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MP News: RGPV में करोड़ों का गबन, कुलपति, निलंबित रजिस्ट्रार, वित्त नियंत्रक सहित पांच के खिलाफ एफआईआर
Sun, 03 Mar 2024 10:51 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 03 Mar 2024 10:51 PM IST
सार
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी में 19.48 करोड़ निजी खाते में तथा 25-25 करोड़ की चार एफडी फर्जी दस्तावेज से निजी बैंक में रखने का मामला में कार्यवाही। फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण एक्ट के तहत मामला एफआईआर दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने वित्त शाखा के सभी अधिकारियों को हटाया, उच्च स्तरीय जांच के दिए निर्देश दिए।
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भोपाल आरजीपीवी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में करोड़ों रुपये के गबन के मामले में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। 19 करोड़ रुपये निजी बैंक खाते में भेजने और 25-25 करोड़ की चार एफडी आरबीएल निजी बैंक में फर्जी दस्तावेज तैयार कर रखने सहित अन्य वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। मामले में आरजीपीवी के कुलपति प्रो. सुनील कुमार, निलंबित रजिस्ट्रार आरएस राजपूत, वित्त नियंत्रक ऋषिकेश वर्मा, लाभार्थी मयंक कुमार और दलित संघ सोहागपुर और अन्य के खिलाफ गांधी नगर थाने में नामजद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरजीपीवी के रजिस्ट्रार डॉ. मोहन सेन की शिकायत पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 120 बी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(ए) और 13 (2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। कुलपति, निलंबित रजिस्ट्रार, वित्त नियंत्रक और दो लाभार्थियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है, बाकी अन्य हैं। जांच के बाद नाम एफआईआर में जोड़े जाएंगे।
सीएम से मिले उच्च शिक्षा मंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आज लखनऊ से लौटकर भोपाल पहुंचने पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार उनसे मिलने पहुंचे और आरजीपीवी मामले की पूरी जानकारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के वित्त शाखा के सभी अधिकारियों को हटाकर उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही थाने में मामला दर्ज किया गया है।
अभाविप कार्यकर्ता दो दिन से धरने पर थे। जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ता दो दिन से आरजीपीवी कैंपस में इसी आर्थिक अनियमितता के मामले में कार्रवाई करने को लेकर धरना दे रहे थे। रविवार सुबह प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी विवि कैम्पस पहुंचकर धरना दे रहे अभाविप के कार्यकर्ताओं से मिले थे।
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जिन्होंने भी चेक में साइन किए सभी आरोपी बनेंगे
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि इस मामले में केवल निलंबित रजिस्ट्रार राजपूत ही नहीं, जिन-जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने चेक पर हस्ताक्षर किए हैं और विश्वविद्यालय की धनराशि को निजी बैंक खातों और निजी बैंक में रखने के आपराधिक षड्यंत्र में शामिल हैं, उन सबके नाम एफआईआर में शामिल किए जाएंगे। किसी भी दोषी पाए जाने वले अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
फर्जी बैंक स्टेटमेंट से पिपरिया के बैंक में कराई एफडी
एफआईआर के अनुसार एक निजी बैंक की पिपरिया शाखा में आरजीपीवी के 100 करोड़ रुपये की एफडी बनवाकर जमा किए गए हैं। जिस आरबीएल (निजी बैंक) के शाखा में रुपये जमा किए गए हैं, वह बैंक की बहुत छोटी शाखा है। लेकिन आरजीपीवी के कुलपति और तत्कालीन रजिस्ट्रार ने बैंक के फर्जी स्टेटमेंट तैयार करवाकर बैंक को फायदा पहुंचाने के लिए विवि की राशि के 25-25 करोड़ की चार एफडी बनवाकर पिपरिया शाखा में जमा कराई। इसके साथ ही एक एनजीओ को भी अनियमितता बरतते हुए करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
गौरतलब है कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी में करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर अभाविप के कार्यकर्ता बीते दो दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। परिषद के छात्रों ने शनिवार रात को प्रदर्शन किया और अधिकारी/कर्मचारियों को तीन घंटे तक बंधक बना कर रखा। इसमें यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलसचिव, रजिस्ट्रार समेत दो दर्जन से अधिक अधिकारी/कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने कुलपति की नेम प्लेट उखाड़ दी। रविवार सुबह भी अभाविप के कार्यकर्ता कुलपति के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। वह कुलपति प्रोफेसर सुनील कुमार को हटाने की मांग पर अड़े हुए थे और वह जांच समिति की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे।
जांच रिपोर्ट के बाद कुलसचिव निलंबित
तकनीकी शिक्षा विभाग ने शिकायत के बाद तीन सदस्यीय समिति जांच के लिए गठित की थी। समिति ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट दी। इसमें यूनिवर्सिटी के 9.48 करोड़ रुपए आपराधिक षड्यंत्र कर निजी खातों में ट्रांसफर करने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलसचिव डॉ. आरएस राजपूत समेत संबंधित शाखा के तत्कालीन अधिकारी/कर्मचारियों को भी निलंबित करने का निर्णय लिया है।
सख्त कार्रवाई होगी : सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सोशल साइट एक्स पर लिखा- मेरे संज्ञान में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय में चल रही आर्थिक अनियमितता का प्रकरण सामने आया है। मैंने त्वरित एफआईआर और विश्वविद्यालय की वित्त शाखा में पदस्थ सभी अधिकारियों को हटाकर उच्च स्तरीय समिति द्वारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
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सीएम से मिले उच्च शिक्षा मंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आज लखनऊ से लौटकर भोपाल पहुंचने पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार उनसे मिलने पहुंचे और आरजीपीवी मामले की पूरी जानकारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के वित्त शाखा के सभी अधिकारियों को हटाकर उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही थाने में मामला दर्ज किया गया है।
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अभाविप कार्यकर्ता दो दिन से धरने पर थे। जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ता दो दिन से आरजीपीवी कैंपस में इसी आर्थिक अनियमितता के मामले में कार्रवाई करने को लेकर धरना दे रहे थे। रविवार सुबह प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी विवि कैम्पस पहुंचकर धरना दे रहे अभाविप के कार्यकर्ताओं से मिले थे।
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जिन्होंने भी चेक में साइन किए सभी आरोपी बनेंगे
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि इस मामले में केवल निलंबित रजिस्ट्रार राजपूत ही नहीं, जिन-जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने चेक पर हस्ताक्षर किए हैं और विश्वविद्यालय की धनराशि को निजी बैंक खातों और निजी बैंक में रखने के आपराधिक षड्यंत्र में शामिल हैं, उन सबके नाम एफआईआर में शामिल किए जाएंगे। किसी भी दोषी पाए जाने वले अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
फर्जी बैंक स्टेटमेंट से पिपरिया के बैंक में कराई एफडी
एफआईआर के अनुसार एक निजी बैंक की पिपरिया शाखा में आरजीपीवी के 100 करोड़ रुपये की एफडी बनवाकर जमा किए गए हैं। जिस आरबीएल (निजी बैंक) के शाखा में रुपये जमा किए गए हैं, वह बैंक की बहुत छोटी शाखा है। लेकिन आरजीपीवी के कुलपति और तत्कालीन रजिस्ट्रार ने बैंक के फर्जी स्टेटमेंट तैयार करवाकर बैंक को फायदा पहुंचाने के लिए विवि की राशि के 25-25 करोड़ की चार एफडी बनवाकर पिपरिया शाखा में जमा कराई। इसके साथ ही एक एनजीओ को भी अनियमितता बरतते हुए करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
गौरतलब है कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी में करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर अभाविप के कार्यकर्ता बीते दो दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। परिषद के छात्रों ने शनिवार रात को प्रदर्शन किया और अधिकारी/कर्मचारियों को तीन घंटे तक बंधक बना कर रखा। इसमें यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलसचिव, रजिस्ट्रार समेत दो दर्जन से अधिक अधिकारी/कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने कुलपति की नेम प्लेट उखाड़ दी। रविवार सुबह भी अभाविप के कार्यकर्ता कुलपति के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। वह कुलपति प्रोफेसर सुनील कुमार को हटाने की मांग पर अड़े हुए थे और वह जांच समिति की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे।
जांच रिपोर्ट के बाद कुलसचिव निलंबित
तकनीकी शिक्षा विभाग ने शिकायत के बाद तीन सदस्यीय समिति जांच के लिए गठित की थी। समिति ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट दी। इसमें यूनिवर्सिटी के 9.48 करोड़ रुपए आपराधिक षड्यंत्र कर निजी खातों में ट्रांसफर करने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलसचिव डॉ. आरएस राजपूत समेत संबंधित शाखा के तत्कालीन अधिकारी/कर्मचारियों को भी निलंबित करने का निर्णय लिया है।
सख्त कार्रवाई होगी : सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सोशल साइट एक्स पर लिखा- मेरे संज्ञान में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय में चल रही आर्थिक अनियमितता का प्रकरण सामने आया है। मैंने त्वरित एफआईआर और विश्वविद्यालय की वित्त शाखा में पदस्थ सभी अधिकारियों को हटाकर उच्च स्तरीय समिति द्वारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
