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MP News: यूरेशियन वल्चर को रायसेन वन मंडल के सरार बीट में छोड़ा गया
Sat, 29 Mar 2025 10:54 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 29 Mar 2025 10:54 PM IST
सार
रायसेन वन मंडल के तहत शनिवार को एक यूरेशियन वल्चर (गिद्ध की प्रजाति) को हलाली बांध के पास सफलतापूर्वक मुक्त किया गया। यह वल्चर सतना वन मंडल से रेस्क्यू कर मुकुंदपुर रेस्क्यू सेंटर और वन विहार में उपचार के बाद स्वस्थ हुआ था।
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सरार बीट में होगा वल्चर रेस्टारेंट का निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वन मंडल रायसेन अंतर्गत शनिवार को एक यूरेशियन वल्चर (गिद्ध की प्रजाति) को हलाली बांध के पास सफलतापूर्वक मुक्त किया गया। इस वल्चर को सतना वन मंडल से रेस्क्यू कर मुकुंदपुर रेस्क्यू सेंटर और वन विहार में उपचार के लिए लाया गया था। स्वस्थ होने पर उसे रिलीज किया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे ने बताया कि रायसेन वन मंडल के सरार बीट में गिद्धों के लिए अनुकूल परिस्थिति, वातावरण और उनकी संख्या को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर वल्चर को छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि इसी स्थल पर वल्चर रेस्टोरेंट का निर्माण करने की तैयारी शासन स्तर पर चल रही है। आगामी दिनों में भोपाल स्थित वल्चर ब्रीडिंग सेंटर के 6 वल्चर को भी इसी स्थान पर छोड़ा जाएगा।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने कहा कि डायक्लोफेनेक, निमेसुलाइड, कीटोप्रोफेन और एसेक्लोफेनेक दवाइयां जो पशुओं के इलाज के लिए दी जाती थीं, इन दवाइयों को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है और इनका उपयोग गैर कानूनी भी है। उन्होंने कहा कि गिद्धों की संख्या में जो भारी गिरावट आई, वह इन्हीं दवाओं के कारण थी। मुख्य वन्य-प्राणी अभिरक्षक शुभरंजन सेन ने बताया कि कर्मचारियों को दवाइयों का एक सैम्पल भी प्रदाय किया है। इन दवाइयों से गिद्धों को कोई नुकसान नहीं होगा।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे ने बताया कि रायसेन वन मंडल के सरार बीट में गिद्धों के लिए अनुकूल परिस्थिति, वातावरण और उनकी संख्या को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर वल्चर को छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि इसी स्थल पर वल्चर रेस्टोरेंट का निर्माण करने की तैयारी शासन स्तर पर चल रही है। आगामी दिनों में भोपाल स्थित वल्चर ब्रीडिंग सेंटर के 6 वल्चर को भी इसी स्थान पर छोड़ा जाएगा।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने कहा कि डायक्लोफेनेक, निमेसुलाइड, कीटोप्रोफेन और एसेक्लोफेनेक दवाइयां जो पशुओं के इलाज के लिए दी जाती थीं, इन दवाइयों को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है और इनका उपयोग गैर कानूनी भी है। उन्होंने कहा कि गिद्धों की संख्या में जो भारी गिरावट आई, वह इन्हीं दवाओं के कारण थी। मुख्य वन्य-प्राणी अभिरक्षक शुभरंजन सेन ने बताया कि कर्मचारियों को दवाइयों का एक सैम्पल भी प्रदाय किया है। इन दवाइयों से गिद्धों को कोई नुकसान नहीं होगा।
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