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MP Budget Session: विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित
Fri, 03 Mar 2023 08:23 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 03 Mar 2023 08:23 PM IST
सार
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन हंगामे से शुरू हुआ। जीतू पटवारी के निलंबन को लेकर कांग्रेस ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
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मध्य प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन की शुरुआत हंगामे से हुई। पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के निलंबन के मुद्दे पर कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा कर दिया। आसंदी को घेरकर नारेबाजी की। इसके बाद कार्यवाही 13 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
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शुक्रवार को सदन का कामकाज हंगामे से शुरू हुआ और उसी की भेट चढ़ गया। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष ने आसंदी को घेरा और नारेबाजी की। संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर सत्ता पक्ष के दबाव में कार्यवाही कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी को बिना किसी वैध कारण के तानाशाहीपूर्ण तरीके से पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है।
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नोटिस पर अकेले पड़ गए हैं पटवारी
संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के मसले पर जीतू पटवारी अलग-थलग पड़ गए हैं। नोटिस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ तक ने दस्तखत नहीं किए हैं। कांग्रेस के ही आधे विधायकों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जीतू पटवारी को कांग्रेस ने अकेला छोड़ दिया है। पटवारी मामले में कांग्रेस की हालत शोले फिल्म के डायलॉग की तरह हो गई है... आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ.. बाकी मेरे पीछे आओ।
जनता सिखाएगी शिवराज सरकार को सबक
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि कुछ पत्रकार साथियों ने सूचना दी है कि विधानसभा की कवरेज करने से उन्हें रोका गया। इसके खिलाफ वे धरने पर बैठ गए। तब कहीं जाकर उन्हें कवरेज की अनुमति मिली। शिवराज सरकार ने गुरुवार को कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी को गलत तरीके से निलंबित करवाकर विधायिका का अपमान किया है। कवरेज करने से रोककर अब पत्रकारिता का अपमान कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की जनता आपका यह अत्याचार देख रही है और सबक सिखाने को तैयार है।
विपक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री को घेरा
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने सदन के अध्यक्ष गिरीश गौतम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का संकल्प देकर चर्चा की तारीख तय करने की मांग की। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा की नियमावली की किताब कथित तौर पर कांग्रेस विधायकों की तरफ फेंकी। इससे हंगामा बढ़ गया। विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। जब अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता है तो नैतिकता के आधार पर उन्हें कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। लोकतंत्र के हत्यारों को हम छोड़ेंगे नहीं। हम सड़क पर हैं। सरकार को भी सड़क पर ला देंगे। इस बीच हंगामे की वजह से अध्यक्ष ने प्रश्नकाल स्थगित किया। दोबारा 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो वर्मा ने आरोप लगाया कि नरोत्तम मिश्रा ने अमर्यादित व्यवहार किया है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को मारने के लिए संविधान की किताब फेंकी है। उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। अध्यक्ष ने सदन पटल पर पत्रों को रखने की कार्यवाही शुरू की तो कांग्रेस विधायक गर्भगृह में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। वर्मा ने नियमों के किताब फाडकर उछाली। इसके बाद अध्यक्ष ने कार्यवाही 13 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
मिश्रा की सफाई- किताब हाथ से स्लिप हुई है
संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सफाई दी है कि चपरासी को हटा रहा था, तब किताब स्लिप हो गई। मैंने उसके लिए खेद व्यक्त कर दिया था। माफी भी मांग लिए थे। सज्जन सिंह वर्मा ने किताब फाड़कर सदन में पन्ने उड़ाए हैं। उन्होंने तो माफी नहीं मांगी। यह लोग सदन चलाना ही नहीं चाहते। कोई सार्थक बहस नहीं कर रहे हैं। कभी कहते हैं कि किसान पर बहस करो। युवाओं पर बहस करो। छिपकली पर भाषण दे रहे हैं। हल लेकर विधानसभा आ रहे हैं।
सत्ता पक्ष ने पहले से यह पूरा षड्यंत्र किया था
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि सत्तापक्ष ने पहले से पूरा षड्यंत्र किया था। सरकार सदन नहीं चलने देना चाहती। सदन चलेगा तो घोटाले खुलेंगे। प्रश्न गायब किए जा रहे हैं। उन पर भी अधूरी जानकारी दी जा रही है। सरकार प्रजातंत्र का गला घोट रही है। संसदीय मंत्री ने किताब फेंककर सदन की मर्यादा को तार-तार कर दिया।
