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MP News: मध्यप्रदेश में 40% स्टार्टअप्स की मालकिन हैं महिलाएं, हर महीने बन रहे हैं 150 स्टार्टअप्स
Sat, 14 Jan 2023 05:23 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 14 Jan 2023 05:23 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप 2 हजार 600 बन गए हैं। 100 से 150 नए मान्यता प्राप्त स्टार्टअप बनते जा रहे हें। पिछले साल नई नीति के चलते बहुत ही सकारात्मक वातावरण निर्मित हो रहा है। खास तौर पर महिलाओं से संबंधित स्टार्टअप 40 प्रतिशत से ज्यादा है।
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एमएसएमई सचिव पी नरहरि
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में स्टार्टअप्स की रफ्तार तेज हो गई है। अब तक दो हजार 600 स्टार्टअप्स मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। हर महीने 150 तक स्टार्टअप्स साकार हो रहे हैं। माहौल सकारात्मक है। यही वजह है कि 40% स्टार्टअप्स को महिला उद्यमी चला रही हैं। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के महत्व को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने कुछ साल पहले इसके लिए अलग से मंत्रालय बनाया था। और, अब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसका नतीजा है कि हाल ही में इंदौर में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। जब बड़ी कंपनियां आएंगी तो निश्चित तौर पर एमएसएमई के लिए भी माकूल माहौल बनेगा। इस विषय पर अमर उजाला ने मध्यप्रदेश में एमएसएमई विभाग के सचिव पी. नरहरि से विशेष बातचीत की।
जीआईएस में एमएसएमई सेक्टर में कितना निवेश आया?
पी. नरहरिः प्रदेश के विभिन्न सेक्टरों में 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है। इसे विभागीय के बजाय फार्मा, टेक्सटाइल, स्टार्टअप जैसे सेक्टर में बांटकर देखा जा सकता है। सरकार ने इंवेस्ट मध्य प्रदेश पोर्टल बनाया है। उस पोर्टल पर सभी निवेशकों को निवेश के साथ अपना उद्देश्य बताना होता है। प्रदेश में आए निवेश में निश्चित ही एमएसएमई का बहुत बड़ा रोल है। यह वैसे भी पूरे देश में कृषि के बाद रोजगार प्रदान करने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है। आकड़ों की स्पष्टता के बाद विभाग में आए निवेश की जानकारी दी जा सकेगी।
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सरकार की तरफ से निवेशकों को क्या-क्या सुविधा दी जा रही हैं?
पी. नरहरिः राज्य सरकार ने उद्यमियों की कठिनाइयों और परेशानियों को दूर करने के लिए नीति बनाई है। एमएसएमई विभाग में हम मशीनरी और प्लांट पर 40 प्रतिशत सब्सिडी देते हैं। आपने 10 करोड़ रुपये लगाए तो चार करोड़ रुपए तक चार किश्तों में हम इंसेंटिव देते हैं। प्रदेश से एक्सपोर्ट करने, रोजगार देने समेत अलग-अलग क्षेत्रों में भी इंसेंटिव देते है। इलेक्ट्रिसिटी, रोजगार निर्माण, पेटेंट से संबंधित अलग-अलग चीजों पर अतिरिक्त रियायतें दे रहे हैं।
निवेशकों को कोई दिक्कत ना हो, निवेश जमीन पर दिखे, इसके लिए सरकार क्या कर रही है?
पी. नरहरिः निवेशकों की दिक्कतों को दूर करने के लिए नीतियों का स्पष्ट होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया है कि उद्योग के लिए जमीन आवंटित हो गई तो तीन साल तक किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी। यह नीति उद्योग जगत और उद्योग लगाने वालों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इसे जल्द ही कानून बनाएंगे। कुछ जरूरत ही नहीं है तो दिक्कतें किस बात की?
सरप्लस इलेक्ट्रिसिटी होने के बावजूद उनके लिए बिजली दरें देश में केरल के बाद सबसे ज्यादा है?
पी. नरहरिः उद्यमियों को राहत देने के लिए सरकार हर स्तर पर काम कर रही है। प्रदेश में इलेक्ट्रिसिटी को लेकर दो तरह से रियायतें टैरिफ और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में दी जाती है। यह दोनों रियायतें प्रदेश के उद्यमियों को विभाग अनुसार दी जाती है। अगर बिजली की दरें दूसरे राज्यों से ज्यादा है तो हम इसका परीक्षण कराएंगे।
एमएसएमई में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार क्या करेगी?
पी. नरहरिः फरवरी में एमएसएमई दिवस मनाएंगे। दो दिवसीय कार्यक्रम होगा। हम अलग-अलग सेक्टर का सेशन रखेंगे। विचार और मंथन होगा। इससे निकलने वाले विचारों के अनुसार नीति बनाएंगे।
प्रदेश में स्टार्टअप नीति के लागू होने के बाद रिस्पांस कैसा है?
पी. नरहरिः अब तक मध्यप्रदेश में 2,600 स्टार्टअप मान्यता प्राप्त क रचुके हैं। हर महीने 100-150 नए स्टार्टअप्स मान्यता हासिल कर रहे हैं। पिछले साल नई नीति बनाई थी, जिससे सकारात्मक माहौल बना है। स्टार्टअप सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। यह बताता है कि हमारे मध्यप्रदेश में महिलाएं स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योग लगाने में आगे हैं और माहौल अच्छा है।
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के महत्व को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने कुछ साल पहले इसके लिए अलग से मंत्रालय बनाया था। और, अब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसका नतीजा है कि हाल ही में इंदौर में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। जब बड़ी कंपनियां आएंगी तो निश्चित तौर पर एमएसएमई के लिए भी माकूल माहौल बनेगा। इस विषय पर अमर उजाला ने मध्यप्रदेश में एमएसएमई विभाग के सचिव पी. नरहरि से विशेष बातचीत की।
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जीआईएस में एमएसएमई सेक्टर में कितना निवेश आया?
पी. नरहरिः प्रदेश के विभिन्न सेक्टरों में 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है। इसे विभागीय के बजाय फार्मा, टेक्सटाइल, स्टार्टअप जैसे सेक्टर में बांटकर देखा जा सकता है। सरकार ने इंवेस्ट मध्य प्रदेश पोर्टल बनाया है। उस पोर्टल पर सभी निवेशकों को निवेश के साथ अपना उद्देश्य बताना होता है। प्रदेश में आए निवेश में निश्चित ही एमएसएमई का बहुत बड़ा रोल है। यह वैसे भी पूरे देश में कृषि के बाद रोजगार प्रदान करने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है। आकड़ों की स्पष्टता के बाद विभाग में आए निवेश की जानकारी दी जा सकेगी।
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सरकार की तरफ से निवेशकों को क्या-क्या सुविधा दी जा रही हैं?
पी. नरहरिः राज्य सरकार ने उद्यमियों की कठिनाइयों और परेशानियों को दूर करने के लिए नीति बनाई है। एमएसएमई विभाग में हम मशीनरी और प्लांट पर 40 प्रतिशत सब्सिडी देते हैं। आपने 10 करोड़ रुपये लगाए तो चार करोड़ रुपए तक चार किश्तों में हम इंसेंटिव देते हैं। प्रदेश से एक्सपोर्ट करने, रोजगार देने समेत अलग-अलग क्षेत्रों में भी इंसेंटिव देते है। इलेक्ट्रिसिटी, रोजगार निर्माण, पेटेंट से संबंधित अलग-अलग चीजों पर अतिरिक्त रियायतें दे रहे हैं।
निवेशकों को कोई दिक्कत ना हो, निवेश जमीन पर दिखे, इसके लिए सरकार क्या कर रही है?
पी. नरहरिः निवेशकों की दिक्कतों को दूर करने के लिए नीतियों का स्पष्ट होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया है कि उद्योग के लिए जमीन आवंटित हो गई तो तीन साल तक किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी। यह नीति उद्योग जगत और उद्योग लगाने वालों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इसे जल्द ही कानून बनाएंगे। कुछ जरूरत ही नहीं है तो दिक्कतें किस बात की?
सरप्लस इलेक्ट्रिसिटी होने के बावजूद उनके लिए बिजली दरें देश में केरल के बाद सबसे ज्यादा है?
पी. नरहरिः उद्यमियों को राहत देने के लिए सरकार हर स्तर पर काम कर रही है। प्रदेश में इलेक्ट्रिसिटी को लेकर दो तरह से रियायतें टैरिफ और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में दी जाती है। यह दोनों रियायतें प्रदेश के उद्यमियों को विभाग अनुसार दी जाती है। अगर बिजली की दरें दूसरे राज्यों से ज्यादा है तो हम इसका परीक्षण कराएंगे।
एमएसएमई में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार क्या करेगी?
पी. नरहरिः फरवरी में एमएसएमई दिवस मनाएंगे। दो दिवसीय कार्यक्रम होगा। हम अलग-अलग सेक्टर का सेशन रखेंगे। विचार और मंथन होगा। इससे निकलने वाले विचारों के अनुसार नीति बनाएंगे।
प्रदेश में स्टार्टअप नीति के लागू होने के बाद रिस्पांस कैसा है?
पी. नरहरिः अब तक मध्यप्रदेश में 2,600 स्टार्टअप मान्यता प्राप्त क रचुके हैं। हर महीने 100-150 नए स्टार्टअप्स मान्यता हासिल कर रहे हैं। पिछले साल नई नीति बनाई थी, जिससे सकारात्मक माहौल बना है। स्टार्टअप सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। यह बताता है कि हमारे मध्यप्रदेश में महिलाएं स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योग लगाने में आगे हैं और माहौल अच्छा है।
