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एमपी: 30 नवंबर को रिटायर होंगे डीजीपी कैलाश मकवाणा, नए पुलिस मुखिया की दौड़ में तीन नाम चर्चा में
Wed, 28 Oct 2026 08:20 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 28 Oct 2026 08:20 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाणा 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। गृह विभाग के आदेश के बाद नए पुलिस मुखिया की नियुक्ति की प्रक्रिया पर नजरें हैं, वहीं वरुण कपूर, उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।
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डीजीपी कैलाश मकवाना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकवाणा 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। गृह विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इससे अब प्रदेश के अगले पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं। 1 दिसंबर को प्रदेश के नए डीजीपी ज्वाइंन करेंगे। 1988 बैच के IPS अधिकारी मकवाणा को दिसंबर 2024 में प्रदेश का डीजीपी बनाया गया था। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2006 और 2018 में दिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया गया है।
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दो साल के कार्यकाल को लेकर उठा था सवाल
मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने से पहले पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के बीच इस विषय पर चर्चा हुई थी। बताया गया कि पीएचक्यू ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर मकवाणा का कार्यकाल दो दिसंबर 2026 तक रखने का सुझाव दिया था। इसके पीछे उनकी जॉइनिंग की तारीख और डीजीपी के लिए निर्धारित दो साल के कार्यकाल का तर्क दिया गया था। इस प्रस्ताव के बाद उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा था। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंचा। इसके बाद सरकार ने 30 नवंबर को ही सेवानिवृत्ति तय करते हुए आदेश जारी कर दिया।
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नए डीजीपी की दौड़ में तीन नामों की चर्चा ज्यादा
मध्यप्रदेश के अगले पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए राज्य सरकार 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेज चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत यूपीएससी तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद सरकार नए डीजीपी के नाम पर निर्णय लेगी। संभावित दावेदारों में जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख उपेंद्र जैन और होमगार्ड की महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हालांकि, अंतिम चयन यूपीएससी से आने वाले पैनल और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
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वरुण कपूर की दावेदारी पर क्यों टिकी नजरें?
नए डीजीपी के चयन में अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की तारीख भी अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष होना चाहिए। इसी वजह से वरुण कपूर की दावेदारी को लेकर भी चर्चा चल रही थी। यदि मकवाणा की सेवानिवृत्ति दिसंबर में आगे बढ़ती, तो कपूर के पास बची सेवा अवधि के कारण उनकी पात्रता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
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दो साल के कार्यकाल को लेकर उठा था सवाल
मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने से पहले पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के बीच इस विषय पर चर्चा हुई थी। बताया गया कि पीएचक्यू ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर मकवाणा का कार्यकाल दो दिसंबर 2026 तक रखने का सुझाव दिया था। इसके पीछे उनकी जॉइनिंग की तारीख और डीजीपी के लिए निर्धारित दो साल के कार्यकाल का तर्क दिया गया था। इस प्रस्ताव के बाद उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा था। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंचा। इसके बाद सरकार ने 30 नवंबर को ही सेवानिवृत्ति तय करते हुए आदेश जारी कर दिया।
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नए डीजीपी की दौड़ में तीन नामों की चर्चा ज्यादा
मध्यप्रदेश के अगले पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए राज्य सरकार 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेज चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत यूपीएससी तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद सरकार नए डीजीपी के नाम पर निर्णय लेगी। संभावित दावेदारों में जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख उपेंद्र जैन और होमगार्ड की महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हालांकि, अंतिम चयन यूपीएससी से आने वाले पैनल और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
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वरुण कपूर की दावेदारी पर क्यों टिकी नजरें?
नए डीजीपी के चयन में अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की तारीख भी अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष होना चाहिए। इसी वजह से वरुण कपूर की दावेदारी को लेकर भी चर्चा चल रही थी। यदि मकवाणा की सेवानिवृत्ति दिसंबर में आगे बढ़ती, तो कपूर के पास बची सेवा अवधि के कारण उनकी पात्रता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
