{"_id":"6942c600bfdec40d560dc17a","slug":"mp-news-signs-of-discontent-in-the-mp-congress-organization-ratlam-rural-district-president-harsh-vijay-gehl-2025-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: MP कांग्रेस संगठन में असंतोष के संकेत, रतलाम ग्रामीण जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत ने छोड़ा पद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: MP कांग्रेस संगठन में असंतोष के संकेत, रतलाम ग्रामीण जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत ने छोड़ा पद
Wed, 17 Dec 2025 08:33 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 17 Dec 2025 08:33 PM IST
सार
मध्यप्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक हलचल के बीच रतलाम ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पारिवारिक कारणों और विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारियों का हवाला दिया है। नियुक्ति के चार महीने के भीतर यह इस्तीफा सामने आया है।
विज्ञापन
पीसीसी भोप
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में अंदरूनी हलचल एक बार फिर सामने आई है। आलीराजपुर के बाद अब रतलाम ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह महज कुछ महीनों के भीतर संगठन में दूसरा इस्तीफा है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हर्ष विजय गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भेजे अपने त्यागपत्र में कहा है कि पारिवारिक परिस्थितियों और विधानसभा क्षेत्र से जुड़े दायित्वों के कारण वे जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी को अपेक्षित समय और ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने संगठनात्मक पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है।
महज चार महीने के भीतर ही इस्तीफा
गौरतलब है कि जीतू पटवारी ने दिसंबर 2023 में प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी। इसके करीब डेढ़ साल बाद, अगस्त 2025 में प्रदेशभर में 71 जिला कांग्रेस अध्यक्षों की घोषणा की गई थी। लंबे समय से खाली पड़े रतलाम ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद पर हर्ष विजय गहलोत की नियुक्ति हुई थी। हालांकि, नियुक्ति के महज चार महीने के भीतर ही उनका इस्तीफा सामने आ गया। इससे पहले 6 दिसंबर को आलीराजपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश पटेल भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ चुके हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में संगठन को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया था। लगातार दो जिला अध्यक्षों के इस्तीफे से संगठनात्मक स्थिरता पर चर्चा तेज हो गई है।
यह भी पढ़ें-मनरेगा योजना का नाम बदले जाने को लेकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, सरकार को घेरा
विज्ञापन
ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति के तुरंत बाद उठा सवाल
खास बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर मंगलवार को ही प्रदेशभर में 780 ब्लॉक और उप-ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। इसके ठीक अगले दिन रतलाम ग्रामीण जिला अध्यक्ष का इस्तीफा सामने आना संगठन के भीतर असंतोष या समन्वय की कमी की ओर इशारा कर रहा है। लगातार इस्तीफों से यह सवाल उठने लगा है कि प्रदेश कांग्रेस में हालिया संगठनात्मक बदलाव जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित हो पा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
विज्ञापन
महज चार महीने के भीतर ही इस्तीफा
गौरतलब है कि जीतू पटवारी ने दिसंबर 2023 में प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी। इसके करीब डेढ़ साल बाद, अगस्त 2025 में प्रदेशभर में 71 जिला कांग्रेस अध्यक्षों की घोषणा की गई थी। लंबे समय से खाली पड़े रतलाम ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद पर हर्ष विजय गहलोत की नियुक्ति हुई थी। हालांकि, नियुक्ति के महज चार महीने के भीतर ही उनका इस्तीफा सामने आ गया। इससे पहले 6 दिसंबर को आलीराजपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश पटेल भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ चुके हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में संगठन को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया था। लगातार दो जिला अध्यक्षों के इस्तीफे से संगठनात्मक स्थिरता पर चर्चा तेज हो गई है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-मनरेगा योजना का नाम बदले जाने को लेकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, सरकार को घेरा
विज्ञापन
ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति के तुरंत बाद उठा सवाल
खास बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर मंगलवार को ही प्रदेशभर में 780 ब्लॉक और उप-ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। इसके ठीक अगले दिन रतलाम ग्रामीण जिला अध्यक्ष का इस्तीफा सामने आना संगठन के भीतर असंतोष या समन्वय की कमी की ओर इशारा कर रहा है। लगातार इस्तीफों से यह सवाल उठने लगा है कि प्रदेश कांग्रेस में हालिया संगठनात्मक बदलाव जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित हो पा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
