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LS Election: गिरता मतदान, कमजोर प्रयास... अलग अलग वजह से लाखों हैं घर से बाहर, नहीं करते मतदान
Thu, 02 May 2024 10:45 AM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 02 May 2024 10:45 AM IST
सार
प्रदेश में हो चुके दो चरण के मतदान में कम वोट पड़े हैं। इसके पीछ के कारणों की तलाश में उन बातों को भुलाया जा रहा है, जिनकी वजह से मतदान तक पहुंचने के हालात गड़बड़ा रहे हैं।
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मप्र लोकसभा चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोकतंत्र के पर्व के लिए देशभर में मतदान का दौर जारी है। हजारों प्रयास और सैंकड़ों अपीलों का भी असर लोगों की अरुचि के तौर पर सामने आ रहा है। अब तक हो चुके दो चरणों के मतदान ने इस अरुचि को उजागर भी किया है और चुनाव आयोग से लेकर सियासी दलों के माथे तक शिकन भी बढ़ाई है। लेकिन इस बीच की जा रही कारणों की तलाश में उन बातों को भुलाया जा रहा है, जिनकी वजह से मतदान तक पहुंचने के हालात गड़बड़ा रहे हैं।
उच्च शिक्षा के लिए बढ़ते युवाओं के कदम, जॉब के लिए घरों से दूर जाने की हिम्मत, मजदूरी के लिए गांवों से शहर के लिए होता पलायन और शादी ब्याह के रिश्तों में बंधकर अपना मूल एड्रेस बदलने के हालात। इन स्थितियों ने प्रदेश में ही हजारों की तादाद में लोग यहां से वहां हैं। सरकारी कामों की धक्का लगवाई आदतों ने हालात इतने विकट बना रखे हैं कि पता बदले लोग समय पर न तो अपना मूल एड्रेस परिवर्तित करवा पा रहे हैं और न जिम्मेदारी के साथ मतदाता सूची में संशोधित अधिकार सुनिश्चित करवा पा रहे हैं।
प्रदेश में हजारों संस्थान
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेज की संख्या 27 से ज्यादा है। इनमें 4800 स्टूडेंट्स की क्षमता है। इसके विपरीत इससे कई गुना ज्यादा निजी कॉलेज भी प्रदेश में मौजूद हैं, जिनकी स्टूडेंट्स तादाद लाखों में है। इसके अलावा इंजीनियरिंग और दसों तरह के टेक्निकल एजुकेशन वाले संस्थान भी हैं। इधर अब तक गांवों से दूर उच्च शिक्षा के लिए भी हजारों स्टूडेंट्स को अपना घर छोड़ने की मजबूरी है।
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एक नौकरी की खातिर
सरकारी नौकरी की खातिर अपने घरों से दूर रहने वाले लोगों के लिए तो प्रक्रिया मौजूद है। लेकिन निजी संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। मजदूरी से लेकर छोटे रोजगार के लिए घर छोड़े हुए लोग भी इतने जागरूक नहीं हो पाए हैं कि वे समय रहते अपना पता दुरुस्त करवा सकें।
सैया की खातिर बदला पता
शादियों के बाद यहां से वहां जाने वाली लड़कियों की संख्या भी कम नहीं है। लेकिन मतदान के लिए वापस अपने मूल एड्रेस पर पहुंच पाना न तो आसान है और न ही संभव। इसके चलते भी बड़ी संख्या में महिलाओं को मतदान से वंचित रहना पड़ता है।
प्रयास इस और क्यों नहीं
बुजुर्गों, दिव्यांगों, मीडियाकर्मियों से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक के लिए जहां हैं, वहां से मतदान की सुविधा चुनाव आयोग ने दी है। ऐसे ही प्रयास स्टूडेंट्स, जॉब करने वालों, नव विवाहित महिलाओं के लिए भी किए जा सकते हैं। प्रदेश में ही इस व्यवस्था से मतदान प्रतिशत की बढ़ी हुई स्थिति आंकलन की जा सकती है।
(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)
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उच्च शिक्षा के लिए बढ़ते युवाओं के कदम, जॉब के लिए घरों से दूर जाने की हिम्मत, मजदूरी के लिए गांवों से शहर के लिए होता पलायन और शादी ब्याह के रिश्तों में बंधकर अपना मूल एड्रेस बदलने के हालात। इन स्थितियों ने प्रदेश में ही हजारों की तादाद में लोग यहां से वहां हैं। सरकारी कामों की धक्का लगवाई आदतों ने हालात इतने विकट बना रखे हैं कि पता बदले लोग समय पर न तो अपना मूल एड्रेस परिवर्तित करवा पा रहे हैं और न जिम्मेदारी के साथ मतदाता सूची में संशोधित अधिकार सुनिश्चित करवा पा रहे हैं।
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प्रदेश में हजारों संस्थान
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेज की संख्या 27 से ज्यादा है। इनमें 4800 स्टूडेंट्स की क्षमता है। इसके विपरीत इससे कई गुना ज्यादा निजी कॉलेज भी प्रदेश में मौजूद हैं, जिनकी स्टूडेंट्स तादाद लाखों में है। इसके अलावा इंजीनियरिंग और दसों तरह के टेक्निकल एजुकेशन वाले संस्थान भी हैं। इधर अब तक गांवों से दूर उच्च शिक्षा के लिए भी हजारों स्टूडेंट्स को अपना घर छोड़ने की मजबूरी है।
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एक नौकरी की खातिर
सरकारी नौकरी की खातिर अपने घरों से दूर रहने वाले लोगों के लिए तो प्रक्रिया मौजूद है। लेकिन निजी संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। मजदूरी से लेकर छोटे रोजगार के लिए घर छोड़े हुए लोग भी इतने जागरूक नहीं हो पाए हैं कि वे समय रहते अपना पता दुरुस्त करवा सकें।
सैया की खातिर बदला पता
शादियों के बाद यहां से वहां जाने वाली लड़कियों की संख्या भी कम नहीं है। लेकिन मतदान के लिए वापस अपने मूल एड्रेस पर पहुंच पाना न तो आसान है और न ही संभव। इसके चलते भी बड़ी संख्या में महिलाओं को मतदान से वंचित रहना पड़ता है।
प्रयास इस और क्यों नहीं
बुजुर्गों, दिव्यांगों, मीडियाकर्मियों से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक के लिए जहां हैं, वहां से मतदान की सुविधा चुनाव आयोग ने दी है। ऐसे ही प्रयास स्टूडेंट्स, जॉब करने वालों, नव विवाहित महिलाओं के लिए भी किए जा सकते हैं। प्रदेश में ही इस व्यवस्था से मतदान प्रतिशत की बढ़ी हुई स्थिति आंकलन की जा सकती है।
(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)
