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MP News: CM यादव बोले- विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया की बटालियन बनेगी, भर्ती का प्रशिक्षण देंगे
Mon, 23 Sep 2024 08:06 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 23 Sep 2024 08:06 PM IST
सार
जनजातीय कार्य विभाग की शौर्य संकल्प योजना के अंतर्गत प्रदेश में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह बैगा, भारिया एवं सहरिया के लिए अलग से बटालियन गठित की जाएगी। साथ ही इस समूह के इच्छुक युवाओं को पुलिस, सेना एवं होमगार्ड में भर्ती कराने के लिए इन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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सीएम मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के युवाओं को रोजगार एवं सेवा से जोड़ने के लिए पीवीटीजी बटालियन बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजाति पीवीटीजी समूह में आती हैं। इसी प्रकार आर्मड फोर्सेस में भर्ती के लिए प्रशिक्षण योजना में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के युवाओं को नेवी, आर्मी, एयरफोर्स, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, पुलिस, होमगार्ड एवं अन्य निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती कराने के लिए इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
जनजातीय कार्य विभाग में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए संचालक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के विकास के लिए योजना बनाने एवं इनका क्रियान्वयन के लिए एजेंसी भी कार्यरत है। यह एजेंसी सतत रूप से योजनाओं के अमल की मॉनिटरिंग भी करती है। एजेंसी का कार्यक्षेत्र प्रदेश के 15 जिलों में हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकरण एजेंसियों का गठन भी किया गया। हर प्राधिकरण में विशेष पिछड़ी जनजातीय वर्ग के व्यक्ति को अध्यक्ष तथा तीन अशासकीय सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए योजना बनाने एवं योजनाओं का क्रियान्वयन करने के लिए प्रदेश में 11 प्राधिकरण कार्यरत हैं। बैगा विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में 6 जिले (मंडला, शहडोल, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी एवं अनूपपुर) आते हैं। भारिया विकास प्राधिकरण में (पातालकोट) के कार्यक्षेत्र में छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के पातालकोट क्षेत्र के 12 गांव आते हैं। सहरिया विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में 8 जिले (श्योपुरकलां, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, ग्वालियर एवं दतिया) आते हैं।
1500 रुपये प्रतिमाह दी जा रही है आहार अनुदान राशि
राज्य सरकार विशेष पिछडी जनजातीय समूहों को आहार अनुदान भी दिया जाता है। इन समूहों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार द्वारा बैगा, भारिया एवं सहरिया परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल से 31 अगस्त 2024 तक 2 लाख 18 हजार 563 हितग्राहियों को कुल 180 करोड़ रुपये से अधिक आहार अनुदान राशि दी जा चुकी है।
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जनजातीय कार्य विभाग में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए संचालक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के विकास के लिए योजना बनाने एवं इनका क्रियान्वयन के लिए एजेंसी भी कार्यरत है। यह एजेंसी सतत रूप से योजनाओं के अमल की मॉनिटरिंग भी करती है। एजेंसी का कार्यक्षेत्र प्रदेश के 15 जिलों में हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकरण एजेंसियों का गठन भी किया गया। हर प्राधिकरण में विशेष पिछड़ी जनजातीय वर्ग के व्यक्ति को अध्यक्ष तथा तीन अशासकीय सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए योजना बनाने एवं योजनाओं का क्रियान्वयन करने के लिए प्रदेश में 11 प्राधिकरण कार्यरत हैं। बैगा विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में 6 जिले (मंडला, शहडोल, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी एवं अनूपपुर) आते हैं। भारिया विकास प्राधिकरण में (पातालकोट) के कार्यक्षेत्र में छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के पातालकोट क्षेत्र के 12 गांव आते हैं। सहरिया विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में 8 जिले (श्योपुरकलां, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, ग्वालियर एवं दतिया) आते हैं।
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1500 रुपये प्रतिमाह दी जा रही है आहार अनुदान राशि
राज्य सरकार विशेष पिछडी जनजातीय समूहों को आहार अनुदान भी दिया जाता है। इन समूहों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार द्वारा बैगा, भारिया एवं सहरिया परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल से 31 अगस्त 2024 तक 2 लाख 18 हजार 563 हितग्राहियों को कुल 180 करोड़ रुपये से अधिक आहार अनुदान राशि दी जा चुकी है।
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