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MP News: विस में ध्यानाकर्षण से विश्नोई ने अपनी ही सरकार को घेरा, जबलपुर में जल प्रदाय व्यवस्था पर उठाए सवाल
Thu, 19 Feb 2026 07:22 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 19 Feb 2026 07:22 PM IST
सार
मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को सत्तापक्ष के विधायक ने ही सरकार को घेरा। जबलपुर की जल समस्या को लेकर मंत्री का ध्यानाकर्षण किया। उन्होंने कहा कि नर्मदा होने के बावजूद जबलपुर प्यासा है। जल प्रदाय व्यवस्था पर सवाल उठाए। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अजय विश्नोई के बीच नोकझोंक भी हुई।
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विधायक अजय विश्नोई और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को सत्तापक्ष के ही विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। जबलपुर से बीजेपी विधायक विश्नोई ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए शहर में जल संकट का मुद्दा उठाया और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। कहा कि जबलपुर में नर्मदा नदी होने के बावजूद शहर पानी की किल्लत झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एशियन डेवलपमेंट बैंक के दबाव में अधिकारियों ने कागजों में जल प्रदाय योजना को पूरा दिखा दिया, जबकि जमीनी स्तर पर हालात ठीक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं में कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं रहते और जनता में भारी नाराजगी है।
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नियमित जल वितरण हो रहा : विजयवर्गीय
मामले पर जवाब देते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि तथ्यों को दुरुस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पेयजल योजनाएं जारी हैं और नियमित रूप से पानी की सप्लाई की जा रही है। मंत्री ने यह भी कहा कि कई निकायों द्वारा बिजली बिल का भुगतान नहीं किए जाने से भी समस्या उत्पन्न हुई। इस पर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
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मंत्री को पूरी जानकारी नहीं
अजय विश्नोई ने कहा कि मंत्री को पूरी जानकारी नहीं है, पुरानी योजनाओं और प्लानिंग पर काम नहीं हुआ और नई योजनाओं के नाम पर विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे लूट का नया रास्ता खुल गया है, जबकि उनकी सरकार की प्राथमिकता जल आपूर्ति है।
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मंत्री बोले- जल्द समाधान करेंगे
मंत्री विजयवर्गीय ने जवाब में कहा कि शहर में डबल सिस्टम से पानी लिया जा रहा है और पहले की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक पानी दिया जा रहा है। उन्होंने नलकूप बंद कराने की जरूरत बताई और कहा कि कई बार जनप्रतिनिधि ही बिजली बिल के मामलों में अड़ंगा डालते हैं। इस पर विधायक ने कहा कि नलकूप बंद कराना सरकार की जिम्मेदारी है, जनप्रतिनिधियों की नहीं। अंत में मंत्री ने कहा कि वे मामले का जल्द समाधान करेंगे और सभी जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपेक्षा की।
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जर्जर स्कूल भवनों का मुद्दा सदन में उठा, मंत्री ने दिए आंकड़े
प्रश्नकाल में भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने अपने क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवनों का मामला सदन में उठाया। उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान स्कूलों की खराब स्थिति का मुद्दा रखते हुए जर्जर छतों के फोटो भी सदन में प्रदर्शित किए। विधायक ने कहा कि कई स्कूल भवनों की हालत बेहद खराब है। छतें जर्जर हो चुकी हैं और स्कूल परिसरों में बाउंड्रीवाल समेत मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सिवनी विधानसभा क्षेत्र में 44 प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में चिन्हित किए गए हैं। साथ ही क्षेत्र में 5 नए विद्यालय भवन स्वीकृत किए गए हैं। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश स्तर पर करीब 1800 स्कूल भवनों को जीर्ण-शीर्ण चिह्नित किया गया है। स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विभाग द्वारा 1200 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
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सहरिया आदिवासियों को परेशान करने का आरोप
प्रश्नकाल में श्योपुर जिले के सहरिया आदिवासियों का मुद्दा गूंजा। कांग्रेस विधायक मुकेश मलहोत्रा ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से श्योपुर के बेचिराग ग्राम ऊकल, ग्राम सोहनदेह और ग्राम श्यामपुरा का मामला उठाया। विधायक ने आरोप लगाया कि इन गांवों में वन विभाग की कार्रवाई के कारण सहरिया आदिवासियों को हटाया जा रहा है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी परिवारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
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वन भूमि पर किसी को नहीं बसा सकते : मंत्री
इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि वन भूमि पर किसी को बसाया नहीं जा सकता और नियमानुसार ही कार्रवाई की जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आसंदी से स्पष्ट निर्देश दिए कि श्योपुर में सहरिया आदिवासियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। अध्यक्ष ने राजस्व मंत्री को निर्देशित किया कि वे कलेक्टर को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें, ताकि आदिवासी परिवारों को किसी प्रकार की अनुचित परेशानी न हो।
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नियमित जल वितरण हो रहा : विजयवर्गीय
मामले पर जवाब देते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि तथ्यों को दुरुस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पेयजल योजनाएं जारी हैं और नियमित रूप से पानी की सप्लाई की जा रही है। मंत्री ने यह भी कहा कि कई निकायों द्वारा बिजली बिल का भुगतान नहीं किए जाने से भी समस्या उत्पन्न हुई। इस पर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
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मंत्री को पूरी जानकारी नहीं
अजय विश्नोई ने कहा कि मंत्री को पूरी जानकारी नहीं है, पुरानी योजनाओं और प्लानिंग पर काम नहीं हुआ और नई योजनाओं के नाम पर विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे लूट का नया रास्ता खुल गया है, जबकि उनकी सरकार की प्राथमिकता जल आपूर्ति है।
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मंत्री बोले- जल्द समाधान करेंगे
मंत्री विजयवर्गीय ने जवाब में कहा कि शहर में डबल सिस्टम से पानी लिया जा रहा है और पहले की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक पानी दिया जा रहा है। उन्होंने नलकूप बंद कराने की जरूरत बताई और कहा कि कई बार जनप्रतिनिधि ही बिजली बिल के मामलों में अड़ंगा डालते हैं। इस पर विधायक ने कहा कि नलकूप बंद कराना सरकार की जिम्मेदारी है, जनप्रतिनिधियों की नहीं। अंत में मंत्री ने कहा कि वे मामले का जल्द समाधान करेंगे और सभी जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपेक्षा की।
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जर्जर स्कूल भवनों का मुद्दा सदन में उठा, मंत्री ने दिए आंकड़े
प्रश्नकाल में भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने अपने क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवनों का मामला सदन में उठाया। उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान स्कूलों की खराब स्थिति का मुद्दा रखते हुए जर्जर छतों के फोटो भी सदन में प्रदर्शित किए। विधायक ने कहा कि कई स्कूल भवनों की हालत बेहद खराब है। छतें जर्जर हो चुकी हैं और स्कूल परिसरों में बाउंड्रीवाल समेत मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सिवनी विधानसभा क्षेत्र में 44 प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में चिन्हित किए गए हैं। साथ ही क्षेत्र में 5 नए विद्यालय भवन स्वीकृत किए गए हैं। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश स्तर पर करीब 1800 स्कूल भवनों को जीर्ण-शीर्ण चिह्नित किया गया है। स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विभाग द्वारा 1200 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
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सहरिया आदिवासियों को परेशान करने का आरोप
प्रश्नकाल में श्योपुर जिले के सहरिया आदिवासियों का मुद्दा गूंजा। कांग्रेस विधायक मुकेश मलहोत्रा ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से श्योपुर के बेचिराग ग्राम ऊकल, ग्राम सोहनदेह और ग्राम श्यामपुरा का मामला उठाया। विधायक ने आरोप लगाया कि इन गांवों में वन विभाग की कार्रवाई के कारण सहरिया आदिवासियों को हटाया जा रहा है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी परिवारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
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वन भूमि पर किसी को नहीं बसा सकते : मंत्री
इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि वन भूमि पर किसी को बसाया नहीं जा सकता और नियमानुसार ही कार्रवाई की जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आसंदी से स्पष्ट निर्देश दिए कि श्योपुर में सहरिया आदिवासियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। अध्यक्ष ने राजस्व मंत्री को निर्देशित किया कि वे कलेक्टर को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें, ताकि आदिवासी परिवारों को किसी प्रकार की अनुचित परेशानी न हो।
