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एमपी: ‘जय जोहार’ पर टिप्पणी से गरमाई सियासत, मंत्री पटेल बोले- आदिवासी समाज के गौरव का प्रतीक है अभिवादन
Wed, 14 Oct 2026 07:01 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 14 Oct 2026 07:01 PM IST
सार
भोपाल में आदिवासी युवाओं पर कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में मिसरोद टीआई के निलंबन के बाद ‘जय जोहार’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इसे आदिवासी समाज के गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बताया, वहीं विपक्ष ने एफआईआर की मांग उठाई है।
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मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में आदिवासी युवाओं पर कथित अभद्र टिप्पणी के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह के निलंबन के बाद अब ‘जय जोहार’ के सम्मान और आदिवासी समाज की भावनाओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि ‘जय जोहार’ आदिवासी समाज के गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की मांग की जा रही है।
ये भी पढ़ें- जय जोहार पर बवाल: आदिवासी छात्रों के अपमान पर भड़की कांग्रेस, जीतू पटवारी बोले- पुलिस अधिकारी पर एफआईआर करो
मुख्यमंत्री के निर्देश पर टीआई निलंबित
मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना की जानकारी मिलते ही संज्ञान लिया और कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रहते हैं। ‘जय जोहार’ सम्मान का अभिवादन है और आदिवासी समाज के गौरव व स्वाभिमान से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस अभिवादन का उपयोग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी समाज की उन्नति और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।
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क्या है ‘जय जोहार’ का मतलब?
‘जय जोहार’ आदिवासी बहुल क्षेत्रों में प्रचलित अभिवादन है। इसका इस्तेमाल नमस्कार, प्रणाम और सम्मान व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसमें सम्मान, गौरव और शुभकामना का भाव निहित है। मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में भी यह अभिवादन प्रचलित है। यह केवल अभिवादन का तरीका नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा से भी जुड़ा है। इसी वजह से इस अभिवादन को लेकर कथित अभद्र टिप्पणी का मामला सामाजिक सम्मान के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
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आदिवासी वोटों के लिहाज से अहम है मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी मतदाताओं की अहम भूमिका रही है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इनके अलावा कई सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 30 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 15 सीटें मिली थीं। दो सीटें अन्य के खाते में गई थीं। इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में लौटी थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर बदली। भाजपा ने 24 आदिवासी आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 22 सीटें मिलीं। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई। भाजपा ने प्रदेश में सत्ता में वापसी की।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर टीआई निलंबित
मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना की जानकारी मिलते ही संज्ञान लिया और कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रहते हैं। ‘जय जोहार’ सम्मान का अभिवादन है और आदिवासी समाज के गौरव व स्वाभिमान से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस अभिवादन का उपयोग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी समाज की उन्नति और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।
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क्या है ‘जय जोहार’ का मतलब?
‘जय जोहार’ आदिवासी बहुल क्षेत्रों में प्रचलित अभिवादन है। इसका इस्तेमाल नमस्कार, प्रणाम और सम्मान व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसमें सम्मान, गौरव और शुभकामना का भाव निहित है। मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में भी यह अभिवादन प्रचलित है। यह केवल अभिवादन का तरीका नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा से भी जुड़ा है। इसी वजह से इस अभिवादन को लेकर कथित अभद्र टिप्पणी का मामला सामाजिक सम्मान के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
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आदिवासी वोटों के लिहाज से अहम है मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी मतदाताओं की अहम भूमिका रही है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इनके अलावा कई सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 30 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 15 सीटें मिली थीं। दो सीटें अन्य के खाते में गई थीं। इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में लौटी थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर बदली। भाजपा ने 24 आदिवासी आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 22 सीटें मिलीं। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई। भाजपा ने प्रदेश में सत्ता में वापसी की।
