मियां भोपाली के झोले-बतोले: चुनाव आते ही शिवराज के नए तेवर
शिवराज के इस तेवर से प्रशासन हेरान-परेशान हे मगर पब्लिक खुश होके ताली बजा रई हे। शिवराज मंच से अपनी सरकार की पोल भी खोल रिए हें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री यानी के अपने मामाजी विधानसभा चुनाव के एक साल पेले भारी एक्शन मोड में हेंगे। तीन महीने पेले उन्होंने कामचोरी और भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों-मुलाजिमो को सरेआम सस्पेंड और बर्खास्त करने का जो सिलसिला चालू करा था, अब वो उरूज पे हे। बीते एक पखवाड़े में साहब अब तक करीब दो दर्जन अफसर मुलाजिमों को सस्पेंड और बर्खास्त कर चुके हें। तीन मुलाजिमो पे एफआईआर दर्ज हो चुकी हे और ये सिलसिला अभी जारी रहेगा। शिवराज के इस तेवर से प्रशासन हेरान-परेशान हे मगर पब्लिक खुश होके ताली बजा रई हे। शिवराज मंच से अपनी सरकार की पोल भी खोल रिए हें।
मियां, शिवराज के ये तेवर नए नए हें। जब भी चुनाव आते हें, वो एक्शन मोड में आ जाते हें ताकि लोग बाकी चार साल क्या करा, इसके बारे में सवाल न करें। काम हो न हो, पर किसी का काम लग गया, पब्लिक इसी में खुश रेती हे। ताजा सिलसिला बीते 23 सितंबर को आदिवासी जिले डिंडोरी से शुरू हुआ, जब जिले के एक गांव जोगी टिकरिया में आयोजित जनसेवा अभियान शिविर में सीएम को उज्ज्वला योजना की शिकायतें मिलीं। इसके बाद मामाजी ने मंच से ई जिला खाद्य अधिकारी टीआर अहिरवार को मंच से ही सस्पेंड का हुकम सुना दिया। साथ ही जिला कलेक्टर रत्नाकर त्रिपाठी से भी जवाब तलब करा।
खां, अब तो ये रूटीन सा बन गया हे के सीएम जहां भी सरकारी कार्यक्रम में जाते हें, एक दो को सस्पेंड करके ई लोटते हें। उन्होंने खरगोन में काम में लापरवाही बरतने के आरोप में दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। सीधी जिले में उन्होंने लापरवाही बरतने पे प्रभारी तहसीलदार, डीईओ और कटनी के मनरेगा अफसर को सस्पेंड करा। इसी तर्ज पे विदिशा जिले के नटेरन में आयोजित समरसता सम्मेलन में विधायकों की शिकायत पर जिला योजना अधिकारी महेंद्र नवैया को निलंबित करा और जल संसाधन विभाग की कार्यपालन यंत्री प्रतिभा सिंह को हटाने और उनके खिलाफ जांच कराने की बात करी। एक दो जगा उन्होंने काबिल अफसरों की तारीफ भी करी। शिवराज के इन तेवरों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ये केह के मजे लिए के सारा जबानी जमाखर्च हे। कागजों में कुछ नई हो रिया।
अब सवाल ये हे के मामाजी चुनाव के सवा साल पेई ई तूफानी तेवर क्यों दिखा रिए हें। अगर उनकी सरकार ठीक से काम कर रई होती और जमीनी हकीकत का पता सरकार को पेले ई चल गया होता तो यूं स्टेज से अफसरों को सस्पेंड करने की नोबत ई नई आती। सियासी जानकारों का केना हे के मामाजी एक तीर से दो शिकार करना चाह रिए हें। एक तो वो जता रिए कि पिरशासन जान ले कि अब उनका सामना सख्त शिवराज से हे। दूसरा पब्लिक में ये मेसेज देना हे के ‘में कोई को नई छोड़ूंगा।‘ इसका दूसरा मतलब ये भी हे के जित्ता भिरष्टाचार का मोका आपको मिलना था, मिल गया। अब चुनाव के पेले तो डंडा ई चलेगा। शिवराज ये भी जानते हें के पार्टी अब उन्हें पांचवी बार सीएम शायद ई बनाएं। ऐसे में दमदार सीएम का संदेशा देते चलें। आगे जो होगा, देखा जाएगा। मगर अफसोस की बात ये हेगी के इत्ता सब कुछ करने के बाद भी पिरदेश में न तो भिरष्टाचार काबू में आ रिया हे अोर न ही पिरशासन में वेसा डर हे, जेसा के होना चाहिए। ज्यादातर को मामला सेटल’ करने के रास्ते पता हें। फिलहाल जो कुछ हो रिया हे, वो पिरशासन की लगाम कसने से ज्यादा चुनावी टोटका हे। शुरूआती हो हल्ले के बाद सरकार अपनी चाल चलने लगेगी। अलबत्ता मीडिया में सुर्खियां बन रई हें, ये ई भोत हे।
- बतोलेबाज
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
