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एमपी: कान्हा में 100 साल बाद लौटे जंगली भैंसे, सीएम ने काजीरंगा से लाए गए आठ भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा
Sun, 11 Oct 2026 08:37 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 11 Oct 2026 08:37 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। काजीरंगा से लाए गए आठ भैंसों को 17 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ा गया है। अब अगले तीन वर्षों में यहां 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य है।
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सीएम मोहन यादव ने जंगली भैंसों को बड़े बाड़े में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश के जंगलों में करीब सौ साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी की उम्मीद अब मजबूत हो रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसों को छोटे बाड़े से निकालकर 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ा गया है। अब इन्हें यहां के मौसम और वातावरण के अनुकूल बनाने के बाद प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में काम होगा। वन विभाग ने अगले तीन साल में इस क्षेत्र में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को आठों भैंसों को बड़े बाड़े में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। इनमें छह मादा और दो नर हैं। इन्हें असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में मध्यप्रदेश लाया गया था। पहले इन्हें एक हेक्टेयर के बाड़े में क्वारंटाइन रखा गया, ताकि वे नए वातावरण में ढल सकें।
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पहले छोटे बाड़े में रखा, अब बड़ा क्षेत्र मिला
पहले चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर भैंसा लाया गया था। इसके बाद 9 मई को तीन मादा और एक नर को यहां पहुंचाया गया। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद 11 अक्टूबर को इन्हें 17 हेक्टेयर के बाड़े में स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 2200 किलोमीटर दूर काजीरंगा से इन वन्यजीवों को मध्यप्रदेश लाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से यह पहल संभव हुई है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
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जैव विविधता को मजबूत करने की पहल
वन विभाग के अनुसार, सूपखार क्षेत्र में पहले जंगली भैंसों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। इसी आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य केवल भैंसों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश के वन क्षेत्रों में इस प्रजाति को फिर से स्थापित करना और जैव विविधता को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य विकसित करने और चीतों के लिए तीसरा ठिकाना तैयार करने की पहल का भी उल्लेख किया।
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पहले छोटे बाड़े में रखा, अब बड़ा क्षेत्र मिला
पहले चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर भैंसा लाया गया था। इसके बाद 9 मई को तीन मादा और एक नर को यहां पहुंचाया गया। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद 11 अक्टूबर को इन्हें 17 हेक्टेयर के बाड़े में स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 2200 किलोमीटर दूर काजीरंगा से इन वन्यजीवों को मध्यप्रदेश लाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से यह पहल संभव हुई है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
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जैव विविधता को मजबूत करने की पहल
वन विभाग के अनुसार, सूपखार क्षेत्र में पहले जंगली भैंसों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। इसी आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य केवल भैंसों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश के वन क्षेत्रों में इस प्रजाति को फिर से स्थापित करना और जैव विविधता को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य विकसित करने और चीतों के लिए तीसरा ठिकाना तैयार करने की पहल का भी उल्लेख किया।
