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MP Budget 2025: बजट पर कांग्रेस का तंज, पीसीसी चीफ बोले- BJP सरकार का बजट जुमलों का पुलिंदा, जनता के साथ धोखा
Wed, 12 Mar 2025 07:13 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 12 Mar 2025 07:13 PM IST
सार
MP Budget 2025: पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार के बजट को निराशाजनक और गुमराह करने वाला बताते हुए कहा कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी और जुमलों का पुलिंदा है। इसमें न जनता की भलाई के ठोस प्रावधान नहीं हैं।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार के बजट 2025-26 को निराशाजनक और गुमराह करने वाला बताते हुए कहा कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी और जुमलों का पुलिंदा है। इसमें न जनता की भलाई के ठोस प्रावधान हैं, न ही बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं का कोई समाधान है।
मुख्यमंत्री का दावा, लेकिन हकीकत कुछ और
पटवारी ने कहा कि बजट में गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कोई योजनाएं लाई गई हैं। गोपालक किसानों, एमएसएमई उद्योगों, स्टार्टअप्स के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि गरीबों को राहत नहीं, किसानों को उनकी फसलों के दाम नहीं, युवाओं को रोजगार नहीं और महिलाएं असुरक्षित हैं। यह बजट केवल चुनावी एजेंडे के तहत दिखावटी योजनाओं से भरा हुआ है।
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बेरोजगारी पर सरकार की चुप्पी शर्मनाक
पटवारी ने कहा, भाजपा सरकार ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाने की बात कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। युवा सरकारी भर्तियों के इंतजार में सालों से ठगा महसूस कर रहे हैं। व्यापमं घोटाले के बाद से भर्तियों की प्रक्रिया ठप है और निजी क्षेत्र में भी रोजगार सृजन के कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
किसानों को ठगने वाला बजट
मुख्यमंत्री द्वारा गोपालक किसानों के लिए खास योजना की बात पर कटाक्ष करते हुये पटवारी ने इसे महज दिखावा करार दिया है। भाजपा सरकार केवल किसानों को सपने दिखाने में लगी है। पहले डबल इंजन सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की बात की, फिर उसे भुला दिया गया। आज भी किसान अपनी उपज के उचित दाम और समय पर खाद-बीज के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में सुधार की बजाय सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है।
यह भी पढ़े
महंगाई और भ्रष्टाचार पर चुप्पी क्यों?
पटवारी ने सवाल उठाया कि सरकार ने इस बजट में महंगाई और भ्रष्टाचार पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया? उन्होंने कहा, महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल, खाद्य पदार्थ, रसोई गैस सभी की कीमतें आसमान छू रही हैं। जनता को राहत देने के बजाय सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने में लगी हुई है।
स्टेडियम और एमएसएमई सिर्फ चुनावी घोषणाएं?
पटवारी ने कहा, पिछले बजटों में भी सरकार ने खेल और उद्योगों के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि कई जिलों में पहले से स्वीकृत स्टेडियम अधूरे पड़े हैं और एमएसएमई सेक्टर ठप हो चुका है। पटवारी ने कहा, सिंहस्थ 2028 के नाम पर भाजपा सरकार भारी-भरकम बजट तो बना रही है, लेकिन क्या आम जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं? साधु-संतों और घाटों के लिए बजट का प्रावधान करना अच्छा है, लेकिन क्या सरकार जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर भी इतनी ही गंभीर है?
सार्वजनिक परिवहन की हालत खस्ता
पटवारी ने सरकारी बसों के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि प्रदेश की बस सेवाएं पहले ही जर्जर हालत में हैं। सरकार अगर वाकई परिवहन सुधारना चाहती, तो व्यापक योजनाएं लाती। लेकिन यह सरकार सिर्फ आधे-अधूरे कदम उठाकर वाहवाही लूटने में लगी रहती है।
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मुख्यमंत्री का दावा, लेकिन हकीकत कुछ और
पटवारी ने कहा कि बजट में गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कोई योजनाएं लाई गई हैं। गोपालक किसानों, एमएसएमई उद्योगों, स्टार्टअप्स के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि गरीबों को राहत नहीं, किसानों को उनकी फसलों के दाम नहीं, युवाओं को रोजगार नहीं और महिलाएं असुरक्षित हैं। यह बजट केवल चुनावी एजेंडे के तहत दिखावटी योजनाओं से भरा हुआ है।
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बेरोजगारी पर सरकार की चुप्पी शर्मनाक
पटवारी ने कहा, भाजपा सरकार ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाने की बात कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। युवा सरकारी भर्तियों के इंतजार में सालों से ठगा महसूस कर रहे हैं। व्यापमं घोटाले के बाद से भर्तियों की प्रक्रिया ठप है और निजी क्षेत्र में भी रोजगार सृजन के कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
किसानों को ठगने वाला बजट
मुख्यमंत्री द्वारा गोपालक किसानों के लिए खास योजना की बात पर कटाक्ष करते हुये पटवारी ने इसे महज दिखावा करार दिया है। भाजपा सरकार केवल किसानों को सपने दिखाने में लगी है। पहले डबल इंजन सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की बात की, फिर उसे भुला दिया गया। आज भी किसान अपनी उपज के उचित दाम और समय पर खाद-बीज के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में सुधार की बजाय सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है।
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महंगाई और भ्रष्टाचार पर चुप्पी क्यों?
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स्टेडियम और एमएसएमई सिर्फ चुनावी घोषणाएं?
पटवारी ने कहा, पिछले बजटों में भी सरकार ने खेल और उद्योगों के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि कई जिलों में पहले से स्वीकृत स्टेडियम अधूरे पड़े हैं और एमएसएमई सेक्टर ठप हो चुका है। पटवारी ने कहा, सिंहस्थ 2028 के नाम पर भाजपा सरकार भारी-भरकम बजट तो बना रही है, लेकिन क्या आम जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं? साधु-संतों और घाटों के लिए बजट का प्रावधान करना अच्छा है, लेकिन क्या सरकार जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर भी इतनी ही गंभीर है?
सार्वजनिक परिवहन की हालत खस्ता
पटवारी ने सरकारी बसों के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि प्रदेश की बस सेवाएं पहले ही जर्जर हालत में हैं। सरकार अगर वाकई परिवहन सुधारना चाहती, तो व्यापक योजनाएं लाती। लेकिन यह सरकार सिर्फ आधे-अधूरे कदम उठाकर वाहवाही लूटने में लगी रहती है।
