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एमपी: प्रदेश में मूंग को जल्दी सुखाने वाला जहरीला कीटनाशक प्रतिबंधित, कंपनियों को स्टॉक नष्ट करने के निर्देश
Wed, 14 Oct 2026 10:49 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 14 Oct 2026 10:49 PM IST
सार
मध्यप्रदेश सरकार ने मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अत्यंत विषैले कीटनाशक पैराक्वेट डाइक्लोराइड की बिक्री और भंडारण पर रोक लगा दी है। सरकार ने संबंधित कंपनियों को उत्पादन-बिक्री बंद करने और बचे हुए स्टॉक को नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। इस रसायन के संपर्क में आने से इंसानों और पशुओं की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पैराक्वेट डाइक्लोराइड कीटनाशक पर मध्यप्रदेश सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। यह रसायन इंसानों और पशुओं के लिए बेहद जहरीला है। इसके संपर्क में आने या शरीर में पहुंचने से गंभीर नुकसान हो सकता है। राज्य सरकार ने कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों को इसका उत्पादन और बिक्री रोकने के साथ बचा हुआ स्टॉक वापस लेकर नियमों के अनुसार नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से इस कीटनाशक के पंजीकरण रद्द करने और प्रतिबंध लगाने के बाद की गई है। जिन कंपनियों के पास इसके पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं, उन्हें केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को प्रमाणपत्र लौटाने के लिए भी कहा गया है।
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मूंग की फसल में क्यों करते हैं इस्तेमाल?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड ऐसा रसायन है, जो पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तेजी से सुखा देता है। इसे ग्रामोक्सोन जैसे ट्रैड नामों से भी जाना जाता है। किसान मूंग की कटाई से पहले कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल फसल को जल्दी सुखाने के लिए करते रहे हैं। इसके छिड़काव से हरे पौधे और पत्तियां 24 से 72 घंटे में सूख सकती हैं। इससे फसल काटने और दाने अलग करने यानी थ्रेसिंग में आसानी होती है। किसानों को समय और मजदूरी का खर्च बचने की उम्मीद रहती है। हालांकि, मूंग की फसल में इसका इस्तेमाल अनुमत नहीं था। इसके बावजूद जल्दी कटाई के लिए इसके अवैध इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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इंसानों के शरीर में पहुंचा तो क्या होगा?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड यह एक अत्यंत विषैला केमिकल है। इसके संपर्क में आने या इसके अवशेषों वाले खाद्य पदार्थ के सेवन से कैंसर, लिवर, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यदि यह शरीर में चला जाए या गलती से पिया जाए, तो इसका कोई इलाज या एंटीडोट नहीं है, जिससे यह जानलेवा साबित होता है।
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मूंग की फसल में क्यों करते हैं इस्तेमाल?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड ऐसा रसायन है, जो पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तेजी से सुखा देता है। इसे ग्रामोक्सोन जैसे ट्रैड नामों से भी जाना जाता है। किसान मूंग की कटाई से पहले कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल फसल को जल्दी सुखाने के लिए करते रहे हैं। इसके छिड़काव से हरे पौधे और पत्तियां 24 से 72 घंटे में सूख सकती हैं। इससे फसल काटने और दाने अलग करने यानी थ्रेसिंग में आसानी होती है। किसानों को समय और मजदूरी का खर्च बचने की उम्मीद रहती है। हालांकि, मूंग की फसल में इसका इस्तेमाल अनुमत नहीं था। इसके बावजूद जल्दी कटाई के लिए इसके अवैध इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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इंसानों के शरीर में पहुंचा तो क्या होगा?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड यह एक अत्यंत विषैला केमिकल है। इसके संपर्क में आने या इसके अवशेषों वाले खाद्य पदार्थ के सेवन से कैंसर, लिवर, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यदि यह शरीर में चला जाए या गलती से पिया जाए, तो इसका कोई इलाज या एंटीडोट नहीं है, जिससे यह जानलेवा साबित होता है।
