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MP News: प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीमनाबाद टनल जल्द होगी पूर्ण, 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई का लाभ

Sun, 29 Mar 2026 10:24 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 29 Mar 2026 10:24 PM IST
सार

प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीमनाबाद जल सुरंग का 85% काम पूरा हो चुका है और इसके जल्द पूर्ण होने से लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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MP News: The state's largest Sleemanabad tunnel will be completed soon, 2 lakh hectares of area will get the b
सीएम डॉ. मोहन यादव बैठक लेते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और वित्तीय बाधाओं को दूर कर लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि किसानों को जल्द अधिकतम लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से कार्यों में तेजी आई है। रविवार को समत्व भवन में आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 270वीं बैठक, नर्मदा नियंत्रण मंडल की 87वीं बैठक और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट लिमिटेड के संचालक मंडल की 34वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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सुरग का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका 
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश की सबसे लंबी 11.952 किलोमीटर स्लीमनाबाद जल सुरंग का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसके शीघ्र पूर्ण होने के बाद उद्घाटन की तैयारी है। यह सुरंग पूर्ण होने पर करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कमान क्षेत्र को सिंचाई का लाभ देगी। टनल का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन और आबादी क्षेत्रों के नीचे से सुरक्षित रूप से किया गया है, जिससे संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का कार्य भी संवेदनशीलता के साथ पूरा किया गया है।
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छह जिलों के 1450 गांवों को मिलेगा फायदा 
बरगी व्यपवर्तन परियोजना, जिसे वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली थी, बीते दो वर्षों में उल्लेखनीय गति से आगे बढ़ी है। प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों को दूर कर कार्यों को अंतिम चरण तक पहुंचाया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत 227 क्यूमेक क्षमता की 197 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर विकसित की जा रही है, जिससे जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।

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इन सिंचाई परियोजनाओं को भी दी स्वीकृति 
बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। इनमें खंडवा जिले की सेल्दामाल माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना (42.95 करोड़ रुपये), दूधी सिंचाई परियोजना की संशोधित लागत (1925.06 करोड़ रुपये) और खालवा उद्वहन माइक्रो लिफ्ट परियोजना (724.10 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अलावा बरगी व्यपवर्तन परियोजना को 7881.75 करोड़ रुपये, आईएसपी-कालिसिंध द्वितीय चरण को 5985.46 करोड़ रुपये और आईएसपी-पावती चरण-III एवं IV को 5164.68 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई। बदनावर माइक्रो लिफ्ट और सीहोर की डोबी सिंचाई परियोजना को भी क्रमशः 1952.71 करोड़ और 275.57 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली।
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