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MP News: कूनो अभयारण्य में चीतों को लाने की तैयारी तेज, दक्षिण अफ्रीका की टीम अगले हफ्ते करेगी पार्क का दौरा
Wed, 08 Jun 2022 10:00 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Wed, 08 Jun 2022 10:00 AM IST
सार
कूनो अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीका के चीतों को लाने की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। अगस्त तक कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका के चीते पहुंच सकते हैं। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका की एक टीम अगले सप्ताह कुनो पालपुर का दौरा करेगी।
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कूनो अभयारण्य में जल्द आएंगे दक्षिण अफ्रीका के जीते।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश के कूनो अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीका के चीतों को लाने की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। अगस्त तक कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका के चीते पहुंच सकते हैं। पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए 10 वर्ग किलोमीटर का एक विशेष घेरा तैयार किया गया है, जो कि जल्द ही दक्षिण अफ्रीका से लाए जा रहे करीब छह चीतों का घर होगा।
उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के साथ समझौता हो चुका है और कानूनी प्रकोष्ठ द्वारा इसकी समीक्षा की जा रही है। भारत में वहां से चीतों को लाने के लिए नामीबिया के साथ भी बातचीत चल रही थी, लेकिन शिकार से संबंधित कुछ मुद्दों पर मामला अटक गया है। उन्होंने कहा कि हम हर साल 8-10 चीतों को पेश करने की योजना बना रहे हैं और पांच साल की अवधि में संख्या को 50 तक ले जाने की योजना बनाई जा रही है।
चीतों के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका की एक टीम अगले सप्ताह कुनो पालपुर का दौरा करेगी। चीते को भारत वापस लाने की चर्चा 2009 में वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा शुरू की गई थी।चीता एकमात्र बड़ा मांसाहारी है, जो भारत से पूरी तरह से समाप्त हो गया है, मुख्य रूप से अधिक शिकार और निवास स्थान के नुकसान के कारण। सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेषज्ञ पैनल नियुक्त किया था, जिसने कुनो पालपुर को चीता पुनर्वास के संभावित स्थान के रूप में मंजूरी दी थी।
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उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के साथ समझौता हो चुका है और कानूनी प्रकोष्ठ द्वारा इसकी समीक्षा की जा रही है। भारत में वहां से चीतों को लाने के लिए नामीबिया के साथ भी बातचीत चल रही थी, लेकिन शिकार से संबंधित कुछ मुद्दों पर मामला अटक गया है। उन्होंने कहा कि हम हर साल 8-10 चीतों को पेश करने की योजना बना रहे हैं और पांच साल की अवधि में संख्या को 50 तक ले जाने की योजना बनाई जा रही है।
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चीतों के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका की एक टीम अगले सप्ताह कुनो पालपुर का दौरा करेगी। चीते को भारत वापस लाने की चर्चा 2009 में वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा शुरू की गई थी।चीता एकमात्र बड़ा मांसाहारी है, जो भारत से पूरी तरह से समाप्त हो गया है, मुख्य रूप से अधिक शिकार और निवास स्थान के नुकसान के कारण। सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेषज्ञ पैनल नियुक्त किया था, जिसने कुनो पालपुर को चीता पुनर्वास के संभावित स्थान के रूप में मंजूरी दी थी।
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