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एमपी: शिवराज की नाराजगी पर सीएम मोहन बोले- सीएस से रिपोर्ट मांगी है, जल्द दूध का दूध और पानी का पानी होगा
Mon, 12 Oct 2026 07:53 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 12 Oct 2026 07:53 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। वन विकास निगम ने कार्रवाई को नियमानुसार बताया है, जबकि प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे दशकों से वहां रह रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री शिवराज और सीएम मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सरकार और भाजपा संगठन के स्तर तक पहुंच गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और उन्होंने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। रविवार को हुई कार्रवाई के बाद शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे थे और उनके साथ धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए प्रभावित परिवारों को राहत देने की बात कही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मामले में बात करने की भी बात कही थी। उनके दिल्ली से भोपाल लौटने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
ये भी पढ़ें- एमपी: बुधनी में क्यों भड़के शिवराज सिंह चौहान? आदिवासियों के घर टूटने पर अपनी ही सरकार से नाराज, जानें मामला
वन विकास निगम ने कार्रवाई को सही ठहराया
वहीं, इस मामले में राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल ने बताया कि क्षेत्र के आरक्षित वन कक्ष 426 की जमीन वर्ष 2021 में निगम को वृक्षारोपण के लिए वन विभाग से मिली थी। उनके अनुसार, उस समय वहां अतिक्रमण नहीं था और करीब 135 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया गया था। निगम का दावा है कि वर्ष 2022 में सिंहपुर गांव के कुछ लोगों ने करीब 32 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर अतिक्रमण कर लिया। इसके बाद वर्ष 2024 में वन अपराध के प्रकरण दर्ज किए गए। निगम के मुताबिक, प्रभावित लोगों को 4 दिसंबर 2025 और फिर 7 सितंबर 2026 को बेदखली के नोटिस दिए गए थे। रविवार को करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया और छह अस्थायी झोपड़ियां हटाई गईं।
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आदिवासी परिवारों का दावा- दशकों से रह रहे हैं
दूसरी ओर, प्रभावित आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे इस जमीन पर लंबे समय से रह रहे हैं। कुछ परिवारों ने वर्ष 1986 और 1995 की पट्टे की रसीदें होने का दावा किया है। ऐसे में जमीन पर कब्जे की अवधि और परिवारों के दावों की जांच इस मामले का अहम पहलू बन गई है। उनका कहना है कि उनके पास उपलब्ध सेटेलाइट इमेज में वर्ष 2021 तक संबंधित जगह पर अतिक्रमण नहीं दिखता, जबकि नवंबर 2022 की तस्वीर में अतिक्रमण नजर आता है। हालांकि, अब वन विभाग के अधिकारियों के दावे और आदिवासी परिवारों के दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही विवाद की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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शिवराज देर रात तक धरने पर बैठे रहे
रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने गृह क्षेत्र बुधनी के कोसमी गांव पहुंचे थे। यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह जुल्म की पराकाष्ठा है। इस अन्याय की जानकारी मैं मुख्यमंत्री को दूंगा। इन परिवारों की सिसकियां, आंखों के आंसू, कुचले हुए खेत और चौपट किया गया भविष्य, सब मुख्यमंत्री को बताऊंगा। शिवराज ने कहा कि उन्हें यह कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव को बदनाम करने की साजिश लगती है। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं, जो हमेशा भाजपा को वोट देते आए हैं। इन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का समर्थन किया। इन्हीं के वोट से भाजपा के नेता जीतते हैं और मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ अधिकारी इस कार्रवाई के जरिए पार्टी को भी बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। शिवराज ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों से अनुरोध किया था कि आदिवासी परिवार वर्षों से उस जमीन पर रह रहे हैं, इसलिए उन्हें परेशान नहीं किया जाए। इसके बावजूद कार्रवाई हुई। नाराजगी जताने के बाद शिवराज देर रात तक प्रभावित आदिवासी परिवारों के साथ धरने पर बैठे रहे।
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विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का मौका
शिवराज सिंह चौहान के आदिवासियों के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के अधिकारियों और कार्रवाई पर सवाल उठाने से विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। विपक्षी नेता भाजपा और प्रदेश सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा चुनाव के समय आदिवासी कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से बेदखल किया जा रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं होने की अटकलों को भी हवा मिली है। शिवराज की नाराजगी और मुख्यमंत्री की ओर से रिपोर्ट मांगने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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वन विकास निगम ने कार्रवाई को सही ठहराया
वहीं, इस मामले में राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल ने बताया कि क्षेत्र के आरक्षित वन कक्ष 426 की जमीन वर्ष 2021 में निगम को वृक्षारोपण के लिए वन विभाग से मिली थी। उनके अनुसार, उस समय वहां अतिक्रमण नहीं था और करीब 135 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया गया था। निगम का दावा है कि वर्ष 2022 में सिंहपुर गांव के कुछ लोगों ने करीब 32 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर अतिक्रमण कर लिया। इसके बाद वर्ष 2024 में वन अपराध के प्रकरण दर्ज किए गए। निगम के मुताबिक, प्रभावित लोगों को 4 दिसंबर 2025 और फिर 7 सितंबर 2026 को बेदखली के नोटिस दिए गए थे। रविवार को करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया और छह अस्थायी झोपड़ियां हटाई गईं।
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आदिवासी परिवारों का दावा- दशकों से रह रहे हैं
दूसरी ओर, प्रभावित आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे इस जमीन पर लंबे समय से रह रहे हैं। कुछ परिवारों ने वर्ष 1986 और 1995 की पट्टे की रसीदें होने का दावा किया है। ऐसे में जमीन पर कब्जे की अवधि और परिवारों के दावों की जांच इस मामले का अहम पहलू बन गई है। उनका कहना है कि उनके पास उपलब्ध सेटेलाइट इमेज में वर्ष 2021 तक संबंधित जगह पर अतिक्रमण नहीं दिखता, जबकि नवंबर 2022 की तस्वीर में अतिक्रमण नजर आता है। हालांकि, अब वन विभाग के अधिकारियों के दावे और आदिवासी परिवारों के दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही विवाद की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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शिवराज देर रात तक धरने पर बैठे रहे
रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने गृह क्षेत्र बुधनी के कोसमी गांव पहुंचे थे। यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह जुल्म की पराकाष्ठा है। इस अन्याय की जानकारी मैं मुख्यमंत्री को दूंगा। इन परिवारों की सिसकियां, आंखों के आंसू, कुचले हुए खेत और चौपट किया गया भविष्य, सब मुख्यमंत्री को बताऊंगा। शिवराज ने कहा कि उन्हें यह कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव को बदनाम करने की साजिश लगती है। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं, जो हमेशा भाजपा को वोट देते आए हैं। इन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का समर्थन किया। इन्हीं के वोट से भाजपा के नेता जीतते हैं और मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ अधिकारी इस कार्रवाई के जरिए पार्टी को भी बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। शिवराज ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों से अनुरोध किया था कि आदिवासी परिवार वर्षों से उस जमीन पर रह रहे हैं, इसलिए उन्हें परेशान नहीं किया जाए। इसके बावजूद कार्रवाई हुई। नाराजगी जताने के बाद शिवराज देर रात तक प्रभावित आदिवासी परिवारों के साथ धरने पर बैठे रहे।
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विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का मौका
शिवराज सिंह चौहान के आदिवासियों के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के अधिकारियों और कार्रवाई पर सवाल उठाने से विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। विपक्षी नेता भाजपा और प्रदेश सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा चुनाव के समय आदिवासी कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से बेदखल किया जा रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं होने की अटकलों को भी हवा मिली है। शिवराज की नाराजगी और मुख्यमंत्री की ओर से रिपोर्ट मांगने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
