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नाड़ी देख बीमारी के संकेत पहचानने का मौका: खुशीलाल संस्थान में जुटेंगे विशेषज्ञ, बताएंगे जांच का तरीका

Sun, 04 Oct 2026 11:34 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 04 Oct 2026 11:34 AM IST
सार

 भोपाल में 6 अक्टूबर को नाड़ी विश्लेषण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। देशभर के विशेषज्ञ नाड़ी परीक्षा की शास्त्रीय पद्धति, चिकित्सकीय उपयोगिता और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के नजरिए से इसकी प्रासंगिकता पर मंथन करेंगे।

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An opportunity to identify signs of illness by reading the pulse: Experts from across the country willradition
पं. खुशीलाल शासकीय आयुर्वेद संस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आयुर्वेद में शरीर की स्थिति और रोगों के संकेत समझने के पारंपरिक माध्यम नाड़ी परीक्षा को आधुनिक वैज्ञानिक और अनुसंधानात्मक दृष्टिकोण से समझने के लिए भोपाल में देशभर के विशेषज्ञ जुटेंगे। पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान और राष्ट्रीय आयुष मिशन के संयुक्त तत्वावधान में 6 अक्टूबर को ‘नाड़ी विश्लेषण-2026’ राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।
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विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे
रजत जयंती ऑडिटोरियम में होने वाली इस संगोष्ठी में नाड़ी परीक्षा के शास्त्रीय सिद्धांतों से लेकर आज की चिकित्सा व्यवस्था में इसकी उपयोगिता और प्रासंगिकता पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि आयोजन में नाड़ी परीक्षा को केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के रूप में देखने के बजाय उसके वैज्ञानिक आधार, अनुसंधान और व्यावहारिक चिकित्सकीय उपयोग पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।
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देशभर के विशेषज्ञ बताएंगे नाड़ी परीक्षण के अलग-अलग आयाम
संगोष्ठी में वैद्य तपन कुमार, वैद्य संजय पी. छाजेड, वैद्य सुशांत मिश्रा, डॉ. भाग्यश्री गावंडे, डॉ. नवीन चंद्र जोशी, डॉ. प्रज्ञान त्रिपाठी और डॉ. गायत्री आर. मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। विशेषज्ञ नाड़ी परीक्षा की विधि, इसके महत्व और मरीज की स्थिति के आकलन में इसके व्यावहारिक इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
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परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शोध के बीच संवाद पर जोर
आयोजन का प्रमुख फोकस आयुर्वेद की पुरानी ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक नजरिए से समझना है। नाड़ी परीक्षा के शास्त्रीय सिद्धांतों को चिकित्सकीय उपयोग से जोड़ने के साथ ही इसके अनुसंधानात्मक पक्ष पर भी चर्चा होगी। इससे आयुर्वेद के विद्यार्थियों, शिक्षकों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नाड़ी परीक्षण के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।संगोष्ठी में आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े चिकित्सक, शोधकर्ता, शिक्षक और विद्यार्थी भाग लेंगे। आयोजन डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, के मार्गदर्शन में किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य नाड़ी परीक्षा के ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ इसके चिकित्सकीय उपयोग और वैज्ञानिक अध्ययन को लेकर संवाद को आगे बढ़ाना है।
 
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