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MP News: जिनेवा में सांसद सुमेर सिंह बोले-डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा के लिए भारत प्रतिबद्ध
Sat, 25 Oct 2025 07:40 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 25 Oct 2025 07:40 PM IST
सार
भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने जिनेवा में अंतर संसदीय संघ के 151वें सम्मेलन में डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर भारत का दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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राज्यसभा सांसद सुमरे सिंह सोलंकी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश से भाजपा सांसद और प्रदेश महामंत्री डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने जिनेवा में आयोजित अंतर संसदीय संघ (IPU) के 151वें सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डिजिटल युग में बच्चों के अधिकारों पर भारत का मजबूत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही क्षेत्रों में सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. सोलंकी ने सभी राष्ट्रों से आह्वान किया कि डिजिटल युग बच्चों के लिए अवसरों का स्रोत बने, न कि डर का।
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सम्मेलन में डॉ. सोलंकी ने ‘डिजिटल वातावरण में बच्चों के अधिकार’ विषय पर भारत की नीतियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट-2012, आईटी एक्ट-2000 और भारतीय न्याय संहिता-2023 जैसे कानून साइबर अपराधों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और टोल-फ्री हेल्पलाइन-1930 जैसे कदम साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और ‘मिशन वात्सल्य’ जैसी योजनाएं बच्चों के कल्याण के लिए समर्पित हैं।
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‘संसद में एआई’ कार्यशाला में डॉ. सोलंकी ने भारत के ‘एआई फॉर ऑल’ विजन को प्रस्तुत किया, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर आधारित है। उन्होंने भारत को ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GPAI) का संस्थापक सदस्य और G20 अध्यक्षता के दौरान एआई पर वैश्विक सहमति बनाने वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि भारत का एआई दृष्टिकोण ‘लोग, प्रकृति और प्रगति’ के सिद्धांतों पर टिका है।
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डॉ. सोलंकी ने बाल अधिकारों और गोद लेने की प्रक्रियाओं पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन और हेग कन्वेंशन का पालन करता है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट-2015 और एडॉप्शन रेगुलेशंस-2022 के तहत गोद लेने की प्रक्रियाएं पारदर्शी और सुरक्षित हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 39 (एफ) बच्चों को तस्करी और शोषण से बचाते हैं।
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डॉ. सोलंकी ने भारत-बेलारूस और भारत-यूक्रेन के बीच संसदीय सहयोग बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय चर्चाओं में भी हिस्सा लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद अपराजिता सारंगी, कमलजीत सेहरावत, संजय जायसवाल और सस्मित पात्रा शामिल थे। यह सम्मेलन भारत के वैश्विक मंच पर बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल प्रगति के प्रति समर्पण को रेखांकित करता है।
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सम्मेलन में डॉ. सोलंकी ने ‘डिजिटल वातावरण में बच्चों के अधिकार’ विषय पर भारत की नीतियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट-2012, आईटी एक्ट-2000 और भारतीय न्याय संहिता-2023 जैसे कानून साइबर अपराधों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और टोल-फ्री हेल्पलाइन-1930 जैसे कदम साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और ‘मिशन वात्सल्य’ जैसी योजनाएं बच्चों के कल्याण के लिए समर्पित हैं।
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डॉ. सोलंकी ने बाल अधिकारों और गोद लेने की प्रक्रियाओं पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन और हेग कन्वेंशन का पालन करता है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट-2015 और एडॉप्शन रेगुलेशंस-2022 के तहत गोद लेने की प्रक्रियाएं पारदर्शी और सुरक्षित हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 39 (एफ) बच्चों को तस्करी और शोषण से बचाते हैं।
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