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MP News: एमपी में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम, सरकारी नौकरी से लेकर राजनीति तक मिला आरक्षण
Fri, 17 Apr 2026 02:20 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 17 Apr 2026 02:20 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में महिलाओं को नौकरी, राजनीति और योजनाओं में आरक्षण व प्राथमिकता देकर सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार के इन कदमों से महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। प्रदेश में महिलाओं को सरकारी नौकरियों, स्थानीय निकायों और राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षण और प्राथमिकता दी जा रही है। इससे महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और वे हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण
मध्य प्रदेश में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। यह आरक्षण मुख्य रूप से सीधी भर्ती में लागू होता है। पहले यह 33 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। एमपीपीएससी और अन्य विभागीय भर्तियों में इसका लाभ महिलाओं को मिल रहा है। प्रदेश के वन विभाग सहित कई अन्य विभागों में भी महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। इससे पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
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स्थानीय निकायों में 50% तक भागीदारी
ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया गया है। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं सरपंच, पार्षद और महापौर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंची हैं और स्थानीय शासन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश में ग्राम पंचायत से जिला पंचायत स्तर तक तीन लाख 95 हजार 552 जनप्रतिनिधि हैं। इनमें 2 लाख नौ हजार 41 महिला जनप्रतिनिधि हैं। यह 52 प्रतिशत से अधिक हैं।
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राजनीति में 33% आरक्षण का प्रभाव
देश में लागू नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में इसका असर मध्य प्रदेश की राजनीति में भी देखने को मिलेगा और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और मजबूत होगी। संभावना है कि प्रदेश में वर्तमान में विधानसभा की 230 सीटों की संख्या बढ़कर 345 और लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 43 तक पहुंच जाएगी। विधानसभा में वर्तमान में 27 महिला विधायक है, जिनकी संख्या बढ़कर 114 तक पहुंच जाएगी।
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योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता
राज्य सरकार की कई योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। स्व-सहायता समूह (एसएचजी) के ग्रुप के माध्यम से काम और कम दरों पर बैक से ऋण दिए जा रहे हैं। लाड़ली बहना योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 1500 रुपए की राशि दिी जा रही है। आवास योजनाओं और स्वरोजगार योजनाओं में महिलाओं को विशेष लाभ मिल रहा है। कई योजनाओं में संपत्ति महिला के नाम पर देने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण
मध्य प्रदेश में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। यह आरक्षण मुख्य रूप से सीधी भर्ती में लागू होता है। पहले यह 33 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। एमपीपीएससी और अन्य विभागीय भर्तियों में इसका लाभ महिलाओं को मिल रहा है। प्रदेश के वन विभाग सहित कई अन्य विभागों में भी महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। इससे पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
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स्थानीय निकायों में 50% तक भागीदारी
ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया गया है। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं सरपंच, पार्षद और महापौर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंची हैं और स्थानीय शासन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश में ग्राम पंचायत से जिला पंचायत स्तर तक तीन लाख 95 हजार 552 जनप्रतिनिधि हैं। इनमें 2 लाख नौ हजार 41 महिला जनप्रतिनिधि हैं। यह 52 प्रतिशत से अधिक हैं।
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राजनीति में 33% आरक्षण का प्रभाव
देश में लागू नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में इसका असर मध्य प्रदेश की राजनीति में भी देखने को मिलेगा और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और मजबूत होगी। संभावना है कि प्रदेश में वर्तमान में विधानसभा की 230 सीटों की संख्या बढ़कर 345 और लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 43 तक पहुंच जाएगी। विधानसभा में वर्तमान में 27 महिला विधायक है, जिनकी संख्या बढ़कर 114 तक पहुंच जाएगी।
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योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता
राज्य सरकार की कई योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। स्व-सहायता समूह (एसएचजी) के ग्रुप के माध्यम से काम और कम दरों पर बैक से ऋण दिए जा रहे हैं। लाड़ली बहना योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 1500 रुपए की राशि दिी जा रही है। आवास योजनाओं और स्वरोजगार योजनाओं में महिलाओं को विशेष लाभ मिल रहा है। कई योजनाओं में संपत्ति महिला के नाम पर देने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
