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MP News: मौतों से पहले खतरे के संकेत, 28 आंगनवाड़ियों में 231 बच्चे कम वजन के मिले,फिर क्यों नहीं जागा सिस्टम?

Fri, 21 Aug 2026 10:38 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 21 Aug 2026 10:38 AM IST
सार

बालाघाट के बैगा बहुल बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था पर सवाल गहरा गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में मौतों से पहले ही 28 आंगनवाड़ियों के 231 बच्चे कम वजन वाले मिले थे। इसके बावजूद प्रशासन नहीं जागा। जानकारी के अनुसार बालाघाट में बीमारी के बाद  2 सौ से ज्यादा बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अभी 44 बच्चे अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।

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MP News: Warning signs before the deaths 231 underweight children found across 28 Anganwadis; why did the syst
बालाघाट अस्पताल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा बहुल बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी पोषण रिकॉर्ड के मुताबिक, जिन इलाकों में जून से अब तक आठ बच्चों की मौत हुई, वहां मौतों से पहले ही बड़ी संख्या में बच्चे पोषण के स्तर पर कमजोर पाए गए थे। जुलाई में प्रभावित क्षेत्र की 28 आंगनवाड़ियों में छह साल से कम उम्र के 1,149 बच्चों का वजन किया गया। इनमें 213 बच्चे सामान्य से कम वजन और 18 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन वाले मिले। यानी जांचे गए बच्चों में करीब हर पांचवां बच्चा पोषण के लिहाज से कमजोर था। 
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सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बच्चों के वजन और पोषण की स्थिति का रिकॉर्ड सरकारी तंत्र के पास पहले से मौजूद था, तो इन बच्चों की नियमित निगरानी कितनी हुई। खास तौर पर गंभीर रूप से कम वजन वाले 18 बच्चों को क्या अलग से चिन्हित किया गया? क्या उनका घर-घर फॉलोअप हुआ और क्या उन्हें अतिरिक्त पोषण या चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई गई? सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक कुंडेकशा में 54 बच्चों का वजन किया गया, जिनमें 29 बच्चे कम वजन वाले मिले। इनमें 26 सामान्य से कम और तीन गंभीर रूप से कम वजन वाले थे। वहीं बोंदारी में 69 में से 25 बच्चे कम वजन वाले मिले। कोरका में 69 बच्चों में 28 बच्चे पोषण मानकों पर कमजोर पाए गए। ये आंकड़े जुलाई के हैं, यानी बच्चों की मौतों के बाद प्रशासन की ओर से बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप शुरू किए जाने से पहले के।
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तीन महीने से पोषण आहार नहीं मिलने का दावा
इस पूरे मामले में पोषण आहार की उपलब्धता भी अहम सवाल बन गई है। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में करीब तीन महीने से पोषण आहार का वितरण प्रभावित था। अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या केवल बालाघाट तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई जगह सामने आई थी। बच्चों की मौतों के बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को दो महीने का राशन अग्रिम देने की व्यवस्था की है। साथ ही बच्चों को पर्याप्त भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी निगरानी भी की जा रही है। यही स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, जब सरकारी रिकॉर्ड में पहले ही बड़ी संख्या में बच्चे कम वजन वाले मिल चुके थे, तब पोषण आहार की आपूर्ति में आई रुकावट का इन बच्चों पर क्या असर पड़ा और इसकी निगरानी किस स्तर पर हुई?
 
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आठ या 20 बच्चों की मौत यह भी सवाल 
वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि जून से बिरसा ब्लॉक के तीन दूरस्थ गांवों में आठ बच्चों की मौत हुई है। हालांकि स्थानीय लोग 20 से ज्यादा बच्चों की मौत का दावा किया जा रहा है। प्रशासन ने बच्चों की मौतों का कारण मौसमी बीमारी को बता रहा है, जिसमें मलेरिया और खसरा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की टीमें भी क्षेत्र का दौरा कर चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी रहस्यमयी बीमारी के संकेत नहीं मिले हैं।  हालांकि मौतों के साथ सामने आए पोषण के आंकड़े एक दूसरा सवाल जरूर खड़ा करते हैं। अगर बच्चों में पहले से पोषण की कमी थी, तो बीमारी के दौरान इसका उनके स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ा?  

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जंगलों में स्वास्थ्य सेवा की असली चुनौती
बिरसा क्षेत्र के कई प्रभावित गांव घने जंगलों में स्थित हैं। यहां से अस्पतालों की दूरी 50 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार बच्चे को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार कुछ परिवार पारंपरिक मान्यताओं के कारण बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाने में भी हिचकते हैं। इससे कई बार इलाज शुरू होने में देरी हो सकती है। अब प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर निगरानी बढ़ाई है। स्वास्थ्य टीमें बीमार बच्चों की पहचान कर उन्हें अस्पताल पहुंचा रही हैं। जल स्रोतों को सैनिटाइज करने, साफ-सफाई, फॉगिंग और लार्वा नियंत्रण जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। 

कम वजन वाले मामले की डिटेज जांच कराएंगे 
बालाघाट कलेक्टर सत्यम कुमार ने बताया कि अब तक 163 बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 44 बच्चे अभी अस्पताल में भर्ती हैं। उनके अनुसार इन बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कम वजन वाले बच्चों के संबंध में कलेक्टर ने कहा कि इसकी पूरी जानकारी की जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पोषण आहार की आपूर्ति में आई समस्या केवल बालाघाट तक सीमित नहीं थी। अभी 15 दिन पहले मिले निर्देशों के बाद स्थानीय समूहों के माध्यम से पोषण आहार की सप्लाई शुरू कर दी गई है।


 
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