Lok Sabha Chunav: आरिफ से लेकर सनव्वर को BJP ने दी तवज्जो, फिर भी मुस्लिम पार्टी से दूर, इस बार जताएंगे भरोसा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन 2024 के आगाज से पहले देशभर में पसमांदा मुस्लिम समाज को लेकर विशेष अभियान चलाया। इसके तहत देशभर की करीब 65 मुस्लिम बहुल लोकसभा सीटों पर विशेष अभियान चलाया गया। प्रदेश की 3 लोकसभा सीट भी इसमें शामिल हैं।
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करने पर आए तो देश के सर्वोच्च सिंहासन पर एपीजे अब्दुल कलाम को विराजित कर दिया। बात भरोसा जताने की आई तो कांग्रेस से आईं नजमा हेपतुल्लाह को केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्यपाल तक बनाया गया। आरिफ मोहम्मद खान, मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन भी भाजपा से उपकृत होते रहे हैं। मंशा सबका साथ, सबका विकास की रही। लेकिन, मन में गांठ बांध कर बैठा (या खुद को मुस्लिम हितैषी निरूपित करने वाली कांग्रेस के भ्रम जाल में फंसा) मुस्लिम समुदाय भाजपा से दूर ही रहा है। भाजपा के दो कदम करीब आने की कोशिश भी मुस्लिम समुदाय के चार कदम दूर जाने के हालात से बाहर नहीं आने दे रही हैं।
बात मप्र की होती है तो भाजपा से जुड़े कद्दावर मुस्लिम नेता आरिफ बेग को पार्टी ने केंद्र की सियासत तक में जगह दी। प्रदेश में वरिष्ठ नेताओं में शुमार से लेकर केंद्र में सम्मान तक बेग के हाथ आया है। सिलसिला अब तक जारी है। राजधानी भोपाल में रियाज अली काका से लेकर हकीम कुरैशी और शौकत मोहम्मद खान तक कद और पद से नवाजे जा चुके हैं। पिछले 20 साल में प्रदेश में भाजपा की सरकार रहते हुए कई मुस्लिम नेता मंत्री तमगे के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। लेकिन, इसके विपरीत भाजपा की झोली अब भी मुस्लिम समुदाय के भरोसे से खाली ही दिखाई देती है। पिछले कुछ चुनाव में भाजपा के खाते में मुस्लिम वोट प्रतिशत बढ़ा तो है, लेकिन अब भी यह कोम पूरी तरह से कांग्रेस के मोहपाश से बाहर नहीं आई है।
केंद्र में इन्हें मिला मौका
आरिफ बेग, मुख्तार अब्बास नकवी, शाहनवाज हुसैन (केंद्रीय मंत्री), नजमा हेपतुल्लाह (केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल) आरिफ मोहम्मद खान (राज्यपाल), एमजे अकबर (राज्यसभा सांसद) आदि।
प्रदेश में इनके हिस्से आया मान
अनवर मोहम्मद खान (मप्र अल्पसंखयक आयोग), एसके मुद्दिन (मप्र मदरसा बोर्ड, कुक्कुट विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम), सलीम कुरैशी (मप्र हज कमेटी, मप्र उर्दू अकादमी), राशिद खान (मप्र मदरसा बोर्ड), हाजी इनायत हुसैन (मप्र राज्य हज कमेटी), कलीम अहमद बच्चा (मप्र मदरसा बोर्ड), जाफर बेग (मप्र उर्दू अकादमी), नियाज़ मोहम्मद खान (मप्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग), हकीम कुरैशी (मप्र मदरसा बोर्ड, मसाजिद कमेटी), शरीफ अहमद, मिर्जा हबीब बेग (मसाजिद कमेटी), मोहम्मद गनी अंसारी (मप्र मदरसा बोर्ड), शौकत मोहम्मद खान, डॉ सनव्वर पटेल (मप्र वक्फ बोर्ड), रफत वारसी आदि। इनमें से अधिकांश मुस्लिम नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। जबकि कुछ के हिस्से राज्य मंत्री दर्जा और इसके लिए निर्धारित सुविधाएं दी गई हैं।
प्रदेश स्तर का पद
भाजपा ने मुस्लिम समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए प्रदेश स्तर का मोर्चा भी आकार दिया है। जिसमें पिछले दो दशकों में लालभाई कमाल भाई, हिदायत उल्लाह, डॉ सनव्वर पटेल और रफत वारसी को नवाजा जा चुका है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी एम एजाज खान के पास है। हिदायत उल्लाह और डॉ सनव्वर पटेल इस पद पर एक से ज्यादा बार सेवाएं दे चुके हैं।
कदम ये भी बढ़े
जिस राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नाम से मुस्लिमों को हमेशा भयभीत किया जाता रहा है। उसी संघ ने मुस्लिमों को अपने करीब लाने के लिए एक विशेष विंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच खड़ा किया। वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के नेतृत्व में एक बड़ी टीम पूरे देश में काम कर रही है।
पूर्णकालिक सदस्य भी बनाए
संघ की कार्यनीति की तर्ज पर भाजपा ने मुस्लिम समुदाय को भी पूर्ण कालिक सदस्यों के रूप में जोड़ा। प्रदेश में भाजपा दूसरे कार्यकाल के दौरान इस टीम ने कई महत्वाकांक्षी योजनाओ पर काम भी किया है।
अब पसमांदा पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन 2024 के आगाज से पहले देशभर में पसमांदा मुस्लिम समाज को लेकर विशेष अभियान चलाया। इसके तहत देशभर की करीब 65 मुस्लिम बहुल लोकसभा सीटों पर विशेष अभियान चलाया गया। प्रदेश की 3 लोकसभा सीट भी इसमें शामिल हैं। इन सभी जगह विशेष प्रशिक्षित कार्यकर्ता पहुंचकर मुस्लिमों को भाजपा की रीति, नीति, कल्याणकारी योजनाओं और भविष्य की योजनाओं से परिचित करवा रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं को मोदी मित्र नाम दिया गया है। अब, यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने फीसदी मुस्लिम भाजपा पर भरोसा जताते हुए उसे वोट देंगे।
