गया है कि हादसे के बाद भी वह काम करता रहे। उनका लक्ष्य है कि एंबुलेंस घायल को सीधे उस अस्पताल तक पहुंचाए, जहां उसके इलाज की व्यवस्था हो सके। उन्होंने बताया कि इस मॉडल को ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ जोड़कर स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है। अस्पतालों और गैर सरकारी संगठनों के साथ भी साझेदारी की संभावना है।
विज्ञापन


इलाज शुरू कराने से पहले बताएगा- कितना खर्च आएगा
पंकज सिंह ने ‘क्यूरियो’ नाम का मंच तैयार किया है। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज की वित्तीय योजना बनाने में मदद करना है। इसमें मरीज को इलाज की अनुमानित लागत, अस्पताल और उपचार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। पंकज के मुताबिक मरीज एक अनुरोध के जरिए कई अस्पतालों और क्लीनिकों से इलाज का खर्च जान सकता है। इसके लिए मंच 99 रुपये शुल्क लेता है। मरीज को अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग, भर्ती, डॉक्टर की सलाह, जांच और दवाओं से जुड़े खर्च का अलग-अलग ब्योरा उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि इससे मरीज अलग-अलग अस्पतालों के खर्च की तुलना कर अपने लिए बेहतर विकल्प चुन सकेगा। मंच का फोकस सामान्य मरीजों के साथ बुजुर्गों और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर भी बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मिट्टी के बिना घर में होगी खेती, सेंसर खुद संभालेंगे पौधों की जरूरत
 बीटेक चौथे वर्ष की छात्रा आलिया खान ने ‘हाइड्रोविला’ मॉडल प्रस्तुत किया। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्वचालित हाइड्रोपोनिक खेती की व्यवस्था है। इसमें मिट्टी के बजाय कोकोपीट और पोषक घोलों का इस्तेमाल किया जाता है। आलिया के मुताबिक पारंपरिक खेती की तुलना में इसमें यूरिया और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सेंसर और डैशबोर्ड के जरिए खेती की निगरानी और जरूरी प्रक्रियाओं को स्वचालित करने की कोशिश की गई है। इस मॉडल का इस्तेमाल उन शहरों में भी किया जा सकता है, जहां खेती के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। आलिया के मुताबिक भविष्य में इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता जोड़ी जाएगी, जिससे पौधों के लिए जरूरी पीएच स्तर की पहचान और उसके अनुसार सुझाव देने वाली व्यवस्था विकसित की जा सके।


यह भी पढ़ें-एमपी में युवाओं के लिए बड़ा प्लान: 2027 ‘युवा वर्ष’, हर जिले में फ्री कोचिंग,अगले साल दो एमपीपीएससी की परीक्षा

सवालों के साथ समाधान दिखाने पहुंचे युवा
कॉन्क्लेव में युवाओं की भागीदारी का एक अलग पहलू उनके मॉडल और नवाचार रहे। किसी ने सड़क हादसे में घायल की जान बचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया, तो किसी ने इलाज का खर्च समझने और अस्पताल चुनने की समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की। वहीं, शहरी क्षेत्रों में जमीन की कमी के बीच घर में खेती का विकल्प तैयार किया गया। मुख्यमंत्री ने इन मॉडलों को देखा और छात्रों से उनके काम, उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली। कॉन्क्लेव में युवाओं के नवाचारों ने यह भी दिखाया कि छात्र अब केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक के जरिए रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान तैयार करने पर भी काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed