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MP News: मृत लोगों को जिंदा बताकर ली पॉलिसी, फर्जी बीमा से आठ करोड़ हड़पे, सरकारी कर्मचारियों समेत कई पर FIR

Thu, 23 Apr 2026 07:38 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 23 Apr 2026 07:38 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में फर्जी बीमा क्लेम के जरिए करीब 8 करोड़ रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू ने बीमा एजेंटों, नॉमिनी और पंचायत कर्मियों समेत कई लोगों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
 

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MP News: Policies declared dead people alive, eight crore rupees embezzled through fake insurance, FIR against
ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में बीमा धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के साथ करीब 8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में बीमा एजेंटों, पॉलिसीधारकों के नामांकित व्यक्तियों (नॉमिनी) और कुछ लोकसेवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू मुख्यालय भोपाल में दर्ज शिकायत के अनुसार, मंदसौर और उज्जैन क्षेत्र में कई लोगों ने सुनियोजित तरीके से बीमा कंपनी को चूना लगाने की साजिश रची। जांच में सामने आया कि गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों और पहले से मृत व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी कराई गईं। बाद में उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज लगाकर बीमा क्लेम किया गया। 
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फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराए
शिकायत के सत्यापन के दौरान पता चला कि कई मामलों में मृत व्यक्तियों को जीवित बताकर उनके नाम से पॉलिसी ली गई। इसके बाद उनकी मौत दर्शाते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए गए और बीमा राशि हासिल करने की कोशिश की गई। ईओडब्ल्यू जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कुछ पंचायत कर्मियों और लोकसेवकों की भूमिका भी संदिग्ध रही। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों को वैध दिखाने में मदद की। इनमें कुछ सरपंच, सचिव और सहायक सचिवों के नाम भी सामने आए हैं।
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27 बीमा पॉलिसियों की जांच गंभीर गड़बड़ी मिली
जांच में कुल 27 बीमा पॉलिसियों की पड़ताल की गई। इनमें से 19 मामलों में गंभीर बीमारी की जानकारी छिपाकर पॉलिसी ली गई, जबकि 8 मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर बीमा करवाकर क्लेम की कोशिश की गई। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में कई बीमा एजेंटों, नॉमिनी और संबंधित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इस संगठित फर्जीवाड़े से बीमा कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और आने वाले दिनों में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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