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MP News: भोपाल में श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन कल, तीन माह में तैयार हुआ रथ, 20 हजार भक्त होंगे शामिल
Fri, 12 Jul 2024 06:20 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 12 Jul 2024 06:20 PM IST
सार
राजधानी भोपाल में इस्कॉन मंदिर की तरफ से शनिवार को बाहरवीं बार विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस रथयात्रा में 20 हजार भक्त शामिल होंगे। यात्रा के लिए रथ को तीन माह में तैयार किया गया है।
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भोपाल में श्री जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन कल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस्कॉन मंदिर पटेल नगर की तरफ से शनिवार को बाहरवीं बार विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह रथयात्रा शहर के मुख्य मार्गों से निकलेंगे। यात्रा शाम चार बजे शुरू होगी, जो हमीदिया रोड, भारत टाकीज, रोशनपुरा चौराहा से होते हुए माता मंदिर के पास प्लेटिनम प्लाजा पर समाप्त होगी। यात्रा में करीब 20 हजार भक्त शामिल होंगे। यात्रा में भाग लेने हेतु होने देश-विदेश से भी भक्तगण आए हैं। इस्कॉन मंदिर की तरफ से बताया गया कि श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा उत्सव हजारों हज़ारों वर्ष पुरानी परंपरा है। इसका वर्णन स्कंध पुराण, पद्म पुराण तथा अन्य कई पुराण में मिलता है। शास्त्र में वर्णन है, कि रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से जीव जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।
तीन माह में तैयार हुआ विशेष रथ
इस बार रथयात्रा हेतु एक भव्य रथ का निर्माण किया गया है। इसकी बनावट पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ भगवान के नंदीघोष रथ के आधार पर की गई है। भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी रथ में विराजमान होंगे। रथ का निर्माण तीन माह में किया गया है। रथ की ऊंचाई 27 फीट, चौड़ाई 17 फीट और लंबाई 24 फीट है। रथ का फाउंडेशन लोहे से एवं बेस और कैनोपी के लिए सागौन की काष्ठ का उपयोग किया गया है। जिसमें लगभग 2 टन लोहा और 50 घन फिट सागौन की काष्ठ लगी है। लकड़ी पर सुंदर नक्कासी एवं कैनोपी में कपड़े का कार्य भी मनमोहक होगा। रथ में काष्ठ से बने 6 फिट के विशालकाय पहिया लगे हैं । रथ की उच्चता को हाइड्रोलिक लीवर के माध्यम से कम या ज्यादा किया जा सकता है।
श्री भगवान को 151 विशेष भोग अर्पण होंगे
रथयात्रा के दौरान, श्रद्धालु अपने हाथों से रस्सी द्वारा रथ को खींचेंगे। पूरे रथयात्रा के समय पारंपरिक हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन तथा प्रसाद वितरण होता रहेगा। अलग अलग स्थान पर भगवान की आरती की जाएगी। श्री भगवान को 151 विशेष भोग अर्पण होंगे। मंदिर के गृहस्थ भक्तों द्वारा 500 किलो खाजा प्रसाद बनाया गया है, जो यात्रा के समय जन साधारण में वितरित किए जाएंगे। भगवान जगन्नाथजी की संध्या आरती के साथ उत्सव का समापन होगा और उसके उपरांत 5000 भक्तों के लिए महाप्रसाद का आयोजन किया गया है।
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इस्कॉन संस्था द्वारा पूरे विश्व में रथयात्रा
आज विश्व के हर देश, हर बड़े शहरों में श्री जगन्नाथ रथयात्रा उत्सव मनाया जाता है। इसका विशेष श्रेय अंतराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक आचार्य अभय चरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद जी को जाता है। जिन्होंने पहली बार भारत के बाहर, अमेरिका के सानफ्रांसिस्को सहर में सन् 1967 में रथयात्रा उत्सव का आयोजन किया था। आज इस्कॉन संस्था द्वारा प्रति वर्ष विश्व भर में 1000 से भी अधिक शहरों में रथयात्रा उत्सव का आयोजन होता है।, जिसके माध्यम से भारत की वैदिक व आध्यात्मिक मूल्यों का प्रचार होता है।
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तीन माह में तैयार हुआ विशेष रथ
इस बार रथयात्रा हेतु एक भव्य रथ का निर्माण किया गया है। इसकी बनावट पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ भगवान के नंदीघोष रथ के आधार पर की गई है। भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी रथ में विराजमान होंगे। रथ का निर्माण तीन माह में किया गया है। रथ की ऊंचाई 27 फीट, चौड़ाई 17 फीट और लंबाई 24 फीट है। रथ का फाउंडेशन लोहे से एवं बेस और कैनोपी के लिए सागौन की काष्ठ का उपयोग किया गया है। जिसमें लगभग 2 टन लोहा और 50 घन फिट सागौन की काष्ठ लगी है। लकड़ी पर सुंदर नक्कासी एवं कैनोपी में कपड़े का कार्य भी मनमोहक होगा। रथ में काष्ठ से बने 6 फिट के विशालकाय पहिया लगे हैं । रथ की उच्चता को हाइड्रोलिक लीवर के माध्यम से कम या ज्यादा किया जा सकता है।
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श्री भगवान को 151 विशेष भोग अर्पण होंगे
रथयात्रा के दौरान, श्रद्धालु अपने हाथों से रस्सी द्वारा रथ को खींचेंगे। पूरे रथयात्रा के समय पारंपरिक हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन तथा प्रसाद वितरण होता रहेगा। अलग अलग स्थान पर भगवान की आरती की जाएगी। श्री भगवान को 151 विशेष भोग अर्पण होंगे। मंदिर के गृहस्थ भक्तों द्वारा 500 किलो खाजा प्रसाद बनाया गया है, जो यात्रा के समय जन साधारण में वितरित किए जाएंगे। भगवान जगन्नाथजी की संध्या आरती के साथ उत्सव का समापन होगा और उसके उपरांत 5000 भक्तों के लिए महाप्रसाद का आयोजन किया गया है।
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इस्कॉन संस्था द्वारा पूरे विश्व में रथयात्रा
आज विश्व के हर देश, हर बड़े शहरों में श्री जगन्नाथ रथयात्रा उत्सव मनाया जाता है। इसका विशेष श्रेय अंतराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक आचार्य अभय चरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद जी को जाता है। जिन्होंने पहली बार भारत के बाहर, अमेरिका के सानफ्रांसिस्को सहर में सन् 1967 में रथयात्रा उत्सव का आयोजन किया था। आज इस्कॉन संस्था द्वारा प्रति वर्ष विश्व भर में 1000 से भी अधिक शहरों में रथयात्रा उत्सव का आयोजन होता है।, जिसके माध्यम से भारत की वैदिक व आध्यात्मिक मूल्यों का प्रचार होता है।
