{"_id":"68388518c8476b287a02fe12","slug":"mp-news-appeal-for-eco-friendly-sacrifice-on-bakrid-sanskriti-bachao-manch-urged-muslim-religious-leaders-2025-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: बकरीद पर इको-फ्रेंडली कुर्बानी की अपील, संस्कृति बचाओ मंच ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से किया आग्रह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: बकरीद पर इको-फ्रेंडली कुर्बानी की अपील, संस्कृति बचाओ मंच ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से किया आग्रह
Thu, 29 May 2025 09:32 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 29 May 2025 09:32 PM IST
सार
संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की है कि इस वर्ष बकरीद पर पारंपरिक पशु बलि के स्थान पर मिट्टी से बने प्रतीकात्मक बकरों की इको-फ्रेंडली कुर्बानी दी जाए।
विज्ञापन
मिट्टी के इको फ्रेंडली बकरे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल के संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने आगामी बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर्व के मद्देनजर मुस्लिम धर्मगुरुओं से इको-फ्रेंडली कुर्बानी की अपील की है। उन्होंने कहा है कि इस बार बकरीद पर मिट्टी से बने बकरों की प्रतीकात्मक कुर्बानी दी जानी चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और पशु कल्याण को बढ़ावा मिल सके। चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज इको-फ्रेंडली होली, दीपावली पर कम पटाखे और मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं जैसे पर्यावरण हितैषी उपाय अपना रहा है, तब बकरीद पर भी प्रतीकात्मक और पर्यावरण-मित्र कुर्बानी की दिशा में पहल की जानी चाहिए। तिवारी ने कहा कि यदि मिट्टी से बने बकरों की कुर्बानी दी जाए तो खून धोने में बर्बाद होने वाला लाखों गैलन पानी बचेगा, प्रदूषण कम होगा और पशु हत्या से बचा जा सकेगा।
पशु क्रूरता कानून की समानता की मांग
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पशु क्रूरता अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act) के अंतर्गत जब अन्य पशुओं के साथ क्रूरता पर कार्रवाई की जाती है, तो बकरी की बलि को इससे छूट क्यों दी जाती है? उन्होंने सवाल उठाया कि "क्या बकरा पशु नहीं होता? यदि अन्य जानवरों के साथ क्रूरता पर FIR दर्ज होती है, तो इस मामले में अलग मानदंड क्यों?। उन्होंने कहा कि बकरीद से एक महीना पहले बच्चे बकरों को पालते हैं, उन्हें काजू, किशमिश, बादाम तक खिलाते हैं और फिर उसी को मारने को कहा जाता है। इससे बच्चों के मन में हिंसा की प्रवृत्ति उत्पन्न हो सकती है।
विज्ञापन
पशु क्रूरता कानून की समानता की मांग
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पशु क्रूरता अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act) के अंतर्गत जब अन्य पशुओं के साथ क्रूरता पर कार्रवाई की जाती है, तो बकरी की बलि को इससे छूट क्यों दी जाती है? उन्होंने सवाल उठाया कि "क्या बकरा पशु नहीं होता? यदि अन्य जानवरों के साथ क्रूरता पर FIR दर्ज होती है, तो इस मामले में अलग मानदंड क्यों?। उन्होंने कहा कि बकरीद से एक महीना पहले बच्चे बकरों को पालते हैं, उन्हें काजू, किशमिश, बादाम तक खिलाते हैं और फिर उसी को मारने को कहा जाता है। इससे बच्चों के मन में हिंसा की प्रवृत्ति उत्पन्न हो सकती है।
विज्ञापन
