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MD Smuggling: गुजरात-महाराष्ट्र से लाए केमिकल, MD बनाने की ट्रेनिंग ली, तस्कर कौन, भोपाल में कैसे लगी फैक्टरी?

Mon, 14 Oct 2024 04:39 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: उदित दीक्षित Updated Mon, 14 Oct 2024 04:39 PM IST
सार

भोपाल में बनने वाली एमडी ड्रग्स को यहां से सप्लाई करना आसान नहीं था, क्योंकि यहां अंतर्राष्ट्रीय तस्कर नहीं थे। ऐसे में राजस्थान के प्रतापगढ़ में स्टोरेज और सप्लाई सेंटर बनवाया गया, जहां से देश के आधा दर्जन राज्यों में माल की सप्लाई की गई। पढ़िए, पूरी कहानी

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MD Smuggling: How a Factory in Bhopal Was Set up by Traffickers Using Chemicals From Gujarat and Maharashtra
भोपाल में बंद फर्नीचर फैक्ट्री में बन रहा था एमडी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र में बंद फर्नीचर फैक्टरी में अवैध रूप से मेफोड्रोन (एमडी) ड्रग्स बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है। इसका खुलासा होने के बाद देशभर की सुरक्षा और जांच एजेंसियों की नजर भोपाल और मध्यप्रदेश में इस तरह की गतिविधियों में लिप्त लोगों पर हैं। मध्यप्रदेश और भोपाल को शांति का टापू कहा जाता है, इसी बात का फायदा उठाकर देश के बड़े तस्कर सान्याल बाने ने मध्यप्रदेश में फैक्टरी डालने की योजना बनाई। तस्कर फर्टीलाइजर और कीटनाशक दवाएं बनाने के नाम पर महाराष्ट्र और गुजरात से केमिकल और रॉ मटेरियल भोपाल लाकर यहां एमडी ड्रग्स बना रहे थे। 

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भोपाल में बनने वाली एमडी ड्रग्स को यहां से सप्लाई करना आसान नहीं था, क्योंकि यहां अंतर्राष्ट्रीय तस्कर सक्रिय नहीं थे। ऐसे में राजस्थान के सोएब लाल के जरिए राजस्थान के प्रतापगढ़ में स्टोरेज और सप्लाई सेंटर बनवाया गया और वहां से देश के करीब आधा दर्जन राज्यों में माल की सप्लाई की गई। माल की गुणवत्ता को परखने के लिए इस तस्कर गिरोह ने मुंबई के साथ गुजरात, दिल्ली और पंजाब में सक्रिय अंतर्राष्ट्रीय तस्करों के गुर्गों तक से संपर्क किया। पहले इस गिरोह के तीन से चार बार के उत्पाद फैल हो गए, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद ड्रग्स बनाने वाले एक एक्सपर्ट ने इस गिरोह को पूरी ट्रेनिंग दी, जिसके बाद से मानक स्तर की एमडी ड्रग्स बनाकर देश के युवाओं को नशे की गर्त में झोंक रहे थे।

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आधा दर्जन राज्यों में फैला है ड्रग्स का यह नेटवर्क
भोपाल में अवैध रूप से एमडी ड्रग्स बनाने वाले तस्करों के तार देश के आधा दर्जन राज्यों के बड़े तस्करों से जुड़े हुए हैं। मंदसौर निवासी हरीश आंजना के दोस्त राजस्थान निवासी सोएब लाला ने अपने प्रदेश के प्रतापगढ़ शहर में ड्रग्स सप्लाई सेंटर बना रखा था। दो खेप माल भोपाल की फैक्ट्री में तैयार होगर प्रेमसुख पाटीदार के जरिए सोएब लाला तक हरीश आंजना पहुंचा चुका था। सोएब लाला प्रतापढ़ में बनाए गए सप्लाई सेंटर से देश के अन्य राज्यों में एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था। यह खुलासा मंदसौर पुलिस की गिरफ्त में आए प्रेमसुख पाटीदार ने पूछताछ में बताया है। एनसीबी की रिमांड पर चल रहे सान्याल बाने, अमित चतुर्वेदी, हरीश आंजना की आज सोमवार रिमांड अवधि समाप्त हो रही हैं। तीनों को एनसीबी गुजरात की अहमदाबाद या गांधी नगर की विशेष अदालत में प्रस्तुत कर सकती है। अगर, जांच एनसीबी मुख्यालय दिल्ली की टीम को सौंपी जाएगी तो आगे का प्रकरण दिल्ली की अदालत में चलेगा।

कैसे चलता था यह नेटवर्क
नासिक निवासी सान्याल बाने और भोपाल निवासी अमित चतुर्वेदी महाराष्ट्र और गुजरात से ड्रग्स बनाने के लिए रॉ मटेरियल, केमिकल लाने का कार्य करते थे। पहली बार गुजरात से केमिकल और रॉ मटेरियल और महाराष्ट्र से ड्रग्स बनाने की मशीन खरीदकर यही लोग लाए थे। फैक्ट्री खोलने के लिए मोटी रकम करीब 50 लाख रुपए हरीश आंजना ने दिए थे। हरीश आंजना इस फैक्ट्री में बनने वाले ड्रग्स को होलसेल में खरीदकर देश में बेचने का कार्य करता था। अमित चतुर्वेदी ने भोपाल में बंद फैक्ट्री तलाशकर उसे किराये पर लेने का सौदा किया। सान्याल ने महाराष्ट्र से ड्रग्स बनाने की मशीन का सौदा किया। हरीश आंजना के जरिए गुजरात से अमित चतुर्वेदी ने केमिकल और रॉ मटेरियल की खरीदी पहली बार की।

ऐसे कार्य करता रहा नेटवर्क
सान्याल बाने अपने संपर्कों से रॉ मटेरियल और केमिकल महाराष्ट्र से दिलवाता था। अमित महाराष्ट्र के साथ अधिकांश केमिकल गुजरात से भी लाता था। कुछ रॉ मटेरियल हरीश आंजना अपने संपर्कों से मंदसौर के पास से दिलवा चुका है। ड्रग्स बनने के बाद सान्याल बाने कुछ माल अपने भतीजे और तस्करों के साथ महाराष्ट्र भी पहुंचा। लेकिन, अधिकांश ड्रग्स को हरीश आंजना अपने साथी प्रेमसुख पाटीदार के जरिए राजस्थान के बड़े तस्कर सोएब लाला तक पहुंचाया। सोएब लाला राजस्थान के प्रतापगढ़ में सप्लाइ सेंटर बनाकर रखा है, जहां से वह गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ सहित दिल्ली तक ड्रग्स की सप्लाई करता है। सोएब लाला के संपर्क उत्तर प्रदेश और पंजाब में सक्रिय तस्करों से भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इस तरह यह पूरा नेटवर्क चल रहा था।

MD Smuggling: How a Factory in Bhopal Was Set up by Traffickers Using Chemicals From Gujarat and Maharashtra
देशभर में बड़ी कार्रवाई की तैयारी में एनसीबी। - फोटो : अमर उजाला

कौन हैं तस्कर, कहां से रखते हैं ताल्लुक

  • सान्याल बाने: ये नासिक का रहने वाला है। वह मुंबई के आर्थर रोड जेल में एमडी ड्रग्स की तस्करी में पांच साल की सजा काट कर बाहर निकला है। जेल में रहने के दौरान ही उसकी अंतर्राष्ट्रीय और मुंबई के तस्करों से पहचान हुई और वह तस्करी में पूरी तरह से उतर आया। सान्याल ने इस कार्य में अपने भतीजे को भी शामिल किया।
  • अमित चतुर्वेदी: यह भोपाल का रहने वाला है और एक रिटायर्ड डीएसपी का बेटा है। अमित रसायन शास्त्र से एमएससी की है। वह केमिकल का अच्छा जानकार है। वर्षों से वह केमिकल बेचने का कार्य कर रहा है, जिस कारण वह यह भी जानता है कि कौन-कौन सा केमिकल मिलाने से क्या बनाया जाएगा जो नशीला और युवाओं में शुरूर पैदा करेगा।
  • हरीश आंजना: इसका परिवार मंदसौर के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र में रहता है। उसके पिता मंदसौर में अफीम की खेती भी कर चुके हैं और अफीम की तस्करी में कई बार जेल भी जा चुके हैं। आंजना का परिवार वर्षों पहले राजस्थान से ही मंदसौर आया था। आंजना भी कुछ सालों ने अफीम, कोकीन और अन्य ड्रग्स की तस्करी में शामिल है। 2018 में तस्करी में गिरफ्तार होने के बाद भाजपा ने उसे पार्टी से निकाल चुकी है।


क्या है पूरा मामला?
एक सप्ताह पहले भोपाल के बगरोदा में गुजरात एटीएस और एनसीबी ने  एमडी ड्रग्स बनाने का कारखाना पकड़ा था। यहां से 1814 करोड़ के करीब की एमडी ड्रग्स और उसे बनाने का कच्चा माल बरामद किया गया है। इस केस में नासिक निवासी सान्याल बाने, भोपाल निवासी अमित चतुर्वेदी, मंदसौर निवासी हरीश आंजना और प्रेमसुख पाटीदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 

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