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MP News: प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित हुई मध्यप्रदेश की 'साइबर तहसील' पहल
Mon, 21 Apr 2025 06:59 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 21 Apr 2025 06:59 AM IST
सार
लोक सेवा दिवस 2025 के अवसर पर मध्यप्रदेश के राजस्व विभाग की 'साइबर तहसील' पहल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2023 से सम्मानित किया गया। इस अभिनव डिजिटल नवाचार ने भूमि नामांतरण जैसी जटिल प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित और नागरिकों के लिए सरल बना दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण बनी है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जा रही है।
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दिल्ली में पुरस्कार लेते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोक सेवा दिवस 2025 के अवसर पर मध्यप्रदेश की अभिनव 'साइबर तहसील' पहल को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2023 से नवाजा गया है। यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने यह सम्मान प्राप्त किया। 'साइबर तहसील' पहल ने भूमि नामांतरण की पारंपरिक प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए इसे पूरी तरह डिजिटल, सुविधाजनक और नागरिकों के अनुकूल बना दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस पहल के अंतर्गत अब तक 1.5 लाख से अधिक प्रकरणों का प्रभावी और त्वरित निपटारा किया जा चुका है। पूर्व में जहां नामांतरण प्रक्रिया में औसतन 70 दिन लगते थे, अब यह प्रक्रिया मात्र 20 दिनों में पूरी हो रही है। यह पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया है, जिसमें पब्लिक नोटिस, आपत्तियाँ, और प्रमाणित आदेश डिजिटल माध्यमों – एसएमएस, ईमेल, और व्हाट्सएप के ज़रिए नागरिकों को मिलते हैं। इससे लोगों को तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।
निष्पक्षता और पारदर्शिता को मिली नई दिशा
साइबर तहसील में प्रकरणों का आवंटन सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के जरिए राउंड-रॉबिन पद्धति से किया जाता है, जिससे निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित होता है। अब तहसील कार्यालयों पर नामांतरण प्रकरणों का कार्यभार 25% तक कम हो गया है, जिससे क्षेत्रीय तहसीलदार जटिल प्रकरणों पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
डिजिटल एकीकरण बना रहा है काम को और प्रभावी
आरसीएमएस, वेब जीआईएस, संपदा, और सारा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एकीकरण से पूरी प्रणाली और अधिक सरल, तेज़ और पारदर्शी बनी है। वर्तमान में प्रदेश की 13 साइबर तहसीलें लगभग 1,364 न्यायालयों का प्रबंधन कर रही हैं।
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राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही सराहना
'साइबर तहसील' को न सिर्फ प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। आंध्रप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों ने इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई है। इसे लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) और भूमि संवाद कार्यक्रमों में भी श्रेष्ठ नवाचार के रूप में प्रदर्शित किया गया है।
इस अवसर पर प्रमुख राजस्व आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव, उप राजस्व आयुक्त अलका सिंह वामनकर और उनकी तकनीकी टीम को भी आमंत्रित किया गया था, जिनकी अहम भूमिका से यह नवाचार संभव हो पाया।
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निष्पक्षता और पारदर्शिता को मिली नई दिशा
साइबर तहसील में प्रकरणों का आवंटन सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के जरिए राउंड-रॉबिन पद्धति से किया जाता है, जिससे निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित होता है। अब तहसील कार्यालयों पर नामांतरण प्रकरणों का कार्यभार 25% तक कम हो गया है, जिससे क्षेत्रीय तहसीलदार जटिल प्रकरणों पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
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डिजिटल एकीकरण बना रहा है काम को और प्रभावी
आरसीएमएस, वेब जीआईएस, संपदा, और सारा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एकीकरण से पूरी प्रणाली और अधिक सरल, तेज़ और पारदर्शी बनी है। वर्तमान में प्रदेश की 13 साइबर तहसीलें लगभग 1,364 न्यायालयों का प्रबंधन कर रही हैं।
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राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही सराहना
'साइबर तहसील' को न सिर्फ प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। आंध्रप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों ने इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई है। इसे लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) और भूमि संवाद कार्यक्रमों में भी श्रेष्ठ नवाचार के रूप में प्रदर्शित किया गया है।
इस अवसर पर प्रमुख राजस्व आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव, उप राजस्व आयुक्त अलका सिंह वामनकर और उनकी तकनीकी टीम को भी आमंत्रित किया गया था, जिनकी अहम भूमिका से यह नवाचार संभव हो पाया।
