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MP Election: कांग्रेस के सेनापति रहे सिंधिया BJP की चुनावी नैया को कितना पार लगा पाएंगे, जानें क्या है रणनीति

Tue, 10 Oct 2023 08:43 PM IST
Arvind Tiwari अरविंद तिवारी
Updated Tue, 10 Oct 2023 08:43 PM IST
सार

MP Election 2023: साल 2018 में कांग्रेस के सेनापति रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अब बीजेपी के साथ हैं। 2018 में सिंधिया कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष थे। अब बीजेपी उनके प्रभाव का इस्तेमाल वोटरों को अपने पक्ष में लाने के लिए करेगी। 

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MP Election 2023 What will be impact of Jyotiraditya Scindia in Madhya Pradesh Assembly
ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश में सत्ता कायम रखने के लिए बीजेपी निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में प्रदेश की 100 सीटों पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का लाभ उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी की तैयारी सिंधिया को प्रदेश की सभी 230 सीटों पर ले जाने की है। 100 ऐसी सीटों को चिह्नित किया गया है, जहां किसी जमाने में सिंधिया रियासत का सीधा दखल होता था। साल 2018 में कांग्रेस सत्ता में लौटी थी तो उसकी एक बड़ी वजह सिंधिया भी थे। उन्होंने मध्यप्रदेश में चुनाव अभियान समिति का नेतृत्व किया था।

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मध्यप्रदेश में सत्ता में कायम रखने के लिए बीजेपी को मालवा-निमाड़ में फिर ताकत बढ़ानी होगी। साथ ही ग्वालियर-चंबल संभाग पर भी पकड़ बनानी होगी। इन दोनों क्षेत्रों के साथ ही भोपाल-नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों और बुंदेलखंड के कुछ जिलों में सिंधिया रियासत का प्रभाव रहा है। यह पूर्ववर्ती ग्वालियर स्टेट का हिस्सा रहा था। इन क्षेत्रों में लगभग 100 सीटें बताई जा रही हैं। अलग-अलग स्तर पर बीजेपी के अंदरुनी आकलन में यह बात सामने आई हैं कि यहां बीजेपी को सिंधिया मजबूती दे सकते हैं।
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सकारात्मक बना सकते हैं माहौल
बीजेपी का अंदरुनी आकलन कहता है कि प्रदेश में सत्ता पक्ष के विधायकों के खिलाफ असंतोष है। पार्टी के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के भ्रष्टाचार एवं पार्टी पदाधिकारियों में पनपे भाई-भतीजावाद ने भी हालात बिगाड़े हैं। ऐस में सिंधिया का प्रभाव अहम भूमिका निभा सकता है। यदि मालवा-निमाड़ के साथ ही ग्वालियर-चंबल और मध्य भारत में सिंधिया मोर्चा संभालते हैं तो माहौल सकारात्मक बन सकता है।
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पार्टी का फीडबैक कहता है कि ग्रामीणों और युवाओं में सिंधिया का अच्छा प्रभाव है। पूर्ववर्ती ग्वालियर स्टेट में उनका बहुत सम्मान है। उनके मैदान संभालने से बीजेपी को फायदा होगा। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का भी सिंधिया पर बहुत भरोसा है। मध्यप्रदेश के साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी उन्हें तैनात किया जाएगा।


शिवपुरी या बमोरी से चुनाव भी लड़वा सकती है
सूत्रों का कहना है कि बीजेपी सिंधिया को शिवपुरी या बमोरी से चुनाव लड़वा सकती है। शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री और ज्योतिरादित्य की बुआ यशोधरा राजे ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव लड़ने से इनकार किया है। इससे शिवपुरी सीट पर बीजेपी नए उम्मीदवार को तलाश रही है। बमोरी से सिंधिया को उतारा गया तो राजगढ़ और गुना की सीट पर भी बीजेपी को फायदा मिल सकता है।



यह हैं सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र
उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, देवास, धार, शाजापुर, राजगढ़, विदिशा, होशंगाबाद, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर, गुना और दतिया।

यहां भी अच्छा असर दिखेगा
इंदौर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, झाबुआ, अलीराजपुर, रीवा और सागर।

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