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MP News: मध्य प्रदेश में शराब होगी महंगी, इसी माह आ सकती है नई आबकारी नीति
Tue, 09 Jan 2024 12:20 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Tue, 09 Jan 2024 12:20 AM IST
सार
ई आबकारी नीति को लेकर आबकारी विभाग ने शराब ठेकेदारों से सुझाव लिए हैं। इसमें उन्होंने लाइसेंस फीस बढ़ाने पर उतनी ही एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की भी मांग की है।
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मप्र सरकार की नई शराब नीति
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
मध्य प्रदेश में शराब के दाम बढ़ सकते हैं। आबकारी विभाग की इस बार 10 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की तैयारी है। आबकारी विभाग ने देशी शराब पर एक्साइज ड्यूटी छह प्रतिशत और विदेशी शराब पर 10 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी की है। जानकारी के अनुसार पिछले चार साल से देशी शराब पर और दो साल से विदेशी शराब पर उत्पाद शुल्क नहीं बढ़ाया है।
जानकारी के अनुसार प्रदेश में नई आबकारी नीति जनवरी माह के अंत तक आ सकती है। 2023 में आबकारी नीति फरवरी अंत में आई थी और वर्ष 2022 में जनवरी में नई नीति जारी हुई थी। इस बार आचार संहिता लगने से पहले इसे लाने की तैयारी है।
नई आबकारी नीति को लेकर आबकारी विभाग ने शराब ठेकेदारों से सुझाव लिए हैं। इसमें उन्होंने लाइसेंस फीस बढ़ाने पर उतनी ही एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की भी मांग की है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उनको शराब बेचने की मात्रा कम दी जाए। इसका कारण 85 प्रतिशत मॉल बचने की शर्त है, जिसके नहीं बचने पर उन पर पांच प्रतिशत की पैनल्टी लगती है। उनका कहना है कि इससे बचने के लिए उनको सस्ते में शराब बेचनी पड़ती है। इसके अलावा उनके द्वारा शराब बेचने के लिए नगरीय निकाय की खाली दुकानें या जगह उपलब्ध कराने की मांग की है।
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जानकारी के अनुसार प्रदेश में नई आबकारी नीति जनवरी माह के अंत तक आ सकती है। 2023 में आबकारी नीति फरवरी अंत में आई थी और वर्ष 2022 में जनवरी में नई नीति जारी हुई थी। इस बार आचार संहिता लगने से पहले इसे लाने की तैयारी है।
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नई आबकारी नीति को लेकर आबकारी विभाग ने शराब ठेकेदारों से सुझाव लिए हैं। इसमें उन्होंने लाइसेंस फीस बढ़ाने पर उतनी ही एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की भी मांग की है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उनको शराब बेचने की मात्रा कम दी जाए। इसका कारण 85 प्रतिशत मॉल बचने की शर्त है, जिसके नहीं बचने पर उन पर पांच प्रतिशत की पैनल्टी लगती है। उनका कहना है कि इससे बचने के लिए उनको सस्ते में शराब बेचनी पड़ती है। इसके अलावा उनके द्वारा शराब बेचने के लिए नगरीय निकाय की खाली दुकानें या जगह उपलब्ध कराने की मांग की है।
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