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एमपी: कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन? उत्तराखंड के नए राज्यपाल का एमपी से क्या है कनेक्शन, जानें सियासी सफर
Tue, 13 Oct 2026 07:54 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 13 Oct 2026 07:54 AM IST
सार
वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और बालाघाट से सांसद रहे बिसेन का राजनीतिक सफर पांच दशक पुराना है। उनकी नियुक्ति ने संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं की भूमिका पर चर्चा छेड़ दी है।
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डॉ. ढाल सिंह बिसेन, उत्तराखंड के नए राज्यपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को अब उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चार बार विधायक, मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और बालाघाट से लोकसभा सांसद रह चुके बिसेन का राजनीतिक सफर संगठन से लेकर सत्ता तक फैला रहा है। उनकी नियुक्ति को एक ऐसे नेता की लंबी राजनीतिक पारी के नए पड़ाव के रूप में देखा जा सकता है, जिसने प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
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सिवनी से शुरू हुआ सफर
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। उनका राजनीतिक सफर वर्ष 1990 में मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचने के साथ आगे बढ़ा। इसके बाद वे 1993, 1998 और 2003 में भी विधायक चुने गए। इस तरह उन्होंने चार बार विधानसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2003 में भाजपा की सरकार बनने के बाद बिसेन को मंत्रिमंडल में जगह मिली। वर्ष 2003 से 2005 तक उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान वन, परिवहन, खनिज, स्कूल शिक्षा और जेल जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में वर्ष 2011 से 2013 तक वे मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे।
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ओबीसी और भोयर पवार समाज से जुड़ाव
बिसेन की पहचान केवल एक अनुभवी भाजपा नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि ओबीसी समाज से आने वाले नेताओं में भी रही है। वे भोयर पवार समाज से संबंध रखते हैं। प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की अहमियत को देखते हुए उनकी यह पृष्ठभूमि भी उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा रही है।
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हालांकि राज्यपाल के पद पर नियुक्ति को केवल जातीय समीकरणों से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। उनकी चार दशक से अधिक की चुनावी और प्रशासनिक यात्रा, संगठन में भूमिका तथा सरकार और संसद में काम करने का अनुभव भी उनके सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
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पेशे से चिकित्सक, राजनीति में लंबा अनुभव
राजनीति के साथ उनका जुड़ाव सामाजिक कार्यों से भी रहा है। वे आयुर्वेद और होम्योपैथी के चिकित्सक भी हैं। वर्ष 2019 में भाजपा ने उन्हें बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वे सांसद चुने गए। सांसद के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब राज्यपाल की नियुक्ति उनके सार्वजनिक जीवन की नई भूमिका है।
संगठन से संवैधानिक पद तक का सफर
बिसेन की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब भाजपा के कई वरिष्ठ नेता संगठन, सरकार और संवैधानिक पदों पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनके समर्थक इसे लंबे राजनीतिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन में योगदान की पहचान के रूप में देख सकते हैं। वहीं राजनीतिक दृष्टि से यह नियुक्ति इस बात पर भी चर्चा का अवसर देती है कि लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहे नेताओं को नई भूमिकाएं किस तरह मिलती हैं। हालांकि इसे पार्टी की ओर से पुराने कार्यकर्ताओं को इनाम देने का फैसला कहना एक राजनीतिक व्याख्या होगी।
अब डॉ. ढाल सिंह बिसेन की राजनीतिक पहचान मध्य प्रदेश से आगे उत्तराखंड के संवैधानिक पद से भी जुड़ गई है। उनके सामने राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी होगी, जबकि उनकी नियुक्ति ने मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके लंबे सफर और संगठन में पुराने नेताओं की भूमिका पर चर्चा को फिर से सामने ला दिया है।
