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MP News: नर्सिंग काउंसिल ने जिन्हें सौंप दी 16 शाखाएं, वह माथुर छोड़ गए संस्था, दिया इस्तीफा, जानें पूरा मामला

Fri, 25 Oct 2024 04:57 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 25 Oct 2024 04:57 PM IST
सार

सूत्रों का कहना है कि मप्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन कौंसिल में प्रशासकीय अधिकारी के पद पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी मनमोहन माथुर ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है।

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MP News Manmohan Mathur to whom Nursing Council handed over 16 branches left organization and resigned
खबर का असर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नर्सिंग महाघोटाला मध्यप्रदेश के माथे की कालिख बना खड़ा ही है। अब इसके अगुआ नर्सिंग काउंसिल अपनी रोजाना की गोंडोबल के चलते सुर्खियां नहीं छोड़ रहा है। नियम विरुद्ध रजिस्ट्रार की नियुक्ति और रजिस्ट्रार की मनमानी भरी कार्य विभाजन नीति के बाद अब एक नया घटनाक्रम हो गया है। विभाग में आउटसोर्स कर्मचारी को एक साथ 16 शाखाओं की जिम्मेदारी सौंपे को तीन दिन ही गुजरे हैं और इस कर्मचारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। अमर उजाला ने इस नियम विरुद्ध कार्य विभाजन को लेकर विस्तृत समाचार प्रकाशित किया था।

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सूत्रों का कहना है कि मप्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन कौंसिल में प्रशासकीय अधिकारी के पद पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी मनमोहन माथुर ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। रजिस्ट्रार को भेजे पत्र में माथुर ने लिखा है कि वे अपनी सेवाएं निरंतर रखने में असमर्थ हैं। उन्होंने चार नवंबर से कार्यमुक्त रहेंगे। वर्ष 2022 से कौंसिल में निरंतर सेवाएं देने वाले माथुर ने खुद को ईमानदार और सेवाभावी निरूपित करते हुए सेवाएं निरंतर रखने में खुद को असमर्थ बताया है।
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मिली थी 16 शाखाओं की जिम्मेदारी 
पिछले सप्ताह ही रजिस्ट्रार अनीता चांद द्वारा किए गए विभागीय कार्य विभाजन किया था। इस दौरान प्रशासकीय अधिकारी मनमोहन माथुर को विभाग के करीब 16 विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नियम विरुद्ध लिए गए इस फैसले को लेकर रजिस्ट्रार अनीता चांद को कई स्तर पर जवाब देना पड़ गया है। संभवतः माथुर का इस्तीफा इसी खींचतान का हिस्सा माना जा रहा है।
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नर्सिंग घोटाले की कड़ी हैं माथुर
सूत्रों का कहना है कि मप्र में बड़े घोटाले में एक कड़ी प्रशासकीय अधिकारी मनमोहन माथुर को भी माना जा रहा है। करीब डेढ़ दशक से वे कौंसिल से जुड़े हुए हैं। वैष्णव हाउस कीपिंग के मार्फत कौंसिल से जुड़े माथुर के खिलाफ वर्ष 2016 में गड़बड़ियों की कई शिकायतें हुईं थीं। इन शिकायतों से बचने के लिए माथुर ने कौंसिल से नाता तोड़ लिया। लेकिन वर्ष 2018 में जब यह मामला कुछ शांत हुआ तो वे दोबारा कौंसिल में आ जमे और यहां प्रशासकीय अधिकारी के पद पर आसीन हो गए। यह भी उल्लेखनीय है कि विधि कार्यों की जिम्मेदारी सम्हालने वाले माथुर के पास विधि से जुड़ी कोई शैक्षणिक डिग्री भी नहीं है।


गड़बड़ी की एक और दास्तां 
आउटसोर्स कर्मचारी मनमोहन माथुर ने अपने इस्तीफा में उल्लेखित किया है कि कौंसिल के लेखपाल राहुल सक्सेना के खिलाफ एक विभागीय जांच प्रचलन में है। विभाग की स्थापना शाखा का जिम्मा भी वर्तमान में राहुल सक्सेना के पास ही है। ऐसे में उनके खिलाफ चल रही जांच की नस्ती भी उनके पास ही है। किसी व्यक्ति के खिलाफ प्रचलित जांच की फाइल भी उसी कर्मचारी के सुपुर्द होना न तो नियम संगत है और न ही इसको शासकीय प्रावधानों के अनुरूप माना जा सकता है। 

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