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MP News: एम्स में नई तकनीकी से प्रोस्टेट का इलाज,बिना चीरे,बिना भर्ती के मरीज होंगे ठीक,यौन क्षमता भी सुरक्षित

Fri, 24 Oct 2025 06:40 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 24 Oct 2025 06:40 PM IST
सार

भोपाल अम्स में अब प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (PAE) तकनीक से बढ़े हुए प्रोस्टेट (BPH) का उपचार शुरू किया गया है। यह प्रक्रिया पूरी तरह बिना सर्जरी, बिना भर्ती और बिना चीरे के की जाती है। यह प्रक्रिया अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन (AUA) और NICE यूके गाइडलाइंस द्वारा अनुमोदित है।

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MP News: New technology at AIIMS to treat prostate; patients will be cured without incision, without admission
एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स भोपाल ने मध्य प्रदेश में चिकित्सा विज्ञान की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में अब प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (PAE) तकनीक से बढ़े हुए प्रोस्टेट (BPH) का उपचार शुरू किया गया है। यह प्रक्रिया पूरी तरह बिना सर्जरी, बिना भर्ती और बिना चीरे के की जाती है। एम्स भोपाल के रेडियोलॉजी डायग्नोसिस विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजेश मलिक ने बताया कि यह प्रक्रिया अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन (AUA) और NICE यूके गाइडलाइंस द्वारा अनुमोदित है। इस तकनीक से मरीज तेजी से स्वस्थ होते हैं, उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में कम समय लगता है और यौन क्षमता पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
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क्या है प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (PAE)?
यह एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट प्रोस्टेट की धमनियों में सूक्ष्म कण (माइक्रोपार्टिकल्स) प्रवाहित करते हैं। इससे प्रोस्टेट की रक्त आपूर्ति घट जाती है, जिससे उसका आकार स्वाभाविक रूप से सिकुड़ जाता है। यह प्रक्रिया कलाई या जांघ की धमनी में केवल एक सूक्ष्म छेद (पिनहोल) के माध्यम से की जाती है और इसमें सामान्य एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं होती केवल स्थानीय सुन्नीकरण पर्याप्त होता है।
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65 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी
एम्स भोपाल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सेंटर में 65 वर्षीय एक मरीज, जो बार-बार पेशाब आने, प्रवाह में रुकावट और असुविधा जैसी दिक्कतों से परेशान था, पर यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। स्वास्थ्य कारणों से वह पारंपरिक सर्जरी के योग्य नहीं थे। डॉ. अमन कुमार की टीम ने यह प्रक्रिया की, जिसमें किसी प्रकार की जटिलता नहीं आई। कुछ ही हफ्तों में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया और सामान्य जीवन में लौट आया।
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प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (PAE) के मुख्य लाभ

- बिना सर्जरी, बिना भर्ती: अधिकांश मरीज प्रक्रिया के बाद उसी दिन घर जा सकते हैं।
- बिना चीरे, बिना टांके: केवल एक सूक्ष्म पिनहोल से प्रक्रिया पूरी होती है।
- सामान्य एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं: वृद्ध और हृदय/मधुमेह के मरीजों के लिए भी सुरक्षित।
- यौन क्षमता सुरक्षित: यह प्रक्रिया स्तंभन या स्खलन पर कोई प्रभाव नहीं डालती।
- तेज रिकवरी: कुछ ही दिनों में मरीज अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।



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प्रदेशवासियों के लिए बड़ी राहत
एम्स भोपाल का इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ट्रीटमेंट सेंटर अब प्रदेश में इस तकनीक को अपनाने वाला अग्रणी संस्थान बन गया है। डॉ. मलिक ने बताया कि अब प्रदेश के मरीजों को इस अत्याधुनिक तकनीक के लिए दिल्ली या मुंबई जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एम्स भोपाल में यह सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध है। यह पहल एम्स भोपाल की एडवांस लेकिन अफोर्डेबल हेल्थकेयर की नीति का हिस्सा है, जिसके तहत संस्थान लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर मरीजों के इलाज को और अधिक सुरक्षित, आरामदायक और परिणामदायक बना रहा है।


 
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