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संतोष वर्मा पर MP सरकार सख्त, बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा, ब्राह्मण समाज ने CM आवास का घेराव टाला

Sat, 13 Dec 2025 04:54 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 13 Dec 2025 04:54 PM IST
सार

विवादित बयानों के चलते आईएएस अधिकारी और अजाक्स अध्यक्ष संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने उन्हें सेवा से हटाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है, जिसके बाद सवर्ण समाज ने सीएम हाउस घेराव फिलहाल टाल दिया है।

 

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MP government takes strict action against Santosh Verma, sends dismissal proposal to Centre, Brahmin community
आईएएस संतोष वर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी और न्यायपालिका पर गंभीर आरोप लगाने वाले आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ) के अध्यक्ष संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वर्मा को सेवा से हटाने का प्रस्ताव भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेज दिया है। सरकार की इस कार्रवाई के बाद सवर्ण समाज ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव का कार्यक्रम फिलहाल 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। यह घेराव रविवार को प्रस्तावित था।
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सामाजिक तनाव का हवाला देते हुए केंद्र को भेजा प्रस्ताव
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि 23 नवंबर 2025 को अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा द्वारा दिए गए बयानों से प्रदेश में सामाजिक तनाव की स्थिति बनी। इन बयानों के बाद प्रदेशभर में विरोध हुआ और कई सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संघों व जनप्रतिनिधियों ने शासन को ज्ञापन सौंपे। प्रतिवेदन में कहा गया है कि वर्मा का आचरण अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के विरुद्ध है। इसी आधार पर 2012 बैच के आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को सेवा से पृथक करने और उन्हें दिया गया आईएएस अवार्ड वापस लेने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
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राज्य सेवा से आईएएस तक का सफर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संतोष वर्मा मूल रूप से राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और उनका आवंटन वर्ष 1996 का है। वर्ष 2019 में उन्हें आईएएस पदोन्नति के लिए चयन क्षेत्र में शामिल किया गया था। उस समय उनके खिलाफ अपराध क्रमांक 851/2016 लंबित था, जिसके कारण उनकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद चयन समिति ने उनका नाम अनंतिम सूची में शामिल किया। बाद में 6 अक्टूबर 2020 का एक न्यायालयीन आदेश प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर उन्हें दोषमुक्त बताया गया और 16 अक्टूबर 2020 को उनकी संवीक्षा प्रमाणित कर दी गई। इसके बाद भारत सरकार ने 6 नवंबर 2020 को उन्हें आईएएस अवार्ड प्रदान किया।


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फर्जी आदेश का मामला, गिरफ्तारी तक पहुंचा केस
बाद में जांच में यह सामने आया कि 6 अक्टूबर 2020 का न्यायालयीन आदेश वास्तव में पारित ही नहीं हुआ था। इसे फर्जी पाए जाने पर संतोष वर्मा के खिलाफ अपराध क्रमांक 155/2021 दर्ज किया गया। पुलिस ने 10 जुलाई 2021 को उन्हें गिरफ्तार किया। निचली अदालत और हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद 27 जनवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहने के कारण 13 जुलाई 2021 को वर्मा को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत निलंबित किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर ने 16 मई 2024 को निलंबन बढ़ाने के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके पालन में 28 जनवरी 2025 को वर्मा को निलंबन से बहाल किया गया। हालांकि शासन ने साफ किया है कि विभागीय जांच अभी भी जारी है।

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आईएएस पदोन्नति पर दोबारा निर्णय का मामला
राज्य सरकार का कहना है कि जिस आदेश के आधार पर वर्मा की संवीक्षा प्रमाणित कर उन्हें आईएएस पदोन्नति दी गई थी, वह आदेश वास्तविक नहीं पाया गया। इसी कारण उनकी आईएएस नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर अंतिम निर्णय के लिए मामला केंद्र सरकार को भेजा गया है। बता दें कि सामान्य प्रशासन विभाग की अवर सचिव फरहीन खान द्वारा डीओपीटी को भेजे गए प्रस्ताव में ब्राह्मण समाज की बेटियों और हाईकोर्ट को लेकर दिए गए विवादित बयानों का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है।

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विवाद की शुरुआत
23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में आयोजित अजाक्स के प्रांतीय सम्मेलन में संतोष वर्मा को संगठन का अध्यक्ष चुना गया था। इसी मंच से उन्होंने ब्राह्मण समाज की बेटियों और आरक्षण को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। बाद में एक और वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने विरोधियों को लेकर आक्रामक बयान दिया था।
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