अब एमपी में भी कांगरेस नेताओं की ‘हाइजेकिंग’ शुरू...!
मध्यप्रदेश की राजनीति में अभी कुछ अलग ही चल रहा है। भाजपा वालों ने माधवराव सिंधिया का कार्यक्रम क्या कर दिया, कांग्रेस वाले देखते ही रह गए। इस कार्यक्रम के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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को खां, सियासत क्या नई कराती? अगला विधानसभा चुनाव जीतने की खातिर हुकूमत में बेठी बीजेपी अब मधपिरदेश के कांगरेस नेताओं को भी हाईजेक कर रई हे। ताजा मिसाल गवालियर के महाराजा रिए माधवराव सिंधिया की हे। बीजेपी ओर संघ वाले बरसों माधव महाराज को कोसते रिए। क्योंकि वो कांगरेस की सियासत करते थे। मगर इस बार गजब हुआ के खुद बीजेपी वालों ने माधव महाराज की बरसी मनाई। परोगराम उनके बेटे ओर अब भाजपा नेता बन चुके केन्द्रीय मंतरी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आयोजित करा था। जिसमें सीएम शिवराजसिंह चोहान ओर भाजपा पिरदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा समेत तमाम नेताओं ने हाजिरी लगाई। इस बदले माहोल में बीजेपी के वो नेता बगले झांक रिए हें, जिन्होंने ताजिंदगी महल के खिलाफ सियासत कर अपनी जगह बनाई। अब वो सफाई देते फिर रिए हें के उनका कोई से बेर नई हें।
यकीनन मियां, एमपी में वक्त का पहिया उल्टा घूम रिया हे। सबसे ज्यादा मुसीबत में वो भाजपाई ओर संघी हेंगे, जिन्होंने गवालियर-चंबल इलाके में महाराजशाही के खिलाफ हमेशा झंडा बुलंद करा था। इनमें से कुछ मंतरी भी बने। मगर तीन साल पेले वक्त ने ऐसा पलटा खाया के महाराज खुद ई ‘राष्ट्रवादी’ हो गए। साथ में अपनी पलटन भी ले आए। अब दुश्मन ई घराती बन जाए तो दुश्मनी केसी? यूं बीजेपी वाले ज्योतिरादित्य के दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया को खूब मानते हें। मगर हालात का तकाजा देखते हुए उनके बेटे माधवराव कांगरेस में चले गए ओर आखिरी दम तक वहीं रिए। उनके बाद बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनकी गादी चलाई। मगर कांगरेस की अंदरूनी पालिटिक्स ने छोटे महाराज को भी किनारे लगाने की कोशिश करी तो उन्होंने अपना रास्ता अलग कर लिया। सो छोटे महाराज तो आए ही, बड़े महाराज की विरासत भी साथ ले आए।
मियां, पिछले बरस तक कांगरेस माधवराव सिंधिया को 'अपना नेता’ बताके याद करा करती थी ( ये बात अलग हे के उनको भी कांगरेस नेताओं ने सीएम नई बनने दिया था)। मगर इस साल तो गजब हुआ। ये याददहानी बीजेपी खेमे से हुई। कांगरेस वाले हाथ मलते रे गए। इतना ई नई बीजेपी के तमाम नेताओं ने माधव महाराज की तारीफ भी करी। सुबह माधव महाराज की याद में राष्ट्रीय मैराथन दौड़ हुई। जिसमें खुद सिंधिया ओर उनके बेटे महाआर्यमन भी 12 किमी दोड़े। शाम को माधव महाराज की छतरी पर भजन संध्या हुई। इसी परोगराम में सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित ग्वालियर चंबल-अंचल के मंत्री ओर सभी बड़े विपक्ष नेता शामिल हुए। दूसरा गजब ये रिया के परोगराम में भाषण के वक्त ज्योतिरादित्य ने वीडी शर्मा की जगह खुद भाषण दे डाला।
मियां, इन बात के सियासी मायने भोत साफ हें। चार साल पेले गुना से लोकसभा का चुनाव हारने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अब अपने शहर गवालियर लोटना चाह रिए हें। मुमकिन हे के वो विधानसभा का चुनाव लड़ें। दूसरे वो गवालियर चंबल इलाके में अपना दबदबा कायम रखना चाह रिए हें। सो पेला काम उन्होंने माधवराव सिंधिया की यादों को बीजेपी में तवज्जो दिलाने का करा हे। आलम ये हे बरसों माधव महाराज की मुखालिफत करने वाले अब दबी जुबान से ई सही, उनकी तारीफ करने में लगे हें। इन बेचारों को पार्टी और सियासी हालात ने कहीं का नई छोड़ा। मेसिज ये हे के बीजेपी चुनाव जीतने वास्ते कुछ भी कर सकती हे।
उधर बेबस कांगरेस इस नई हाईजेकिंग को बेबसी के साथ देख रई हे। राष्ट्रीय स्तर पर तो उसके कई नेता जेसे सरकार वल्लभ भाई पटेल, नेताजी सुभाषचंद्र बोस वगेरा तो पेले ई बीजेपी ने हाई जैक कर लिए थे। अब स्टेट लेवल पर हाईजेकिंग चालू हो गई हे। कांगरेस माधव महाराज पर बीजेपी का परोगराम को चुनावी इवेंट बता रई हे पर असल में उसकी परेशानी ओर बढ़ गई हे। क्योंकि सीएम शिवराजसिंह चोहान हाल में भोपाल में मरहूम कांगरेस नेता अर्जुन सिंह की प्रतिमा स्थापना कारकरम में भी हो आए हें। ऐसे में कोई नई हाइजेकिंग हो तो मियां, हेरान मत होना।
